चीन के एक्सपोर्ट बैन को मात, भारत में बनेगा लिथियम सेल!
चीन की Desay Battery Technology की सब्सिडियरी Cosmx, भारत में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक कदम उठा रही है। कंपनी खुद का प्लांट लगाने की बजाय, चेन्नई बेस्ड Munoth Industries के साथ एक जॉइंट वेंचर (JV) करने पर सहमत हुई है। इस डील का मकसद लिथियम-आयन सेल की सप्लाई सुनिश्चित करना, भारत के बढ़ते बाजार में Cosmx की स्थिति मजबूत करना और चीन के अहम बैटरी टेक्नोलॉजी पर लगे नए एक्सपोर्ट कंट्रोल को भेदना है। यह पार्टनरशिप Cosmx को भारत में चीनी स्मार्टफोन मेकर्स को सप्लाई करने में मदद करेगी और Munoth Industries की सेल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का लाभ उठाएगी, जिसे भारत की ECMS स्कीम के तहत मंजूरी मिली हुई है।
रेगुलेटरी अड़चनें और अप्रूवल का सफर
इस जॉइंट वेंचर के लिए मंजूरी भारत के फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) नियमों, खासकर 'प्रेस नोट 3' पर निर्भर करेगी। इस नोट के तहत चीन जैसे पड़ोसी देशों से होने वाले निवेश के लिए सरकारी मंजूरी लेना अनिवार्य है। अप्रूवल के लिए एप्लीकेशन मार्च 2026 के आखिर में या अप्रैल 2026 की शुरुआत में दी जाएगी, और फैसला दो महीने में आने की उम्मीद है। हालांकि मार्च 2026 में कुछ नियमों में ढील दी गई है, लेकिन इस JV को सरकारी जांच का सामना करना पड़ सकता है। Munoth Industries के पास पहले से ही अपने लिथियम-आयन सेल प्लान के लिए ECMS अप्रूवल है। Cosmx सेल मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में 26% हिस्सेदारी रखने की योजना बना रही है। Cosmx से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर सहित, प्रोडक्शन सितंबर तिमाही 2026 तक शुरू होने की संभावना है। हाल ही में 24 मार्च, 2026 को Cosmx की पैरेंट कंपनी Desay Battery Technology का स्टॉक प्राइस 6.88% चढ़ा था।
मार्केट का समीकरण और कॉम्पिटिशन
यह डील ऐसे समय में हो रही है जब ग्लोबल सप्लाई चेन टाइट हो रही है, खासकर एडवांस्ड लिथियम बैटरी टेक और मटेरियल पर चीन के एक्सपोर्ट कंट्रोल के बाद, जो 8 नवंबर, 2025 से लागू हो चुके हैं। इन नियमों का मकसद चीन की टेक लीड को बचाना है और बैटरी निर्माताओं को विदेशों में प्रोडक्शन स्थापित करने के लिए मजबूर कर सकता है। भारत लिथियम-आयन सेल के लिए काफी हद तक इम्पोर्ट पर निर्भर है, इसलिए यह JV भारत के लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लक्ष्य का समर्थन करता है, जैसे कि PLI और ECMS स्कीम्स के जरिए। Cosmx का स्थानीय स्तर पर सेल सोर्स करने का प्लान, कॉम्पिटिटर्स से अलग है: Amperex Technology Limited (ATL) हरियाणा में प्लांट लगा रही है, और Sunwoda Electronic की नोएडा में सब्सिडियरी है। एनालिस्ट्स का कहना है कि भले ही ATL सेल प्रोडक्शन में आगे है और Sunwoda पैक असेंबली रेवेन्यू में, Cosmx लोकल सोर्सिंग के जरिए अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है। 27 मार्च, 2026 को Desay Battery Technology (SZSE:000049) का मार्केट कैप करीब $10.55 बिलियन था, और इसका P/E रेशियो लगभग 25.82 था।
आगे के रिस्क और चुनौतियां
हालांकि, इस JV को कई जोखिमों का सामना करना पड़ेगा। सबसे बड़ा है भारत के 'प्रेस नोट 3' के तहत लंबा रेगुलेटरी अप्रूवल प्रोसेस, जिससे देरी हो सकती है या सख्त शर्तें लग सकती हैं, खासकर चीन के एक्सपोर्ट कंट्रोल के कारण होने वाले टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को लेकर। Cosmx का यह तरीका शायद अपने खुद के प्लांट की पिछली अस्वीकृतियों पर काबू पाने की कोशिश हो सकती है, जो पूरी तरह से अपने संचालन स्थापित करने में संभावित समस्याओं का संकेत देता है। Desay Battery को अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर भी जांच का सामना करना पड़ रहा है। एनालिस्ट्स कम P/E रेशियो का हवाला देते हैं, जो कमजोर ग्रोथ की उम्मीदों, मामूली नेट सेल्स ग्रोथ और ऑपरेटिंग प्रॉफिट में पांच साल की गिरावट को दर्शाता है। ATL और Sunwoda से कड़ी प्रतिस्पर्धा, जो भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं, एक और चुनौती पेश करती है। JV की सफलता Cosmx के पैक असेंबली कौशल को Munoth के सेल मैन्युफैक्चरिंग के साथ मिलाने, और भारत के बदलते नियमों व चीन की एक्सपोर्ट पॉलिसी को मैनेज करने पर निर्भर करेगी।
प्रोडक्शन टारगेट और स्ट्रैटेजी
प्रोडक्शन सितंबर तिमाही 2026 तक शुरू करने की योजना है। इस कदम का मकसद भारत में जरूरी बैटरी कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को लोकल लेवल पर लाना है। यह पार्टनरशिप भारत के बढ़ते बाजार की सेवा करने और ग्लोबल जियोपॉलिटिकल बदलावों और एक्सपोर्ट लिमिट के खिलाफ Cosmx की सप्लाई चेन को मजबूत करने का प्रयास है। Cosmx ने 2016 से भारत में 100 मिलियन RMB (लगभग ₹110 करोड़) से अधिक का निवेश किया है, जो इस क्षेत्र के प्रति उसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।