Diamond Power Infrastructure Limited (DPIL) ने शेयरहोल्डर्स को एक अहम नोटिस भेजा है, जिसमें कंपनी कई बड़े वित्तीय फैसलों पर उनकी मंजूरी चाहेगी। इसमें कंपनी की उधार लेने की क्षमता को काफी बढ़ाना और प्रमोटर फर्मों के साथ बड़े ट्रांजैक्शन्स शामिल हैं। शेयरहोल्डर्स 17 फरवरी से 18 मार्च, 2026 तक रिमोट ई-वोटिंग से अपना फैसला सुनाएंगे।
सबसे बड़ा एजेंडा कंपनी की उधार लेने की सीमा को बढ़ाकर कुल ₹4,000 करोड़ करना है। इससे डायरेक्टर्स को लोन, बॉन्ड या डिबेंचर जैसे ज़रिए से फंड जुटाने और कंपनी की प्रॉपर्टीज़ को गिरवी रखने का अधिकार मिल जाएगा। इसके अलावा, DPIL अपनी प्रमोटर कंपनियों GSEC Limited और Monarch Infraparks Private Limited से ₹300 करोड़ तक का अनसिक्योर्ड लोन (Unsecured Loan) लेने की भी मंजूरी चाहती है। यह लोन वर्किंग कैपिटल, विस्तार और जनरल कॉर्पोरेट पर्पज़ेज़ के लिए होगा, जिस पर 8% प्रति वर्ष का इंटरेस्ट रेट लगेगा। यह सुविधा फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए मांगी गई है।
वित्तीय सेहत: एक नाजुक स्थिति
यह सारी कवायद ऐसे समय में हो रही है जब Diamond Power Infrastructure Limited की वित्तीय सेहत काफी नाजुक है। कंपनी का शेयरहोल्डर इक्विटी (Shareholder Equity) लगभग ₹7.1 बिलियन नेगेटिव है, जिसका मतलब है कि कंपनी की देनदारियां उसकी संपत्तियों से कहीं ज़्यादा हैं। इसका डेट-टू-इक्विटी रेश्यो (Debt-to-Equity Ratio) -350.7% और -351.15% है। डेट सर्विस कवरेज रेश्यो (DSCR), जो यह बताता है कि कंपनी अपने लोन को चुकाने की कितनी क्षमता रखती है, प्रस्तावित लेन-देन से पहले सिर्फ 0.14 है और इसे बढ़ाने के बाद भी 0.15 रहने का अनुमान है।
हालिया नतीजों (Q2 FY26) में कंपनी के मुनाफे में 593.25% की जोरदार बढ़ोतरी और रेवेन्यू में 75.12% की वृद्धि दिखी है, जो शायद एक उम्मीद की किरण है। हालांकि, पांच सालों में नेट सेल्स में गिरावट और ऑपरेटिंग प्रॉफिट का स्थिर रहना, साथ ही पिछले तीन सालों में खराब ROE (Return on Equity) और ROCE (Return on Capital Employed) कंपनी की लंबी अवधि की फंडामेंटल कमजोरी को दर्शाते हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम और गवर्नेंस की चिंताएं
निवेशकों को इन प्रस्तावों पर खास नज़र रखनी चाहिए क्योंकि कुछ चिंताजनक पहलू हैं:
- बढ़ता कर्ज का बोझ: नेगेटिव नेट वर्थ और कम DSCR के बावजूद ₹4,000 करोड़ तक का कर्ज बढ़ाने का प्रस्ताव कंपनी के रिस्क को बहुत बढ़ा सकता है।
- रिलेटेड-पार्टी ट्रांजैक्शन्स (MRPTs): प्रमोटर एंटिटीज़ से ₹300 करोड़ तक के लोन की मंजूरी पर बारीकी से नज़र रखने की ज़रूरत है। पारदर्शिता और निष्पक्षता ज़रूरी है।
- Monarch Infraparks की वित्तीय स्थिति: Monarch Infraparks Private Limited ने FY2024-25 में ज़ीरो टर्नओवर दिखाया, लेकिन 'Other Income' से बड़ा प्रॉफिट कमाया। भले ही इसका DPIL पर सीधा असर न दिखे, लेकिन यह अनूठा वित्तीय ढांचा निवेशकों के लिए सवाल खड़े करता है।
- पिछली गवर्नेंस की गड़बड़ियां: DPIL का कॉर्पोरेट गवर्नेंस रिकॉर्ड भी सवालों के घेरे में रहा है। अप्रैल 2025 में BSE और NSE ने गवर्नेंस रिपोर्ट में गड़बड़ियों को लेकर वार्निंग लेटर दिया था। जनवरी 2026 में NSE ने भी FY25 की सीक्रेटरियल कंप्लायंस रिपोर्ट पर ई-मेल से चेतावनी दी थी।
ये सभी वित्तीय कदम ऐसे समय में उठाए जा रहे हैं जब कंपनी को कॉर्पोरेट गवर्नेंस और वित्तीय ढांचे में लगातार कमजोरियां दिखी हैं। शेयरहोल्डर्स इस वोटिंग के नतीजों पर और कंपनी द्वारा अपने बढ़ते कर्ज और संबंधित पक्षों के साथ होने वाले सौदों को कैसे संभाला जाता है, इस पर करीब से नज़र रखेंगे।
पीयर कम्पेरिज़न (Peer Comparison)
पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में Peers से तुलना करना मुश्किल है क्योंकि DPIL का फोकस अपनी आंतरिक वित्तीय पुनर्गठन पर है। दूसरे कंपनियाँ जहाँ मजबूत बैलेंस शीट से ग्रोथ पर ध्यान दे रही हैं, वहीं DPIL के प्रस्ताव मौजूदा तनावपूर्ण वित्तीय स्थिति को स्थिर करने या संचालन को फंड करने की ज़रूरत से प्रेरित लगते हैं।