Diamond Power Infrastructure को हैदराबाद में 310 MW के एक बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के लिए ₹435.71 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह ऑर्डर दिग्गज इंजीनियरिंग फर्मों के एक कंसोर्टियम ने दिया है, और सप्लाई अगस्त 2026 से शुरू होगी। यह बड़ी जीत भारत के बढ़ते डिजिटल सेक्टर में इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग को दर्शाती है।
₹435.71 करोड़ का पावर केबल सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट
Diamond Power Infrastructure को एक बड़े प्रोजेक्ट के लिए ₹435.71 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। कंपनी हाई टेंशन (High Tension) और लो टेंशन (Low Tension) पावर केबल सप्लाई करेगी। यह सप्लाई हैदराबाद में बन रहे 310 MW के एक विशाल डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के लिए है। यह अहम कॉन्ट्रैक्ट Larsen & Toubro, Sterling and Wilson, और Blue Star जैसी बड़ी इंजीनियरिंग कंपनियों के कंसोर्टियम ने दिया है।
सप्लाई कब और कैसे होगी?
इस डील के तहत, Diamond Power लगभग 21.35 लाख मीटर केबल सप्लाई करेगी। इसमें 1.89 लाख मीटर हाई टेंशन केबल और 19.46 लाख मीटर लो टेंशन केबल शामिल हैं। डिलीवरी अगस्त 2026 के पहले हफ्ते से शुरू होकर मार्च 2027 तक किश्तों में पूरी होगी। कॉन्ट्रैक्ट में IEEMA (Indian Electrical & Electronics Manufacturers’ Association) प्राइस वेरिएशन फॉर्मूला का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका मतलब है कि कच्चे माल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव के हिसाब से फाइनल प्राइस एडजस्ट होगा, जो अप्रैल 2026 के इंडेक्स पर आधारित होगा। यह व्यवस्था कंपनी को लंबी एग्जीक्यूशन अवधि में कच्चे माल की कीमतों के जोखिम को मैनेज करने में मदद करेगी।
डेटा सेंटर मार्केट का बढ़ता फोकस
यह प्रोजेक्ट भारत के डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में चल रही ज़बरदस्त हलचल का एक बड़ा उदाहरण है। कंपनी के अनुमान के मुताबिक, भारत में 2025 से 2030 के फाइनेंशियल ईयर के बीच डेटा सेंटर इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स के लिए वायर और केबल का कुल मार्केट साइज लगभग ₹4,600 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। डेटा सेंटर को लगातार और हाई-क्वालिटी पावर सप्लाई की ज़रूरत होती है, ऐसे में बड़े ऑर्डर्स हासिल करना पावर इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स की कॉम्पिटिटिव क्षमता का एक अहम पैमाना है।
कंपनी की फाइनेंशियल और ऑपरेशनल स्थिति
Diamond Power Infrastructure, जो इंडस्ट्रियल गुड्स और सर्विसेज सेक्टर में काम करती है, ने हाल के वर्षों में अपने बिजनेस ऑपरेशंस में काफी उतार-चढ़ाव और रिकवरी देखी है। इन्वेस्टर्स अक्सर कंपनी की ऑर्डर बुक को मैनेज करने और समय पर कॉम्प्लेक्स डिलीवरी पूरी करने की क्षमता पर नज़र रखते हैं। केबल मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस में प्रोजेक्ट्स में देरी या कॉस्ट ओवररन से प्रॉफिट मार्जिन पर तुरंत असर पड़ सकता है। डेटा सेंटर सेगमेंट पर कंपनी का फोकस एक स्ट्रेटेजिक कदम है, जिसका लक्ष्य हाई-वैल्यू और मिशन-क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की ओर बढ़ना है। इन प्रोजेक्ट्स में आमतौर पर ट्रेडिशनल केबल सेगमेंट्स की तुलना में बेहतर ऑर्डर रिलायबिलिटी मिलती है।
आगे की राह
शेयरहोल्डर्स और एनालिस्ट्स के लिए, अगस्त 2026 से शुरू होने वाले इस ऑर्डर की एक्चुअल एग्जीक्यूशन स्पीड पर नज़र रखना सबसे अहम होगा। चूंकि कॉन्ट्रैक्ट कई महीनों तक फैला हुआ है, इसलिए लगातार रेवेन्यू रिकग्निशन और हेल्दी प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने के लिए समय पर डिलीवरी ज़रूरी होगी। इसके अलावा, निवेशक यह भी ट्रैक कर सकते हैं कि कंपनी आने वाले सालों में अपनी ग्रोथ को बनाए रखने के लिए इस ₹4,600 करोड़ के पाइपलाइन से और कितने ऑर्डर हासिल करती है। प्राइस वेरिएशन फॉर्मूले का उपयोग होने के बावजूद, कच्चे माल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी के मुकाबले मार्जिन बनाए रखने में मैनेजमेंट की क्षमता पर कोई भी अपडेट प्रासंगिक बना रहेगा।
