Centum Electronics Limited अपने बिजनेस स्ट्रक्चर में एक बड़ा बदलाव कर रही है। कंपनी ने कनाडा में घाटे में चल रही अपनी सहायक कंपनियों को बंद करने का फैसला किया है और फ्रांस में अपने ऑपरेशन्स को रीस्ट्रक्चर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह बड़ा कदम कंपनी को भारत के तेजी से बढ़ते और हाई-रिलायबिलिटी वाले इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग (ESDM) सेक्टर, खासकर डिफेंस, स्पेस और एयरोस्पेस में अपनी मौजूदगी बढ़ाने में मदद करेगा।
नतीजों पर दिखे स्ट्रेटेजिक बदलाव के संकेत
हालांकि, इन स्ट्रेटेजिक बदलावों का असर कंपनी के हालिया तिमाही नतीजों पर साफ दिख रहा है। 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में Centum का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹334.04 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले लगभग 21.5% ज्यादा है। लेकिन, कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट लॉस बढ़कर ₹61.75 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की इसी तिमाही में ₹19.3 करोड़ था। यह बढ़ा हुआ लॉस मुख्य रूप से असाधारण खर्चों, जैसे कि फ्रांस की सहायक कंपनी के गुडविल और कुछ इनटैंगिबल एसेट्स के इम्पेयरमेंट (Impairment) से जुड़ा है। कंपनी ने अपनी फ्रेंच यूनिट में निवेश के लिए पूरी प्रोविजनिंग (Provisioning) भी कर दी है। इस तिमाही में बेसिक लॉस प्रति शेयर ₹41.56 रहा, जो पिछले साल ₹12.79 था।
9 महीनों (9MFY26) के नतीजों को देखें तो कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹889 करोड़ रहा, जो पिछले साल से 16.5% अधिक है। वहीं, नेट लॉस बढ़कर ₹53 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह ₹23.45 करोड़ था।
भारत के 'मेक इन इंडिया' डिफेंस पर बड़ा दांव
Centum के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर निखिल मल्ลवरपु का कहना है कि कनाडा की सहायक कंपनियों (Centum E&S और Centum T&S) से बाहर निकलना और फ्रांस की यूनिट्स (Centum T&S Group Société Anonyme) का रीस्ट्रक्चरिंग करना, खर्चों को कम करने और कंपनी के फोकस को हाई-वैल्यू वाले ESDM अवसरों पर केंद्रित करने की दिशा में एक सोची-समझी रणनीति है। कंपनी 'मेक इन इंडिया' पॉलिसी का फायदा उठाना चाहती है और भारत में डिजाइन व मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्लोबल लीडर्स के साथ पार्टनरशिप करना चाहती है।
यह कदम भारत के डिफेंस, स्पेस और एयरोस्पेस सिस्टम्स के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) जैसे मजबूत ग्रोथ वाले सेक्टरों पर केंद्रित है। इन सेक्टरों में सरकारी खर्च बढ़ने और स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग पर जोर देने के कारण जोरदार तेजी देखी जा रही है। अनुमान है कि भारतीय ESDM मार्केट 2030 तक ₹7-8 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है, जिसमें 20-25% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) की उम्मीद है। Centum की यह रणनीति मैक्रोइकोनॉमिक ट्रेंड्स के साथ मेल खाती है।
निवेशक जोखिम और भविष्य की राह
इस रीस्ट्रक्चरिंग के कारण कंपनी के शेयरधारकों को फिलहाल कुछ जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है, खासकर फ्रांस में चल रहे रीस्ट्रक्चरिंग के एग्जीक्यूशन (Execution) को लेकर। मैनेजमेंट का आश्वासन है कि पर्याप्त प्रोविजनिंग कर ली गई है और आगे कोई बड़ा वित्तीय प्रभाव पड़ने की उम्मीद नहीं है। निवेशक अब कंपनी के एग्जीक्यूशन प्लान और भविष्य में लाभप्रदता पर इसके प्रभाव पर बारीकी से नजर रखेंगे।