Cochin Shipyard ने दुबई की Drydocks World के साथ 50:50 की एक बड़ी जॉइंट वेंचर (JV) डील की है। इस ₹1,800 करोड़ के करार का मकसद कोच्चि स्थित International Ship Repair Facility (ISRF) का विस्तार करना है, जिसमें **10** नए वर्कस्टेशन जोड़े जाएंगे।
डील का स्ट्रक्चर और भविष्य की तैयारी
इस करार के तहत ISRF का 'स्लंप सेल' (Slump Sale) किया जा रहा है। कुल ₹1,800 करोड़ के इस सौदे में Cochin Shipyard को 50% रकम कैश में मिलेगी, जबकि बाकी 50% हिस्सा नई प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के शेयर के रूप में होगा। कंपनी का मुख्य लक्ष्य मौजूदा 6 वर्कस्टेशन के साथ 10 नए वर्कस्टेशन जोड़कर इसकी क्षमता को कई गुना बढ़ाना है।
मैनेजमेंट में किसका दबदबा?
भले ही हिस्सेदारी 50:50 की है, लेकिन मैनेजमेंट कंट्रोल Drydocks World के हाथ में होगा। समझौते के मुताबिक, 5 बोर्ड डायरेक्टर्स में से 3 को चुनने का अधिकार दुबई की कंपनी के पास रहेगा। यही नहीं, CEO, CFO और COO जैसे अहम पदों पर नियुक्ति का फैसला भी वही करेंगे। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि अब रोजमर्रा के फैसले एक विदेशी पार्टनर के जरिए लिए जाएंगे।
फाइनेंशियल और स्ट्रैटेजिक महत्व
वित्तीय वर्ष 2025-26 में Cochin Shipyard के कुल रेवेन्यू में ISRF का योगदान करीब 4.81% रहा है। हालांकि यह आंकड़ा छोटा दिखता है, लेकिन Drydocks World की ग्लोबल एक्सपर्टीज के साथ कंपनी अब इंटरनेशनल लेवल पर अपनी पहुंच बढ़ाना चाहती है।
आगे की राह और रिस्क
यह डील अभी फाइनल नहीं हुई है। इसे Cochin Port Authority, भारत सरकार और कंपनी के शेयरधारकों की मंजूरी मिलना बाकी है। सरकारी कंपनी द्वारा मैनेजमेंट कंट्रोल प्राइवेट पार्टनर को सौंपने के बाद आने वाली चुनौतियों और ग्लोबल मार्केट में शिप रिपेयर की मांग में होने वाले बदलावों पर निवेशकों की नजर रहनी चाहिए।
