ऑपरेशनल बढ़त के बावजूद प्रॉफिट में गिरावट?
चौथी तिमाही में Dalmia Bharat के नतीजे मिले-जुले रहे। कंपनी का ₹4,245 करोड़ का रेवेन्यू 3.8% बढ़ा और ₹902 करोड़ का ईबीआईटीडीए (EBITDA) 13.7% उछला। इसके पीछे 21.2% के बेहतर मार्जिन का हाथ रहा। लेकिन, नेट प्रॉफिट 11% घटकर ₹435 करोड़ से ₹387 करोड़ पर आ गया। ऐसा लगता है कि ब्याज, डेप्रिसिएशन या टैक्स जैसे खर्चों में बढ़ोतरी ने ऑपरेशनल बढ़त का फायदा कम कर दिया। इन नतीजों के तुरंत बाद Dalmia Bharat के शेयर 4% तक लुढ़क गए।
इंडस्ट्री के दूसरे खिलाड़ी
भारतीय सीमेंट सेक्टर में अन्य कंपनियों के नतीजे अलग-अलग रहे। UltraTech Cement ने दमदार 20.2% का नेट प्रॉफिट बढ़ाकर ₹2,983 करोड़ दर्ज किया, वहीं India Cements ने भी बड़ा टर्नअराउंड दिखाते हुए ₹59.5 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया।
वैल्यूएशन और एनालिस्ट्स की राय
Dalmia Bharat के शेयर फिलहाल 30.65x के P/E रेश्यो पर ट्रेड कर रहे हैं, जो सेक्टर के औसत के बराबर है। कंपनी पर लगभग कोई कर्ज नहीं है और इसका मार्केट कैप करीब ₹36,000-₹37,000 करोड़ है। एनालिस्ट्स का नजरिया अभी भी पॉजिटिव है, उनका 'Buy' रेटिंग और औसत टारगेट प्राइस ₹2,307.61 है, जो अच्छी खासी अपसाइड का संकेत देता है। अगले क्वार्टर के लिए कंपनी की ईपीएस (EPS) ₹16.51 रहने का अनुमान है। पिछले पांच सालों में Dalmia Bharat की सेल्स ग्रोथ मामूली 7.64% रही है।
चुनौतियाँ और कानूनी मामले
हालांकि, नेट प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बना हुआ है। पिछले तीन सालों में कंपनी का ROE (Return on Equity) 5.27% रहा है, जो इंडस्ट्री एवरेज से कम है। Dalmia Bharat 75 MTPA तक पहुंचने का लक्ष्य लेकर चल रही है, जिसके लिए बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर की जरूरत होगी। सेक्टर में कड़े कॉम्पिटिशन, खासकर UltraTech Cement जैसे बड़े प्लेयर्स से, मार्केट शेयर और प्राइसिंग पर असर डाल सकती है। इसके अलावा, कंपनी की एक सब्सिडियरी, Dalmia Cement (Bharat) Limited, मनी लॉन्ड्रिंग केस (PMLA Tribunal) से जुड़े एक ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ अपील कर रही है। ED (Enforcement Directorate) ने ₹92.52 करोड़ की बैंक गारंटी के बदले ही जमीन के हिस्से जारी किए, जो कानूनी पेचीदगियों को दर्शाता है।
डिविडेंड का ऐलान
इन सब के बीच, कंपनी के बोर्ड ने शेयरहोल्डर रिटर्न के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए ₹5 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड (Dividend) की सिफारिश की है। यह शेयरहोल्डर-फ्रेंडली कदम, प्रॉफिट के आंकड़ों पर बाजार की तत्काल नकारात्मक प्रतिक्रिया के विपरीत है।
