Dhruv Consultancy Services ने अपने नतीजे जारी किए हैं, जो चिंताजनक हैं। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की पहली नौ महीनों (9MFY26) में ₹36.52 करोड़ का टोटल ऑपरेटिंग इनकम (Total Operating Income) दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹75.49 करोड़ से 51.62% कम है। इस गिरावट के साथ ही, कंपनी ने ₹23.49 करोड़ का ऑपरेटिंग लॉस (Operating Loss) और ₹28.37 करोड़ का नेट लॉस (Net Loss) झेला है।
इन खराब वित्तीय प्रदर्शन के चलते, प्रमुख रेटिंग एजेंसी CARE Edge ने Dhruv Consultancy Services की बैंक फैसिलिटीज़ की रेटिंग को डाउनग्रेड कर दिया है। कंपनी की टेंजिबल नेट वर्थ (Tangible Net Worth) में भी बड़ी कमी आई है, जो 31 दिसंबर 2025 तक घटकर ₹71.86 करोड़ रह गई, जबकि 31 मार्च 2025 को यह ₹103.38 करोड़ थी। साथ ही, कंपनी के पास अनएनकम्ब्रड कैश (Unencumbered Cash) और बैंक बैलेंस सिर्फ ₹0.62 करोड़ है।
रेटिंग डाउनग्रेड की मुख्य वजह कंपनी के वित्तीय मेट्रिक्स पर अकाउंटिंग एडजस्टमेंट्स (Accounting Adjustments) का गंभीर असर बताया गया है। कंपनी की आय (Revenue) में आई यह भारी गिरावट मुख्य रूप से रेवेन्यू रिकग्निशन मेथोडोलॉजी (Revenue Recognition Methodology) में हुए बदलाव (Ind AS 115 के तहत) के कारण हुई है, जिसे ऑडिटर ने भी चिन्हित किया था। इस बदलाव ने Q3 FY26 के नतीजों को सीधे तौर पर प्रभावित किया।
इसके अलावा, कंपनी हाल ही में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से मिले 2 साल के डिबारमेंट (Debarment) नोटिस के प्रभाव से भी जूझ रही थी। हालांकि, मद्रास हाई कोर्ट से जुलाई 2025 में मिली अंतरिम स्टे (Interim Stay) ने इस पर कुछ राहत दी थी। NHAI, कंपनी के रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा (FY25 में लगभग 45%) था, इसलिए यह मामला कंपनी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।
क्रेडिट रेटिंग में आई इस गिरावट का मतलब है कि कंपनी की उधार लेने की क्षमता (Creditworthiness) कमजोर हुई है। इससे भविष्य में लोन प्राप्त करने में मुश्किल आ सकती है या लोन की शर्तें सख्त हो सकती हैं। लेंडर्स (Lenders) अब कंपनी पर अधिक बारीकी से नजर रखेंगे, और नए लोन कोवेन्ट्स (Loan Covenants) या उच्च ब्याज दरें सामने आ सकती हैं।
कंपनी की ऑर्डर बुक (Order Book) 30 सितंबर 2025 तक ₹239.55 करोड़ की है, जो पिछले साल की तुलना में कम है (30 दिसंबर 2024 को ₹303.52 करोड़)। यह ऑर्डर बुक भविष्य के रेवेन्यू के लिए कुछ विजिबिलिटी तो देती है, लेकिन कंपनी की वर्तमान वित्तीय स्थिति के मद्देनजर इसे मजबूत करना एक चुनौती होगी।
Dhruv Consultancy इंफ्रास्ट्रक्चर कंसल्टेंसी क्षेत्र में काम करती है, जहां RITES Ltd. और NBCC (India) Ltd. जैसे बड़े सरकारी प्लेयर्स भी मौजूद हैं। इन स्थिर प्रोफाइल वाले साथियों की तुलना में Dhruv Consultancy की वर्तमान वित्तीय स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। कंपनी के लिए सबसे बड़े जोखिमों में लगातार बिगड़ती वित्तीय स्थिति, लिक्विडिटी (Liquidity) पर दबाव, क्लाइंट्स पर अत्यधिक निर्भरता (सरकारी संस्थाओं से 95% रेवेन्यू) और NHAI डिबारमेंट मामले का अंतिम समाधान शामिल है।
निवेशकों को अब कंपनी की वित्तीय रिकवरी, वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट में सुधार, नए प्रोजेक्ट्स को सुरक्षित करने की क्षमता और NHAI डिबारमेंट केस के resolved होने पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। साथ ही, कंपनी की रेवेन्यू रिकग्निशन और वित्तीय रिपोर्टिंग में स्थिरता भी महत्वपूर्ण होगी।