Diamond Power Infrastructure Ltd (DPIL) के लिए यह खबर बेहद अहम है। कंपनी को KPI Green Energy Limited से पावर केबल की सप्लाई के लिए ₹93.08 करोड़ का एक बड़ा लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) मिला है। इस बड़े सौदे को 30 जून, 2026 तक पूरा किए जाने की उम्मीद है, जिससे कंपनी की भविष्य की कमाई की संभावना (revenue visibility) मजबूत हुई है।
यह नया ऑर्डर DPIL के ऑर्डर बुक को बढ़ाने के साथ-साथ यह भी दर्शाता है कि कंपनी अपने मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज को फिर से चालू (recommissioning) करने के प्रयासों के बीच नए बिजनेस हासिल करने में सक्षम है।
DPIL, पावर ट्रांसमिशन इक्विपमेंट बनाने वाली एक इंटीग्रेटेड कंपनी है। यह ध्यान देने योग्य है कि कंपनी ने हाल ही में Adani Green Energy से भी पावर और सोलर केबल के लिए ₹747.64 करोड़ का एक बड़ा LOI जीता था, जिसे जनवरी से दिसंबर 2026 के बीच पूरा किया जाएगा।
आपको बता दें कि DPIL इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत एक डेट रेजोल्यूशन (debt resolution) प्रक्रिया से गुजरी है और GSEC-Monarch कंसोर्टियम द्वारा इसका अधिग्रहण किया गया था। कंपनी अपनी वडोदरा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को सितंबर 2025 तक फिर से चालू करने की योजना बना रही है। पिछले फाइनेंशियल ईयर FY2023-24 में कंपनी का कंसोलिडेटेड टर्नओवर (consolidated turnover) ₹343 करोड़ रहा था।
इस नए ऑर्डर से कंपनी की ऑर्डर बुक में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है और भविष्य की रेवेन्यू विजिबिलिटी बेहतर हुई है। जैसे-जैसे इस ऑर्डर का एग्जीक्यूशन (execution) होगा, कंपनी की कैपेसिटी यूटिलाइजेशन (capacity utilization) बढ़ सकती है। यह IBC अधिग्रहण और फैसिलिटी री-कमीशनिंग के दौरान DPIL की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में मदद करेगा।
हालांकि, निवेशकों को कंपनी के अतीत के वित्तीय और रेगुलेटरी मुद्दों पर भी नजर रखनी चाहिए। Diamond Power Infrastructure Limited पर पहले भी गंभीर आरोप लगे हैं। 2018 में, कंपनी और इसके डायरेक्टर्स ₹2,654 करोड़ के बैंक फ्रॉड केस में ED और CBI की जांच के घेरे में थे, जिसके बाद एसेट्स अटैच किए गए थे। इसके अलावा, हाल ही में कंपनी पर 10.85 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था क्योंकि वह 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त तिमाही के लिए मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) नॉर्म्स का पालन करने में विफल रही थी। कंपनी ने यह फाइन भर दिया है और MPS इश्यू को ठीक करने का वादा किया है, लेकिन इस तरह के गवर्नेंस लैप्स (governance lapses) निवेशकों के भरोसे पर असर डाल सकते हैं।
DPIL भारत के केबल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में Polycab India Ltd, KEI Industries Ltd, R R Kabel Ltd, और Finolex Cables Ltd जैसे स्थापित खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करती है।
आगे निवेशकों को ₹93.08 करोड़ के KPI Green Energy वाले LOI के एग्जीक्यूशन में प्रगति, वडोदरा मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के सफल री-कमीशनिंग, मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) नॉर्म्स का अनुपालन और भविष्य में मिलने वाले अन्य महत्वपूर्ण ऑर्डर्स पर ध्यान देना चाहिए।