Control Print के मुख्य कोडिंग बिजनेस की कमाई पर उसकी इटैलियन पैकेजिंग यूनिट V Shapes का घाटा भारी पड़ रहा है। कंपनी के पास **23,000** से अधिक प्रिंटर का मजबूत बेस होने के बावजूद रेवेन्यू में केवल **4%** की सुस्त सालाना बढ़त देखी गई है।
कोर बिजनेस और मार्जिन पर दबाव
इंडस्ट्रियल कोडिंग और मार्किंग मार्केट की दिग्गज कंपनी Control Print फिलहाल अपने कोर बिजनेस की ग्रोथ और विदेशी ऑपरेशंस के दबाव के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। ग्लोबल प्लेयर्स जैसे Videojet, Domino Printech, और Markem-Imaje को टक्कर देने वाली इस कंपनी के पास 23,000 से ज्यादा प्रिंटर इंस्टॉल्ड हैं, जो हाई-मार्जिन कंज्यूमेबल्स के जरिए कमाई का जरिया बने हुए हैं। हालांकि, हालिया तिमाही में रेवेन्यू ग्रोथ मात्र 4% रही। कच्चे माल की बढ़ती लागत और डिमांड में बदलाव के कारण ग्रॉस मार्जिन सिकुड़ा है। मैनेजमेंट ने प्रॉफिटेबिलिटी सुधारने के लिए प्राइस एडजस्टमेंट शुरू कर दिए हैं, लेकिन निवेशकों को अब असली नतीजों का इंतजार है।
ट्रैक-एंड-ट्रेस का नया दांव
पारंपरिक कोडिंग बिजनेस से आगे बढ़ते हुए, कंपनी ने अपने ब्रांड QRiousCodes के जरिए प्रोडक्ट ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी में बड़ा निवेश किया है। फार्मा रेगुलेशंस में हो रहे बदलावों के चलते इस सेगमेंट में डिमांड बढ़ रही है। Control Print फिलहाल भारत की टॉप-5 फार्मा कंपनियों में से दो के साथ पायलट प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। जैसे-जैसे सरकारी नियम और सख्त होंगे, इस मार्केट के विस्तार की पूरी उम्मीद है।
V Shapes का टर्नअराउंड प्लान
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय V Shapes यूनिट है। मैनेजमेंट ने इस यूनिट को वित्तीय वर्ष 2028 की पहली छमाही तक 'ब्रेक-ईवन' (मुनाफे में) लाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए कंपनी भारत और इंटरनेशनल लेवल पर को-पैकेजिंग सर्विस शुरू कर रही है। साथ ही, असम में नया प्लांट लगाने और रिसाइकिल होने योग्य पैकेजिंग मटेरियल पर भी जोर दिया जा रहा है। अब नजरें इन बदलावों के क्रियान्वयन और फार्मा पायलट प्रोजेक्ट्स की कामयाबी पर टिकी हैं, जो भविष्य में कंपनी की सेहत तय करेंगे।
