Cochin Shipyard ने अपनी शिपबिल्डिंग क्षमता को 6 गुना बढ़ाने के लिए ₹6,500 करोड़ के भारी निवेश की योजना बनाई है। हालांकि, हालिया तिमाही में कंपनी का प्रॉफिट **19.4%** गिर गया है और मार्जिन पर भी दबाव देखा गया है।
क्षमता विस्तार की तैयारी
Cochin Shipyard ने इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाई देने के लिए लगभग ₹6,500 करोड़ के निवेश की योजना तैयार की है। इस प्लान का मुख्य केंद्र एक नई ब्लॉक फैब्रिकेशन फैसिलिटी का निर्माण है। इसके शुरू होने के बाद, कंपनी की ब्लॉक प्रोडक्शन क्षमता मौजूदा 20,000 MTPA से बढ़कर 120,000 MTPA हो जाएगी। इस 6 गुना उछाल से कंपनी अब Capesize बल्क कैरियर और Suezmax टैंकर जैसे बड़े जहाज बनाने में सक्षम होगी, जिससे ग्लोबल मार्केट में उनकी दावेदारी मजबूत होगी।
नतीजों में दिखी सुस्ती
लंबी अवधि के विजन के बावजूद, हालिया फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही के नतीजे निवेशकों की चिंता का कारण बने हैं। कंपनी का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 19.4% गिरकर ₹151.45 करोड़ पर आ गया है। रेवेन्यू में भी केवल 2.3% की मामूली बढ़ोतरी देखी गई और यह ₹1,094.21 करोड़ रहा। मार्जिन की बात करें तो EBITDA मार्जिन जो पिछले साल 22.7% था, वह घटकर 17.6% रह गया है।
मार्जिन पर दबाव की वजह
मुनाफे में गिरावट की बड़ी वजह शिप रिपेयर सेगमेंट से होने वाली कमाई का सामान्य होना है। INS Vikramaditya जैसे बड़े रिपेयर कॉन्ट्रैक्ट्स के पूरा होने के बाद रेवेन्यू मिक्स में बदलाव आया है। अब कंपनी का ज्यादा फोकस नए डिफेंस शिपबिल्डिंग प्रोजेक्ट्स पर है, जिनका मार्जिन प्रोफाइल रिपेयर काम से अलग है।
रेगुलेटरी और ऑपरेशनल चुनौतियां
निवेशक अब कंपनी के गवर्नेंस पर भी नजर गड़ाए हुए हैं। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के कंपोजिशन को लेकर BSE और NSE द्वारा लगाए गए जुर्माने ने कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर चर्चा छेड़ दी है। इसके अलावा, कंपनी का भविष्य भारतीय नौसेना (Indian Navy) के प्रोजेक्ट्स जैसे 'नेक्स्ट जनरेशन सर्वे वेसल्स' के सही समय पर पूरा होने पर टिका है। क्या कंपनी कर्ज के बोझ के बिना इस विस्तार को अंजाम दे पाएगी? यह आने वाले समय में बड़ा मॉनिटरेबल होगा।
