DPIL के ऑर्डर बुक में ₹100 करोड़ से ज्यादा का इजाफा
Diamond Power Infrastructure Ltd (DPIL) अपने ऑर्डर बुक को लगातार मजबूत कर रही है। कंपनी ने हाल ही में गुजरात एनर्जी ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (GETCO) से 270 किलोमीटर 66 kV EHV पावर केबल्स की सप्लाई का ₹60.53 करोड़ का बड़ा ऑर्डर हासिल किया है। इसके साथ ही, उत्तर गुजरात विज कंपनी लिमिटेड (UGVCL) से 453 किलोमीटर केबल्स के लिए ₹43.94 करोड़ (GST सहित) का लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) भी प्राप्त हुआ है। इन नए ऑर्डर्स के दम पर DPIL का कुल ऑर्डर बुक 30 मार्च 2026 तक ₹3,500 करोड़ से ऊपर निकल गया है।
वैल्यूएशन की चिंता में फिसले शेयर
हालांकि, इन सकारात्मक खबरों का असर शेयर बाजार में कंपनी के शेयर पर नहीं दिखा। सोमवार को DPIL के शेयर NSE पर 3.36% की बड़ी गिरावट के साथ ₹118.82 के स्तर पर बंद हुए। निवेशकों के बीच कंपनी के महंगे वैल्यूएशन (Valuation) को लेकर गहरी चिंता बनी हुई है। DPIL का मौजूदा P/E रेश्यो 61.50 से 68.82 के बीच है, जो कि इसके प्रमुख प्रतिस्पर्धियों जैसे Polycab India (लगभग 40x P/E), KEC International (लगभग 30x P/E), और Sterlite Power (लगभग 28x P/E) की तुलना में काफी अधिक है।
निगेटिव बुक वैल्यू और कंप्लायंस का मसला
महंगे वैल्यूएशन के अलावा, DPIL की प्रति शेयर निगेटिव बुक वैल्यू (Negative Book Value Per Share) ₹-8.28 से ₹-14.8 के बीच बताई जा रही है। यह स्थिति अक्सर कंपनी की वित्तीय सेहत पर दबाव या जमा हुए नुकसान का संकेत देती है। इसके अतिरिक्त, कंपनी को NSE से हाल ही में FY25 के लिए अपने एनुअल सेक्रेटेरियल कंप्लायंस रिपोर्ट पर एक 'Cautionary Note' भी मिला था। कंपनी का दावा है कि इससे कोई वित्तीय प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन ऐसे नोटिस आंतरिक नियंत्रण संबंधी समस्याओं की ओर इशारा कर सकते हैं।
इंडस्ट्री में कॉम्पिटिशन और चुनौतियां
DPIL भारत के पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में सक्रिय है, जो भविष्य में मजबूत ग्रोथ की संभावना दिखा रहा है। सरकारी पहलों से इस क्षेत्र को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। DPIL EHV केबल्स में विशेषज्ञता रखती है, लेकिन यह सेक्टर Polycab India, KEC International और Sterlite Power जैसी बड़ी और स्थापित कंपनियों के कारण अत्यधिक प्रतिस्पर्धी है, जिनके पास DPIL से कहीं बड़े मार्केट कैप और वित्तीय संसाधन हैं।
निवेशकों की मुख्य चिंताएं
कुल मिलाकर, बाजार DPIL की क्षमता पर संदेह कर रहा है कि वह अपने बड़े ऑर्डर बुक को लाभदायक राजस्व में कैसे बदलेगा। कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन 4.12% पर है और महंगा वैल्यूएशन आगे किसी भी गलती की गुंजाइश बहुत कम छोड़ता है। निवेशकों की नज़र अब DPIL के एग्जीक्यूशन (Execution) की क्षमता, ऑपरेटिंग मार्जिन में सुधार के प्रयासों और कंपनी की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने पर टिकी रहेगी।