Diamond Power Infrastructure ने ₹10,000 करोड़ के मार्केट कैप का एक बड़ा माइलस्टोन (Milestone) पार कर लिया है। यह कंपनी के लिए एक ज़बरदस्त वापसी का संकेत है, क्योंकि 2022 में जब यह इंसॉल्वेंसी (Insolvency) प्रोसीडिंग्स (Proceedings) के ज़रिए ₹500 करोड़ में अधिग्रहित हुई थी, तब इसका मार्केट कैप केवल ₹1,000 करोड़ था। शेयर की कीमतों में आई इस तूफानी तेजी ने निवेशकों को पिछले एक साल में 102% और सिर्फ पिछले महीने में 35% का बंपर रिटर्न दिया है, जिससे यह सेंसेक्स (Sensex) जैसे प्रमुख सूचकांकों को पीछे छोड़ रहा है।
हालांकि, इस शानदार उछाल के पीछे की हकीकत थोड़ी अलग है। Diamond Power का वैल्यूएशन (Valuation) अपने सेक्टर के अन्य खिलाड़ियों की तुलना में आसमान छू रहा है। कंपनी का P/E (Price-to-Earnings) रेश्यो 90x से भी ऊपर है, जबकि KEC International का P/E लगभग 21.6x, Skipper Ltd का 23.85x और Polycab India का 46.1x के आसपास है। यह दिखाता है कि बाजार मौजूदा कीमतों पर स्टॉक को कितना महंगा मान रहा है। भारत का पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन (T&D) सेक्टर ₹9 लाख करोड़ के अपेक्षित निवेश के साथ भविष्य के लिए मजबूत दिख रहा है। लेकिन, हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि FY26 में नए प्रोजेक्ट अवार्ड्स (Project Awards) FY25 की तुलना में धीमे रहे हैं, जो संभवतः नए ऑर्डरों के लिए बाजार में कुछ नरमी का संकेत दे सकता है। जानकारों का मानना है कि सेक्टर के वैल्यूएशन अब पहले जैसे सस्ते नहीं रहे।
इस महंगे वैल्यूएशन के साथ, Diamond Power की वित्तीय सेहत (Financial Health) भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। कंपनी का बुक वैल्यू प्रति शेयर (Book Value Per Share) -₹13.62 से -₹16.67 के बीच नकारात्मक है। और इसकी नेट वर्थ (Net Worth) लगातार नेगेटिव (Negative) बनी हुई है, जिसका मतलब है कि कंपनी पर देनदारियां (Liabilities) उसकी कुल संपत्ति (Assets) से कहीं ज़्यादा हैं। यह कर्ज और नेट वर्थ के अनुपात (Debt-to-Net Worth Ratio) -351.15% से भी नीचे है। रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) जैसे महत्वपूर्ण मेट्रिक्स भी 3.19% से लेकर नकारात्मक रेंज में हैं, जो शेयरधारक पूंजी पर लाभ उत्पन्न करने में कंपनी की अक्षमता को दर्शाता है। इसके अलावा, पिछले पांच सालों में कंपनी की बिक्री (Sales) में भी गिरावट दर्ज की गई है।
Diamond Power Infrastructure ने 'विजन 2030' के तहत 2030 तक ₹10,000 करोड़ का सालाना रेवेन्यू (Annual Revenue) हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। कंपनी अपने केबल मैन्युफैक्चरिंग (Cable Manufacturing) का विस्तार कर रही है और प्रीमियम प्रोडक्ट्स में भी निवेश कर रही है, ताकि भारत के बढ़ते ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर (Transmission Infrastructure) और ग्रीन एनर्जी (Green Energy) के अवसरों का फायदा उठा सके। हालांकि, सेक्टर की ग्रोथ अच्छी है, लेकिन स्टॉक का मौजूदा मूल्यांकन (Current Market Valuation) तभी टिकाऊ रह पाएगा जब कंपनी को लगातार बड़े ऑर्डर मिलते रहें और उसकी वित्तीय गुणवत्ता (Financial Quality) में सुधार हो। बाजार की मौजूदा उत्साह शायद कंपनी की संरचनात्मक वित्तीय कमजोरियों (Structural Financial Weaknesses) और बदलते सेक्टर डायनामिक्स (Sector Dynamics) को नजरअंदाज कर रही है, जिस पर सावधानी बरतना ज़रूरी है।