बजट का सीधा असर: डिफेंस और रेलवे सेक्टर में तेज़ी की आहट
यूनियन बजट 2025-26 में डिफेंस और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बढ़ाया गया बजट आवंटन, चुनिंदा कंपनियों के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर रहा है। ये बड़े आवंटन 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसी पहलों को ज़ोर दे रहे हैं।
डिफेंस सेक्टर: 'आत्मनिर्भर' बनने की ओर मज़बूत कदम
भारतीय डिफेंस सेक्टर लगातार ग्रोथ की राह पर है। बजट 2025-26 में इस सेक्टर के लिए ₹6.21 लाख करोड़ का भारी-भरकम आवंटन किया गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 13.07% ज़्यादा है। इसमें से ₹1.63 लाख करोड़ कैपिटल एक्सपेंडिचर (पूंजीगत व्यय) के लिए रखे गए हैं। यह देश में ही रक्षा उपकरण बनाने की 'आत्मनिर्भर भारत' पहल को मज़बूती देगा। इसका सीधा फायदा स्पेशलाइज्ड इक्विपमेंट, कंस्ट्रक्शन मटेरियल और हाई-मोबिलिटी व्हीकल बनाने वाली कंपनियों को होगा।
Hindustan Aeronautics Limited (HAL) जैसी कंपनियां, जिनका मार्केट कैप करीब ₹1.5 लाख करोड़ है और P/E 58.00 है, इस 'मेक इन इंडिया' ड्राइव से सीधे तौर पर लाभान्वित होंगी। इसी तरह, मिसाइल और डिफेंस सिस्टम बनाने वाली Bharat Dynamics Limited (BDL), जिसका मार्केट कैप लगभग ₹30,000 करोड़ और P/E 48.00 है, भी इस फोकस का अहम हिस्सा है। डिफेंस इंडस्ट्री की ग्रोथ लगातार मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम्स और डोमेस्टिक प्रोडक्शन की ओर रणनीतिक बदलाव से कायम है। यह ट्रेंड भू-राजनीतिक (geopolitical) हालातों से और मज़बूत हुआ है। निजी कंपनियों में Solar Industries India Limited (मार्केट कैप ₹50,000 करोड़, P/E 68.30) माइनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर से डिमांड का लाभ उठा रही है, जो उनके डिफेंस ऑफरिंग्स को पूरक बनाता है। ऐतिहासिक रूप से, डिफेंस सेक्टर के बजट में अनुकूल घोषणाओं का असर हमेशा सकारात्मक रहा है, जिससे स्थापित कंपनियों के शेयर भाव में बढ़ोतरी देखी गई है।
रेलवे सेक्टर: वॉल्यूम ग्रोथ पर ज़ोर, पर कुछ सेगमेंट्स में ही%
दूसरी ओर, रेलवे सेक्टर को 2025-26 के लिए ₹2.55 लाख करोड़ का कैपिटल आउटले मिला है। हालांकि, बाजार के जानकारों के अनुसार, इस सेक्टर की तस्वीर थोड़ी मिली-जुली है। Elara Securities के वाइस प्रेसिडेंट, हर्षित कापड़िया का कहना है कि वॉल्यूम ग्रोथ (मात्रा वृद्धि) कुछ खास सेगमेंट में ही सिमटी हुई है, जैसे कि कोचेस और लोकोमोटिव्स। कोचेस की खरीद में करीब 10% और लोकोमोटिव्स में लगभग 7% की बढ़ोतरी का अनुमान है। इससे रोलिंग स्टॉक और लोकोमोटिव सिस्टम से जुड़ी कंपनियां फायदे में रहेंगी।
इस स्पेस में एक प्रमुख खिलाड़ी BEML Limited, जिसका मार्केट कैप ₹40,500 करोड़ और P/E 55.20 है, इन खास ऑर्डर्स का लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है। Siemens India, जिसका मार्केट कैप करीब ₹70,000 करोड़ है, भी लोकोमोटिव सिस्टम्स में अपनी भूमिका के कारण एक पसंदीदा नाम है। इसके विपरीत, नई लाइनों के निर्माण और ट्रैक डबलिंग जैसे कंस्ट्रक्शन-हैवी सेगमेंट्स में वैल्यू तो बढ़ी है, लेकिन यह ज़्यादा इनपुट कॉस्ट (लागत) के कारण है, न कि वास्तविक एग्जीक्यूशन (कार्यान्वयन) बढ़ने के कारण।
रेलवे सेक्टर में, सरकार हाई-स्पीड रेल और नेटवर्क मॉडर्नाइजेशन पर ध्यान दे रही है, जिसमें इलेक्ट्रिफिकेशन पर भी ज़ोर है। इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट और कंपोनेंट्स में विशेषज्ञता रखने वाली कंपनियों जैसे CG Power and Industrial Solutions Limited (मार्केट कैप: ₹35,000 Cr, P/E: 58.50), ABB India Limited (मार्केट कैप: ₹70,000 Cr, P/E: 82.00), और HPL Electric & Power Limited (मार्केट कैप: ₹12,000 Cr, P/E: 95.50) को बढ़ते इलेक्ट्रिफिकेशन और केबलिंग ऑर्डर्स से फायदा होने की उम्मीद है। ये कंपनियां व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का अहम हिस्सा हैं। वहीं, रेलवे सेक्टर के बजट पर बाजार की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रही हैं, और जो कंपनियां रोलिंग स्टॉक और इलेक्ट्रिकल सिस्टम जैसे वॉल्यूम ड्राइवर्स से जुड़ी हैं, वे अक्सर ट्रैक एक्सपेंशन जैसे धीमे कैपिटल एक्सपेंडिचर प्रोजेक्ट्स से जुड़ी कंपनियों से बेहतर प्रदर्शन करती हैं। हालिया कॉर्पोरेट डेवलपमेंट में BEML को माइनिंग इक्विपमेंट और मेट्रो कोचेस के कॉन्ट्रैक्ट मिले हैं, और Siemens India को लोकोमोटिव्स के लिए ट्रैक्शन सिस्टम ऑर्डर्स मिले हैं।
विशेषज्ञों की राय और आगे की राह
Harshit Kapadia डिफेंस सेगमेंट में 'अन्य इक्विपमेंट', 'कंस्ट्रक्शन-संबंधित काम', और 'हाई-मोबिलिटी व्हीकल्स' में ग्रोथ की संभावना देखते हैं। रेलवे में उनका फोकस कोचेस, लोकोमोटिव्स, और इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट से जुड़ी कंपनियों पर बना हुआ है। हालांकि, ABB India (P/E 82.00) और HPL Electric & Power (P/E 95.50) जैसे स्टॉक्स के ऊंचे P/E रेश्यो बाजार के ऑप्टिमिज्म को दर्शाते हैं, लेकिन यह भविष्य की ग्रोथ उम्मीदों का प्रीमियम भी बताते हैं। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे इन ग्रोथ एरियाज में ऑर्डर बुक डेवलपमेंट और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन पर बारीकी से नज़र रखें।