सीमेंट कंपनियों ने फ्यूल की बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर डालना शुरू कर दिया है। अक्टूबर महीने में सीमेंट के दाम औसतन **₹14** प्रति बैग बढ़ गए हैं, जिसमें पूर्वी भारत में सबसे ज्यादा तेजी देखी गई है।
सीमेंट इंडस्ट्री इस वक्त काफी दबाव में है और अपने मार्जिन को बचाने के लिए कंपनियां लगातार कीमतें बढ़ा रही हैं। देशभर में सीमेंट की औसत कीमत में ₹14 प्रति बैग की बढ़ोतरी हुई है। इसकी मुख्य वजह पेट कोक (Pet coke) और आयातित कोयले (Imported coal) की कीमतों में आई भारी उछाल है, जो दूसरी तिमाही के मुकाबले क्रमशः 20% और 16% तक महंगी हो गई हैं।
पूर्वी भारत में कीमतों का खेल
यह तेजी पूरे देश में दिख रही है, लेकिन सबसे आक्रामक रुख पूर्वी भारत में देखने को मिला है। डेटा के मुताबिक, पूर्वी भारत में कीमतें दूसरी तिमाही के मुकाबले औसतन ₹47 प्रति बैग बढ़ी हैं। कोलकाता, भुवनेश्वर और पटना जैसे शहरों में डीलरों ने ₹20 से लेकर ₹70 प्रति बैग तक की बढ़ोतरी दर्ज की है।
कंपनियों पर वित्तीय दबाव
यह कदम पिछली तिमाही की खराब परफॉर्मेंस के बाद उठाया गया है। Birla Corporation का नेट प्रॉफिट सितंबर 2026 की तिमाही में 58.6% घट गया था। वहीं, Dalmia Bharat को ₹205 करोड़ का नेट लॉस उठाना पड़ा। बढ़ते ऑपरेशनल खर्च ने कंपनियों की कमर तोड़ दी है, जिसके चलते वे अब हर हाल में अपनी कमाई को स्थिर करना चाहती हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम (Risk Factors)
निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह बढ़त टिक पाएगी? अक्टूबर में पूर्वी भारत में सेल्स वॉल्यूम में 2% की गिरावट आई है, जो यह बताती है कि ग्राहक कीमतों के प्रति काफी संवेदनशील हैं। अगर कीमतें ज्यादा बढ़ती हैं, तो सेल्स घटने का रिस्क बना हुआ है। अब बाजार की नजरें सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और त्योहारी सीजन के बाद निर्माण कार्यों में आने वाली तेजी पर टिकी हैं, जबकि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव भी ईंधन सप्लाई के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है।
