चीन का "जियांगलॉन्ग": भारी चट्टानों में सुरंग बनाने वाली मशीन लॉन्च, 30% बढ़ेगी रफ़्तार!

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AuthorMehul Desai|Published at:
चीन का "जियांगलॉन्ग": भारी चट्टानों में सुरंग बनाने वाली मशीन लॉन्च, 30% बढ़ेगी रफ़्तार!

चीन ने 'जियांगलॉन्ग' (Xianglong) नाम की एक नई 400-टन की मशीन लॉन्च की है। यह मशीन मुश्किल चट्टानों में सुरंग बनाने के लिए मैकेनिकल बोरिंग और ब्लास्टिंग (विस्फोट) का मिला-जुला तरीका अपनाएगी। इस नई तकनीक से कठिन इलाकों में खुदाई की रफ़्तार 30% तक बढ़ने की उम्मीद है, जिसका असर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स जैसे हाइड्रोपावर और रेलवे पर पड़ सकता है।

सुरंग बनाने की तकनीक में बड़ा कदम

चीन ने 'जियांगलॉन्ग' नाम से एक नई इंडस्ट्रियल मशीन पेश की है, जो बेहद सख्त या जटिल चट्टानों में सुरंग बनाने के तरीके को बदलने का वादा करती है। 1 अगस्त 2026 को लॉन्च हुई यह मशीन एक हाइब्रिड सिस्टम है। यह पारंपरिक मैकेनिकल बोरिंग को नियंत्रित विस्फोट प्रणाली के साथ जोड़ती है, जिससे यह अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल सकती है और बार-बार उपकरण बदलने की ज़रूरत नहीं पड़ती।

मुश्किल राहें होंगी आसान

टूट-फूट वाली या बहुत सख्त चट्टानों में सुरंग बनाना ऐतिहासिक रूप से एक धीमा और मेहनती काम रहा है। जब पारंपरिक टनल बोरिंग मशीनें (TBMs) बहुत सख्त चट्टानों या रॉक बर्स्ट (चट्टानों का अचानक टूटना) वाले इलाकों में फंस जाती हैं, तो उन्हें मैन्युअल ड्रिलिंग और ब्लास्टिंग पर स्विच करना पड़ता है। जियांगलॉन्ग में एक खास हॉलो कटरहेड लगा है, जो नरम जमीन में बोर कर सकता है और सख्त चट्टानें मिलने पर नियंत्रित विस्फोट का सहारा ले सकता है। इस लचीलेपन से हाई-स्पीड रेल, हाईवे और हाइड्रोपावर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स में आने वाली बड़ी बाधाओं को दूर करने की उम्मीद है, जहां भूवैज्ञानिक अप्रत्याशितता आम है।

रफ़्तार और निर्माण पर असर

सिर्फ रफ़्तार ही नहीं, बल्कि यह मशीन साइट मैनेजमेंट को भी बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन की गई है। शुरुआती अनुमान बताते हैं कि यह इंटीग्रेटेड सिस्टम मुश्किल चट्टानी वातावरण में खुदाई की क्षमता को करीब 30% तक बढ़ा सकता है। इसके अलावा, मशीन में एक इंटीग्रेटेड रॉक क्रशिंग सिस्टम भी है जो खुदाई से निकले मलबे को कंस्ट्रक्शन एग्रीगेट (निर्माण सामग्री) में बदल देता है। मलबे को सीधे साइट पर प्रोसेस करके, मशीन को कंस्ट्रक्शन ज़ोन से बाहर ले जाने की ज़रूरत कम हो जाती है, जिससे प्रोजेक्ट की लागत और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर दोनों में कमी आती है।

भविष्य की योजनाएं और निगरानी

यह 70-मीटर लंबी, 400-टन की मशीन, सिंघुआ यूनिवर्सिटी (Tsinghua University) और चाइना रेलवे साइंस एंड इंडस्ट्री ग्रुप (China Railway Science and Industry Group) के बीच हुए सहयोग से विकसित की गई है। हालांकि यह हेवी इंजीनियरिंग के लिए एक महत्वपूर्ण इनोवेशन है, लेकिन इसका वास्तविक दुनिया में सफल होना एक पंप स्टोरेज हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में इसके पहले इस्तेमाल पर निर्भर करेगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर और हेवी मशीनरी सेक्टर के निवेशक इस प्रोजेक्ट पर नज़र रख सकते हैं कि क्या यह मशीन सक्रिय ऑपरेशन में अपने दक्षता लक्ष्यों को पूरा करती है। मुख्य सफलता का कारक यह होगा कि क्या यह 30% की दक्षता वृद्धि को बनाए रखते हुए हार्ड रॉक एक्सकैवेशन से जुड़े टूट-फूट और उच्च रखरखाव लागत को मैनेज कर पाती है। जैसे-जैसे चीन अपने रेल और हाइड्रोपावर नेटवर्क का विस्तार कर रहा है, घरेलू कंपनियों की ऐसी विशेष मशीनरी बनाने की क्षमता बड़े पैमाने पर सार्वजनिक कार्यों की लागत-दक्षता को प्रभावित कर सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.