यह अहम फैसला केंद्र सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' योजना के तहत लिया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता को कम करना है। DMRC के आने वाले प्रोजेक्ट्स के लिए, खास तौर पर अंडरग्राउंड स्टेशन्स पर फुल-हाइट (Full-Height) और एलिवेटेड कॉरिडोर पर हाफ-हाइट (Half-Height) PSDs की तैनाती की जाएगी।
प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर्स (PSDs) का ग्लोबल मार्केट फिलहाल काफी बड़ा है और 2033 तक इसके $3.2 बिलियन का आंकड़ा पार करने का अनुमान है, जिसमें सालाना करीब 10.5% की ग्रोथ देखी जा रही है। इस मार्केट में एशिया-पैसिफिक सबसे आगे है। Nabtesco और Panasonic जैसी बड़ी विदेशी कंपनियां इसमें प्रमुख सप्लायर हैं। वहीं, भारत भी अपनी डोमेस्टिक कैपेबिलिटीज को बढ़ा रहा है। TRAC Engineering और Toshi Automation जैसी भारतीय कंपनियां अब स्वदेशी PSD सिस्टम पेश कर रही हैं। ये कंपनियां 100% तक लोकल कॉम्पोनेंट्स और इंडिजिनस सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल का दावा करती हैं, जिसका मकसद DMRC की पुरानी सप्लायर संबंधी दिक्कतों को दूर करना और विदेशी कंपनियों पर निर्भरता घटाना है।
दिल्ली मेट्रो के Phase IV और V के बड़े विस्तार प्लान्स के चलते PSDs की भारी डिमांड क्रिएट होगी। यह भारतीय मैन्युफैक्चरर्स के लिए प्रोडक्शन को स्केल-अप करने और मार्केट में मजबूत पकड़ बनाने का बड़ा अवसर है। हालाँकि, इस बदलाव के अपने जोखिम भी हैं। 'मेक इन इंडिया' पहल को इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और स्किल्ड लेबर की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। यह भी संभव है कि नए भारतीय मैन्युफैक्चरर्स अभी टेक्नोलॉजी और लॉन्ग-टर्म रिलायबिलिटी के मामले में स्थापित विदेशी सप्लायर्स के स्तर तक न पहुँच पाएं। इससे प्रोजेक्ट में देरी, शुरुआती लागत में वृद्धि और क्वालिटी कंट्रोल से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। DMRC के पुराने प्रोक्योरमेंट रिकॉर्ड्स को देखते हुए, नए डोमेस्टिक पार्टनर्स के साथ यात्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी जांच-पड़ताल की आवश्यकता होगी।
जैसे-जैसे दिल्ली मेट्रो का विस्तार जारी रहेगा, PSDs की मांग बढ़ती जाएगी। इस नीतिगत बदलाव ने भारतीय इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग फर्मों के लिए अपनी PSD उत्पादन क्षमताओं में निवेश करने का एक स्पष्ट संकेत दिया है। इस स्वदेशीकरण की सफलता दूसरे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए भी एक नजीर बन सकती है, जो भारत को एडवांस ट्रांजिट टेक्नोलॉजी का हब बनाने और एक मजबूत घरेलू उद्योग विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
