DPIIT और Asian Development Bank (ADB) ने हाथ मिलाया है। अब भारत के वेयरहाउस और कोल्ड चेन के लिए नेशनल ग्रेडिंग मानक तय किए जाएंगे, जिससे कंपनियों को सस्ता कर्ज मिलेगा और विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
बड़े बदलाव की तैयारी
सरकार का यह कदम भारतीय लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री को एक नई दिशा देने वाला है। DPIIT और ADB के इस प्रोजेक्ट का मुख्य मकसद वेयरहाउस और कोल्ड चेन सुविधाओं के लिए एक 'नेशनल बेंचमार्क' तैयार करना है। इससे न केवल कामकाज में पारदर्शिता आएगी, बल्कि वेयरहाउस ऑपरेटरों को बैंकों से आसानी से और सस्ता कर्ज (Credit) मिलना भी संभव हो पाएगा। इसके अलावा, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से खाने-पीने की चीजों की बर्बादी को रोकने में मदद मिलेगी।
सेक्टर में कंसोलिडेशन के संकेत
भारतीय लॉजिस्टिक्स मार्केट अभी तक काफी हद तक असंगठित (Unorganized) है। नए मानकों के आने से संगठित कंपनियों को बड़ा फायदा होगा। जो कंपनियां इन रेटिंग्स के दायरे में आएंगी, उनके लिए फंडिंग जुटाना आसान हो जाएगा, जबकि छोटे खिलाड़ियों के लिए कंप्लायंस का खर्च बढ़ सकता है। इससे भविष्य में इंडस्ट्री में बड़ा कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है। जो कंपनियां Multi-Modal Logistics Parks (MMLPs) और आधुनिक कोल्ड चेन चला रही हैं, उनके लिए यह गेम चेंजर साबित हो सकता है।
क्या है जोखिम?
सरकारी प्लान के तहत, इन सुविधाओं को शहरी प्लानिंग और म्युनिसिपल लेआउट के साथ जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, राज्यों की तरफ से इसे कितनी तेजी से लागू किया जाता है, यह देखना होगा। ब्युरोक्रेटिक देरी और जमीन संबंधी पेचीदगियां इस प्रोजेक्ट के लिए 'Execution Risk' पैदा कर सकती हैं। निवेशकों की नजर अब इन रेटिंग गाइडलाइन्स के आधिकारिक रोलआउट पर टिकी है, जो सेक्टर की भविष्य की चाल तय करेंगे।
