नंबर्स का खेल: Q3 FY26 में कैसा रहा प्रदर्शन?
Dhruv Consultancy Services के Q3 FY26 के नतीजे बेहद चिंताजनक रहे। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ईयर-ऑन-ईयर (YoY) 124.7% गिरकर ₹(5.44) करोड़ पर आ गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹22.56 करोड़ था। क्वार्टर-ऑन-क्वार्टर (QoQ) भी रेवेन्यू में 128.3% की गिरावट देखी गई, जो पिछले क्वार्टर के ₹19.40 करोड़ से बहुत कम है। इसी के चलते, कंपनी ने ₹31.01 करोड़ का भारी कंसोलिडेटेड नेट लॉस (Consolidated Net Loss) दर्ज किया है, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹2.15 करोड़ के प्रॉफिट (Profit) से 1544.7% कम है। स्टैंडअलोन (Standalone) नतीजों में भी यही तस्वीर दिखी, जहाँ रेवेन्यू 115.8% गिरकर ₹(5.44) करोड़ रहा और नेट लॉस ₹30.97 करोड़ दर्ज हुआ। कंसोलिडेटेड बेसिक ईपीएस (Basic EPS) ₹(16.37) रहा।
क्वालिटी पर सवाल: अकाउंटिंग बदलाव का असर
इस बड़ी गिरावट की एक बड़ी वजह रेवेन्यू रिकग्निशन अकाउंटिंग मेथोडोलॉजी (Revenue Recognition Accounting Methodology) में आया बदलाव है। इंड एएस 115 (Ind AS 115) के तहत इस बदलाव के कारण कंपनी का रेवेन्यू ₹24.97 करोड़ कम दिखाया गया। ऑडिटर (Auditor) ने भी इस पर 'एम्फेसिस ऑफ मैटर' (Emphasis of Matter) के तहत ध्यान दिलाया है। नतीजतन, कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग मार्जिन (Consolidated Operating Margin) (534.47%) के नकारात्मक स्तर पर चला गया, जो पिछले साल की समान अवधि में 10.11% था। स्टैंडअलोन ऑपरेटिंग मार्जिन भी (539.73%) पर पहुंच गया।
NHAI का स्टे ऑर्डर: थोड़ी राहत
वहीं, कंपनी के लिए एक थोड़ी राहत की खबर यह है कि मद्रास हाई कोर्ट (Madras High Court) ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा कंपनी को डिबार (Debar) करने के आदेश पर फिलहाल स्टे (Interim Stay) लगा दिया है। हालाँकि, इस मामले का अंतिम नतीजा अभी आना बाकी है।
भविष्य की राह: क्या हैं उम्मीदें?
निवेशकों की नज़र अब कंपनी के भविष्य के प्रदर्शन पर रहेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कंपनी अकाउंटिंग एडजस्टमेंट के बिना भी लगातार रेवेन्यू और प्रॉफिट बनाने की क्षमता दिखा पाती है। NHAI मामले का हल और भविष्य के ऑपरेशनल नतीजे कंपनी की राह तय करेंगे।