जापानी दिग्गज Daikin Industries ने भारत में अपने मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च ऑपरेशंस को बढ़ाने के लिए **₹2,800 करोड़** के बड़े निवेश का ऐलान किया है। कंपनी अब डेटा सेंटर्स के लिए हाई-कैपेसिटी कूलिंग और सरकार की PLI स्कीम के तहत लोकलाइजेशन पर फोकस कर रही है।
रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
Daikin ने अपने इस ₹2,800 करोड़ के निवेश का रोडमैप 2028 तक के लिए तैयार किया है। इसमें से ₹1,300 करोड़ की भारी-भरकम राशि विशेष रूप से रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) के लिए रखी गई है। कंपनी का मुख्य लक्ष्य डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए हाई-कैपेसिटी कूलिंग सिस्टम बनाना है। हालांकि, भारतीय निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि Daikin की भारतीय इकाई सीधे तौर पर शेयर बाजार (NSE/BSE) पर लिस्टेड नहीं है।
सरकार की PLI स्कीम का फायदा
यह निवेश भारत सरकार की 'प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव' (PLI) स्कीम के अनुरूप है। Daikin का इरादा अब सिर्फ असेंबली तक सीमित न रहकर भारत को एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करना है, ताकि कंप्रेसर जैसे जरूरी कंपोनेंट्स को यहीं तैयार किया जा सके और आयात पर निर्भरता कम हो।
सेक्टर पर क्या होगा असर?
इस कदम से भारत की दिग्गज घरेलू कंपनियां जैसे Voltas, Blue Star और Havells के लिए प्रतिस्पर्धा और तेज हो जाएगी। Daikin की हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग आने वाले समय में बाजार में प्राइसिंग स्ट्रैटेजी और प्रोडक्ट इनोवेशन को नई दिशा दे सकती है।
हालांकि, बढ़ती कॉम्पिटिशन और कच्चे माल (Raw Material) की कीमतों में उतार-चढ़ाव इस सेक्टर के लिए चुनौती बने हुए हैं, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर होगी कि कंपनी अपनी R&D क्षमता का कितनी जल्दी इस्तेमाल शुरू करती है और घरेलू खिलाडियों की मार्केट शेयर पर इसका कितना असर पड़ता है।
