Diamond Power Infrastructure ने दिसंबर तिमाही (Q3 FY26) में अपने नतीजे जारी किए हैं, जिसमें 8 गुना का जबरदस्त उछाल दर्ज हुआ है। कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल के ₹6 करोड़ से बढ़कर ₹50 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं, रेवेन्यू में 54% की शानदार बढ़त के साथ यह ₹474 करोड़ रहा। कंपनी का कहना है कि यह प्रदर्शन बेहतर एग्जीक्यूशन, कैपेसिटी यूटिलाइजेशन में बढ़ोतरी और प्रीमियम एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज (EHV) केबल्स व स्पेशलिटी कंडक्टर्स की मजबूत मांग के चलते संभव हुआ है। कंपनी के पास ₹3,300 करोड़ से अधिक का तगड़ा ऑर्डर बुक है, जो फाइनेंशियल ईयर 2027 तक रेवेन्यू की अच्छी विजिबिलिटी देता है। यह सब भारतीय पावर सेक्टर में चल रही भारी तेज़ी के साथ मेल खाता है, जहां 2030 तक हर साल ₹2.5 लाख करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर का अनुमान है। ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन (T&D) इक्विपमेंट्स की डिमांड अगले कुछ सालों में 10-15% कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ने की उम्मीद है।
लेकिन, इन चमकीले नतीजों के पीछे कुछ गंभीर चिंताएं भी छिपी हैं। Diamond Power Infrastructure का मौजूदा P/E रेश्यो करीब 126.85x है, जो इंडस्ट्री के दूसरे बड़े प्लेयर्स की तुलना में बहुत ज़्यादा है। उदाहरण के लिए, KEC International जैसी कंपनियां 23.53x से 64.3x के P/E पर ट्रेड कर रही हैं, और Kalpataru Projects International का P/E रेश्यो लगभग 22.6x से 25.7x है। इससे भी बड़ी चिंता यह है कि कंपनी की बुक वैल्यू नेगेटिव, करीब ₹-13.6 है। यह कंपनी की बैलेंस शीट पर गंभीर दबाव को दर्शाता है और इसके प्रतिस्पर्धियों की पॉजिटिव बुक वैल्यू से बिल्कुल अलग है। इन चिंताओं के चलते, नतीजों के ठीक बाद यानी मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को स्टॉक में 2% की गिरावट देखी गई।
Diamond Power Infrastructure ने प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर फोकस करके ऑपरेशनल एफिशिएंसी तो बढ़ाई ही है, साथ ही बड़े प्रोजेक्ट्स हासिल करने की क्षमता भी दिखाई है। इसके ऑर्डर बुक में Adani Energy Solutions (₹1,349 करोड़) और Adani Green Energy (₹748 करोड़) जैसे बड़े क्लाइंट्स के कॉन्ट्रैक्ट्स शामिल हैं। कंपनी डी-लिवरेजिंग (कर्ज कम करने) के अपने प्रयासों की बात कर रही है और वर्किंग कैपिटल साइकिल को 60 दिनों तक लाने का दावा कर रही है। सितंबर 2025 तक कंपनी पर ₹610 करोड़ का कर्ज बताया गया था। हालांकि, हालिया वित्तीय विश्लेषणों से कुल कर्ज ₹25.1 बिलियन (या ₹2510 करोड़) तक पहुंचने और शेयरहोल्डर इक्विटी नेगेटिव ₹-7.1 बिलियन (या ₹-710 करोड़) होने की बात सामने आई है, जिससे डेट-टू-इक्विटी रेश्यो बहुत ज्यादा नेगेटिव हो जाता है। यह विरोधाभास और लगातार नेगेटिव इक्विटी गंभीर चिंता के विषय हैं।
जो निवेशक ज़्यादा रिस्क नहीं लेना चाहते, उनके लिए कुछ पॉइंट्स ज़रूर गौर करने लायक हैं। सबसे बड़ी चिंता कंपनी की नाजुक बैलेंस शीट है, जो नेगेटिव शेयरहोल्डर इक्विटी से साफ दिखती है। इसका मतलब है कि कंपनी की देनदारियां उसकी संपत्तियों से ज़्यादा हैं। यह स्थिति भविष्य में कर्ज लेने की क्षमता को सीमित कर सकती है और वित्तीय जोखिम बढ़ा सकती है। इसके अलावा, Adani ग्रुप जैसे कुछ बड़े क्लाइंट्स पर ज़्यादा निर्भरता भी एक रिस्क फैक्टर है, अगर ये रिश्ते बदले तो। कुछ एनालिस्ट रिपोर्ट्स इसे 'Strong Sell' की सलाह दे रही हैं, जिसका मुख्य कारण खराब फंडामेंटल्स और नेगेटिव बुक वैल्यू है। हाल ही में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) से FY25 की एनुअल सेक्रेटेरियल कंप्लायंस रिपोर्ट को लेकर मिली एक रेगुलेटरी कम्युनिकेशन भी कंप्लायंस रिस्क को बढ़ाती है।
आगे चलकर, Diamond Power Infrastructure को सरकारी पहलों और रिन्यूएबल एनर्जी की बढ़ती क्षमता का फायदा मिल सकता है। 2026 के लिए एनालिस्ट्स ने शेयर के टारगेट प्राइस ₹160-₹185 रखे हैं, जो अच्छी ग्रोथ की संभावना दिखाते हैं, बशर्ते कंपनी का एग्जीक्यूशन मजबूत बना रहे और मार्जिन्स स्थिर हों। लेकिन, इस पोटेंशियल को हासिल करने के लिए कंपनी को अपने ऑपरेशनल सक्सेस को मजबूत फाइनेंशियल हेल्थ में बदलना होगा, खासकर नेगेटिव इक्विटी की समस्या को हल करना होगा और अपने ऊंचे वैल्यूएशन को इंडस्ट्री के दूसरे प्लेयर्स के मुकाबले सही ठहराना होगा। मार्केट कंपनी की बैलेंस शीट में लगातार सुधार और ऑर्डर बुक के विस्तार पर बारीकी से नज़र रखेगा।