SLMG Beverages: बिहार में कोका-कोला का 'सुपर प्लांट', ₹1,200 करोड़ का निवेश, पूर्वी भारत में मचेगी धूम!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
SLMG Beverages: बिहार में कोका-कोला का 'सुपर प्लांट', ₹1,200 करोड़ का निवेश, पूर्वी भारत में मचेगी धूम!
Overview

SLMG Beverages ने बिहार में साउथ एशिया का सबसे बड़ा कोका-कोला बॉटलिंग प्लांट लॉन्च कर दिया है। **₹1,200 करोड़** के भारी-भरकम इन्वेस्टमेंट से तैयार इस प्लांट का लक्ष्य पूर्वी भारत की सप्लाई चेन को मजबूत करना और बड़े पैमाने पर स्थानीय रोजगार पैदा करना है। यह कोका-कोला की ग्रोथ के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबिलिटी पर खास ध्यान दिया गया है।

बिहार में कोका-कोला का 'सुपर प्लांट' तैयार!

SLMG Beverages Pvt. Ltd. ने बिहार के बक्सर जिले के नवानगर में साउथ एशिया का सबसे बड़ा कोका-कोला बॉटलिंग प्लांट पूरी तरह से चालू कर दिया है। ₹1,200 करोड़ के इन्वेस्टमेंट से बने इस नए ग्रीनफील्ड फैसिलिटी का मकसद राज्य में मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को बढ़ाना और पूर्वी भारत के लिए एक अहम सप्लाई हब बनना है। यह प्लांट कोका-कोला कंपनी के भारत में बढ़ते दखल को दिखाता है, जिसे कंपनी भविष्य की ग्रोथ का बड़ा इंजन मान रही है।

65 एकड़ में फैला 'सुपर प्लांट': 5000 बोतलें प्रति मिनट!

यह प्लांट 65 एकड़ जमीन पर फैला है और इसमें 7 हाई-स्पीड प्रोडक्शन लाइनें लगी हैं, जिनकी कम्बाइंड कैपेसिटी प्रति मिनट 5,000 बोतलें बनाने की है। बिहार में इसकी स्ट्रेटेजिक लोकेशन लॉजिस्टिक्स कॉस्ट को काफी कम करेगी और सप्लाई चेन को और भी तेज बनाएगी, खासकर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में गर्मियों की भारी मांग को पूरा करने के लिए। कोका-कोला अपनी ग्लोबल ग्रोथ स्ट्रैटेजी के तहत ऐसे उभरते बाजारों में पहले से इन्वेस्टमेंट कर रही है। ग्लोबल लेवल पर, कोका-कोला का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन लगभग $350.8 बिलियन है और इसका पी/ई रेश्यो 26.5 के आसपास है। SLMG Beverages के लिए, यह उनका कुल मिलाकर आठवां मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है और बिहार में पहला, जो उन्हें एक प्रमुख बॉटलिंग पार्टनर के तौर पर स्थापित करता है।

बिहार के इंडस्ट्रियल ग्रोथ का नया चैप्टर

SLMG Beverages का यह इन्वेस्टमेंट बिहार के बदलते इंडस्ट्रियल सिनेरियो का एक बड़ा सबूत है। 2024-25 में पहली बार राज्य की इकोनॉमिक आउटपुट में इंडस्ट्री का शेयर एग्रीकल्चर से आगे निकल गया है। इस नए प्लांट के साथ, बिहार में लगभग ₹1.8 लाख करोड़ से ज्यादा के इंडस्ट्रियल प्रपोजल्स पर काम चल रहा है, जो इसे एक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की कोशिशों को दर्शाता है। भारत में FMCG सेक्टर, जो ऐसे डेवलपमेंट का बड़ा फायदा उठा रहा है, 2030 तक INR 53.4 ट्रिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जिसकी एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 17% रहने की उम्मीद है।

चुनौतियाँ और आगे का रास्ता

हालांकि, इस सेक्टर में कॉम्पिटिशन भी काफी कड़ा है, जो सिर्फ कोका-कोला और पेप्सी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि चाय, कॉफी और फ्रूट-बेस्ड ड्रिंक्स जैसे नए कैटेगरीज में भी बढ़ रहा है। कोका-कोला ने पहले भी अपने सप्लाई चेन को बेहतर बनाने के लिए कुछ बॉटलिंग एसेट्स को डाइव्हेस्ट किया था, लेकिन इस नए बड़े प्लांट की सफलता मार्केट पेनिट्रेशन और एफिशिएंट डिस्ट्रीब्यूशन पर निर्भर करेगी। इसके अलावा, भारतीय बेवरेज इंडस्ट्री, खासकर कोका-कोला जैसी बड़ी कंपनियों को वॉटर यूसेज और सस्टेनेबिलिटी प्रैक्टिसेज को लेकर भी जांच का सामना करना पड़ता है। SLMG Beverages सस्टेनेबिलिटी पर जोर दे रही है, जिसमें वॉटर रीसाइक्लिंग और ग्रीन बेल्ट डेवलपमेंट शामिल है, लेकिन वॉटर रिसोर्सेज का मैनेजमेंट और एथिकल सोर्सिंग एक महत्वपूर्ण फैक्टर बने रहेंगे। कंपनी का फाइनेंशियल ईयर 2025 (मार्च 31 तक) का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹6,780 करोड़ था।

फ्यूचर आउटलुक: एक्सपेंशन और मार्केट डीपनिंग

यह बक्सर प्लांट फ्यूचर एक्सपेंशन के लिए भी डिजाइन किया गया है, जिससे SLMG Beverages पूर्वी और मध्य भारत में बढ़ती मांग को पूरा कर सके। यह कोका-कोला की भारत को 'मार्केट ऑफ द फ्यूचर' बनाने की कमिटमेंट के साथ मेल खाता है। कंपनी भारत को अपनी टॉप 3 ग्लोबल मार्केट्स में से एक बनाने का लक्ष्य रखती है। इस प्लांट में ऑटोमेटेड मशीनरी, AI-एनेबल्ड क्वालिटी कण्ट्रोल और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम्स को इंटीग्रेट किया गया है, जो इसे स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग का एक बेंचमार्क बनाता है। इस इन्वेस्टमेंट से लगभग 1,300 डायरेक्ट और इनडायरेक्ट जॉब्स पैदा होने की उम्मीद है, जिसमें लोकल टैलेंट को प्राथमिकता दी जाएगी, जो इस बड़े इन्वेस्टमेंट के इकोनॉमिक इम्पैक्ट को और मजबूत करेगा।

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