ग्लोबल मार्केट में पेटकोक और कोयले की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय सीमेंट सेक्टर पर दिखने लगा है। प्रमुख सीमेंट उत्पादक कंपनियां सीमेंट की कीमतों में **₹5 से ₹20** प्रति बैग तक की बढ़ोतरी कर रही हैं ताकि बढ़ते इनपुट खर्चों के बीच मुनाफे को सुरक्षित रखा जा सके।
भारतीय सीमेंट कंपनियां बढ़ती एनर्जी कॉस्ट का बोझ अब ग्राहकों पर डालने को मजबूर हैं। सितंबर और अक्टूबर 2026 के दौरान देश भर में सीमेंट की कीमतों में इजाफा देखा गया है। इसकी मुख्य वजह पेटकोक की कीमतों में भारी उछाल है, जो मार्च में $160 प्रति टन था, वह अक्टूबर तक बढ़कर $188 प्रति टन के स्तर पर पहुंच गया है।
मार्जिन पर दबाव और कंपनियों की रणनीति
आमतौर पर किसी भी सीमेंट कंपनी के कुल प्रोडक्शन खर्च में फ्यूल और पावर की हिस्सेदारी 25% से 35% तक होती है। वेस्ट एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण एनर्जी प्राइसेज में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ रहा है।
बाजार की दिग्गज कंपनी UltraTech Cement ने दबाव को कम करने के लिए सितंबर के अंत में ही ₹7 से ₹10 प्रति बैग की बढ़ोतरी की है। इसी राह पर चलते हुए Ambuja Cements और Dalmia Bharat ने भी अपने दाम बढ़ाए हैं। Shree Cement की बात करें, तो कंपनी ने हाल ही में 18% की वॉल्यूम ग्रोथ दर्ज की है, लेकिन इनपुट कॉस्ट बढ़ने के कारण प्रति टन मुनाफा अब भी दबाव में है।
निवेशकों के लिए जोखिम
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या प्रतिस्पर्धी बाजार में ये बढ़ी हुई कीमतें टिक पाएंगी? हालांकि इंफ्रास्ट्रक्चर और हाउसिंग प्रोजेक्ट्स से डिमांड अभी मजबूत बनी हुई है, लेकिन अगर मानसून के बाद मांग में सुस्ती आती है, तो कंपनियों को अपना मार्केट शेयर बनाए रखने के लिए कीमतों पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
दीर्घकालिक आधार पर ग्रीन एनर्जी में निवेश बढ़ाना एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन फिलहाल निवेशकों को मैनेजमेंट की कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए कि वे मार्जिन रिकवरी को लेकर क्या रुख अपना रहे हैं।
