Corrugated Box Industry: रॉ मटेरियल की कीमतों में 25% का उछाल, FMCG सेक्टर के लिए बढ़ी मुश्किलें

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AuthorMehul Desai|Published at:
Corrugated Box Industry: रॉ मटेरियल की कीमतों में 25% का उछाल, FMCG सेक्टर के लिए बढ़ी मुश्किलें

Kraft paper की कीमतें पिछले तीन महीनों में **25%** तक बढ़ गई हैं, जिससे भारतीय कोरुगेटेड बॉक्स इंडस्ट्री भारी संकट में है। इनपुट कॉस्ट और GST के बोझ ने कंपनियों को प्राइस हाइक की मांग करने पर मजबूर कर दिया है, जिसका असर FMCG और ई-कॉमर्स की सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।

भारत के मैन्युफैक्चरिंग और ई-कॉमर्स सेक्टर की रीढ़ कहे जाने वाले कोरुगेटेड बॉक्स उद्योग पर इस वक्त गहरा संकट मंडरा रहा है। अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, इन बॉक्स को बनाने में इस्तेमाल होने वाले मुख्य कच्चे माल यानी Kraft paper की कीमतें महज तीन महीने में 22% से 25% तक बढ़ गई हैं। छोटे और मध्यम स्तर के निर्माताओं के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि प्रति किलो लागत में ₹7 से ₹10 का इजाफा हुआ है।

महंगाई की मुख्य वजहें

इस महंगाई के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। पहला, रिसाइकिल वेस्ट पेपर (Recycled waste paper) की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा, घरेलू पेपर मिलें अब भारतीय बाजार के बजाय एक्सपोर्ट मार्केट पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं, जिससे घरेलू स्तर पर सप्लाई कम हो गई है और कीमतें आसमान छू रही हैं। साथ ही, एनर्जी, केमिकल और लॉजिस्टिक्स की लागत ने भी आग में घी डालने का काम किया है।

GST का इनवर्टेड स्ट्रक्चर और कैपिटल का संकट

कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के बीच निर्माता एक और बड़ी चुनौती से जूझ रहे हैं—इनवर्टेड GST स्ट्रक्चर। नियम के मुताबिक, उन्हें Kraft paper पर 18% GST देना पड़ता है, जबकि उनके तैयार प्रोडक्ट (बॉक्स) पर केवल 5% GST लगता है। इस अंतर के कारण निर्माताओं का वर्किंग कैपिटल टैक्स क्रेडिट के रूप में फंसा रहता है, जो उनके कैश फ्लो को पूरी तरह ब्लॉक कर रहा है।

निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?

यह संकट सिर्फ पैकेजिंग उद्योग तक सीमित नहीं है। FMCG, फार्मा और ई-कॉमर्स कंपनियां माल की सुरक्षा और डिलीवरी के लिए इन्हीं बॉक्स पर निर्भर हैं। यदि पैकेजिंग कंपनियां लागत का बोझ नहीं उठा पातीं या अपने ग्राहकों से कीमतें नहीं बढ़ा पातीं, तो सप्लाई चेन में गंभीर व्यवधान आ सकते हैं। वेस्टर्न इंडिया कोरुगेटेड बॉक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (WICMA) ने पहले ही इस पर चिंता जताई है और कुछ संघों ने बॉक्स की कीमतों में 20% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। निवेशकों को आने वाले दिनों में FMCG और ई-कॉमर्स कंपनियों की सप्लाई चेन और कॉस्ट मैनेजमेंट पर बारीक नजर रखने की जरूरत है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.