नतीजों का लेखा-जोखा
DEE Development Engineers Limited ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही (Q3 FY26) और नौ महीनों के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंसॉलिडेटेड (Consolidated) आधार पर, कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 76.6% बढ़कर ₹28,606.77 Lacs हो गया, जो पिछले साल ₹16,200.27 Lacs था। इस शानदार टॉप-लाइन ग्रोथ का असर बॉटम-लाइन पर भी दिखा, जहाँ प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) पिछले साल के ₹1,332.68 Lacs के भारी नुकसान से सुधरकर ₹1,855.42 Lacs के प्रॉफिट में बदल गया।
फाइनेंशियल ईयर 26 के पहले नौ महीनों में, कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू 44.3% बढ़कर ₹78,042.59 Lacs रहा, और PAT में 307.7% की प्रभावशाली बढ़ोतरी के साथ यह ₹4,949.21 Lacs पर पहुँच गया।
कंपनी के स्टैंडअलोन (Standalone) नतीजों में भी यही मजबूती दिखी। Q3 FY26 में स्टैंडअलोन रेवेन्यू 116.8% उछलकर ₹22,610.91 Lacs रहा, और PAT पिछले साल के ₹1,353.28 Lacs के नुकसान से सुधरकर ₹1,550.79 Lacs का प्रॉफिट दर्ज किया गया। नौ महीनों में स्टैंडअलोन रेवेन्यू 53.9% बढ़कर ₹61,148.12 Lacs रहा, और PAT ₹3,593.91 Lacs पर आ गया।
ऑडिटर की चिंताएं और जोखिम
हालांकि, इन शानदार नतीजों के साथ ही कंपनी के इंडिपेंडेंट ऑडिटर (Independent Auditors) ने कुछ महत्वपूर्ण चिंताओं पर भी प्रकाश डाला है, जो निवेशकों के लिए जानना ज़रूरी है।
सबसे बड़ा मुद्दा सब्सिडियरी Malwa Power Private Limited की एसेट्स (Assets) के इम्पेयरमेंट (Impairment) को लेकर है। ऑडिटर इस पर कमेंट करने में असमर्थ रहे। Malwa Power की एसेट्स की कैरिंग वैल्यू ₹4,034.52 Lacs है। यह अनिश्चितता सब्सिडियरी के पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) की समाप्ति और पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) से मिले प्रोविजनल टैरिफ ऑफर के बाद पैदा हुई है।
एक और गंभीर जोखिम PSPCL के साथ चल रहा टैरिफ डिस्प्यूट (Tariff Dispute) है, जो एक सिविल रिट पिटीशन (Civil Writ Petition) के रूप में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में लंबित है। PSPCL ने 1 जनवरी, 2024 से रेट्रोएक्टिव (Retroactive) प्रभाव से टैरिफ में कटौती का आदेश दिया था। कंपनी को इस मामले में जीत की उम्मीद है, लेकिन इस कंटिंजेंट लायबिलिटी (Contingent Liability) के लिए कोई फाइनेंशियल एडजस्टमेंट न करना एक महत्वपूर्ण पॉइंट है। हाई कोर्ट द्वारा SERC के ऑर्डर पर लगाई गई स्टे (Stay) ने फिलहाल राहत दी है, लेकिन मुख्य विवाद अभी सुलझा नहीं है।
लेबर कोड्स (Labour Codes) के नए नियमों के कारण ₹421.85 Lacs (कंसॉलिडेटेड) और ₹346.64 Lacs (स्टैंडअलोन) का एक एक्सेप्शनल आइटम (Exceptional Item) भी दर्ज किया गया है, जिसे ग्रेच्युटी लायबिलिटी (Gratuity Liability) से जुड़ा पास्ट सर्विस कॉस्ट माना गया है।
एक पॉजिटिव कदम के तौर पर, कंपनी ने 19 मई, 2025 को Molsieve Designs Limited (MDL) में 70% हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया है, जिसे सब्सिडियरी के तौर पर इंटीग्रेट किया गया है।
कंपनी ने भविष्य के प्रदर्शन के बारे में कोई फॉरवर्ड-लुकिंग गाइडेंस (Forward-looking guidance) जारी नहीं की है। मुख्य जोखिम Malwa Power की एसेट वैल्यूएशन और PSPCL के साथ टैरिफ डिस्प्यूट से जुड़े हुए हैं। अगर ये मामले अनफेवरेबली (Unfavourably) बढ़ते हैं, तो यह कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ और एसेट बेस पर बड़ा असर डाल सकते हैं। कंपनी को इन कंटिंजेंट लायबिलिटीज को मैनेज करने और नई सब्सिडियरी Molsieve Designs को सफलतापूर्वक इंटीग्रेट करने की ज़रूरत होगी ताकि मौजूदा ग्रोथ मोमेंटम (Momentum) बनाए रखा जा सके।