नतीजों का लेखा-जोखा
Century Extrusions Limited ने चालू फाइनेंशियल ईयर 2025-26 की तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के लिए अपने नतीजे घोषित कर दिए हैं, जो पिछले साल की तुलना में काफी मजबूत रहे हैं।
क्या रहे प्रमुख आंकड़े?
कंपनी की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, Q3 FY26 में Century Extrusions का रेवेन्यू पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 18.34% की छलांग लगाकर ₹122.53 करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹103.54 करोड़ था। वहीं, नेट प्रॉफिट भी 18.37% बढ़कर ₹29 करोड़ दर्ज किया गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹24.5 करोड़ था। कंपनी का अर्निंग्स पर शेयर (EPS) भी ₹0.31 से बढ़कर ₹0.36 हो गया।
तिमाही-दर-तिमाही (Sequential) आधार पर भी रेवेन्यू में 11.73% की वृद्धि देखी गई।
9 महीने की परफॉरमेंस
31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुए नौ महीनों (9M FY26) के लिए, कंपनी का रेवेन्यू 7.98% बढ़कर ₹336.34 करोड़ रहा। वहीं, नेट प्रॉफिट 10.31% की बढ़ोतरी के साथ ₹80.2 करोड़ दर्ज किया गया, जो 9M FY25 में ₹72.7 करोड़ था। इस दौरान EPS ₹0.91 से बढ़कर ₹1.00 हो गया।
कंपनी ने यह भी बताया कि Ind AS 115 को अपनाने के कारण नौ महीनों में ₹53 लाख का अतिरिक्त मुनाफा दर्ज हुआ है, जो कि एक सकारात्मक अकाउंटिंग एडजस्टमेंट है।
₹45 करोड़ के Rights Issue को मंजूरी
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी खबर यह है कि कंपनी के बोर्ड ने ₹45 करोड़ तक की राशि जुटाने के लिए Rights Issue को हरी झंडी दे दी है। इस प्रस्ताव पर विचार के लिए एक Rights Issue कमेटी का गठन भी किया गया है, हालांकि इश्यू की बाकी शर्तें और मूल्य निर्धारण अभी तय नहीं हुआ है। यह कदम कंपनी की कैपिटल को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है, लेकिन इससे मौजूदा शेयरधारकों के लिए शेयर डाइल्यूशन (Share Dilution) का खतरा भी बना रहेगा।
नए लेबर कोड्स का असर?
इसके अलावा, कंपनी ने 21 नवंबर 2025 को अधिसूचित किए गए नए लेबर कोड्स (Labour Codes) के संभावित असर का मूल्यांकन करने के लिए एक विस्तृत असेसमेंट (Assessment) शुरू किया है। इन नए नियमों के कारण कर्मचारियों पर आने वाले अतिरिक्त खर्चों और इसके मुनाफे पर पड़ने वाले असर का अभी तक कोई अनुमान नहीं लगाया गया है और इसे मौजूदा वित्तीय नतीजों में शामिल भी नहीं किया गया है। यह भविष्य के लिए अनिश्चितता का एक तत्व जोड़ता है।
जोखिम और आगे का रास्ता
शेयरधारकों के लिए तत्काल जोखिम ₹45 करोड़ के Rights Issue से संभावित डाइल्यूशन का है। निवेशक इश्यू प्राइस और सब्सक्रिप्शन रेशियो को लेकर बारीकी से नजर रखेंगे। वहीं, नए लेबर कोड्स का असेसमेंट मध्यम अवधि का जोखिम पेश करता है, क्योंकि कर्मचारी खर्चों में किसी भी बड़ी बढ़ोतरी से कंपनी के मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि, कंपनी के कोर ऑपरेशनल परफॉरमेंस में लगातार YoY ग्रोथ देखी जा रही है, जो एक सकारात्मक संकेत है। अगले 1-2 तिमाहियों में कैपिटल स्ट्रक्चर और रेगुलेटरी बदलावों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।