Carrier Global अपने श्री सिटी, आंध्र प्रदेश स्थित मैन्युफैक्चरिंग हब में 100 मिलियन डॉलर का भारी-भरकम निवेश कर रही है। यह बड़ा कदम भारत के इंडस्ट्रियल कूलिंग मार्केट में कंपनी के मजबूत भरोसे को दिखाता है। इस विस्तार से भारतीय ग्राहकों और अफ्रीका व मिडिल ईस्ट जैसे रीजन्स में एक्सपोर्ट के लिए प्रोडक्शन कैपेसिटी में काफी बढ़ोतरी होगी। कंपनी के सीईओ डेविड ग्लिटिन (David Gitlin) ने बताया कि कंपनी का लक्ष्य ग्लोबल महंगाई और सप्लाई चेन की दिक्कतों, जिनमें भू-राजनीतिक घटनाओं से जुड़ी समस्याएं भी शामिल हैं, से भारतीय बाजार को बचाना है। उन्होंने यह भी साफ किया कि भारत के बाहर कीमतों में बढ़ोतरी घरेलू स्तर की तुलना में ज्यादा रही है, ताकि भारत में कीमतें सुलभ बनी रहें। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य कॉपर, स्टील और एल्युमीनियम जैसे मटीरियल की बढ़ती लागत और फ्यूल सरचार्जेज के असर को कम करना है, न कि मार्जिन बढ़ाना।
Carrier के लिए भारत का भविष्य काफी उज्ज्वल दिख रहा है। सीईओ ग्लिटिन का अनुमान है कि अगले दशक तक भारत का कारोबार लगातार डबल-डिजिट सालाना ग्रोथ दिखाएगा और कुछ ही सालों में इसका आकार दोगुना हो सकता है। यह अनुमान इंडस्ट्री के उन अनुमानों से मेल खाता है, जो भारत के एचवीएसी (HVAC) मार्केट में 2030 तक सालाना 12-15% की ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं। इसकी वजह इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और सरकारी प्रोजेक्ट्स हैं। जहां भारत कंपनी के लिए एक अहम ग्रोथ एरिया है, वहीं ग्लोबल लेवल पर कंपनी को इस साल प्रदर्शन 'फ्लैटिश' यानी स्थिर रहने की उम्मीद है। इसका कारण अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में गिरावट की आशंका है, जहां 2025 के अंत में मार्केट में करीब 5% की गिरावट आई थी और 2026 में भी इसके स्थिर रहने का अनुमान है। यह स्थिति एक बंटी हुई ग्लोबल इकोनॉमी को दर्शाती है, जहां भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स मजबूत बने हुए हैं, वहीं डेवलप्ड इकोनॉमीज दबाव में हैं।
भारत में ग्रोथ की उम्मीदों के बावजूद, कंपनी के सामने कुछ बड़े जोखिम भी हैं। भारत में कीमतों में बढ़ोतरी को सीमित रखना, जो मार्केट शेयर के लिए अच्छा है, इनपुट कॉस्ट बढ़ने पर मार्जिन पर दबाव डाल सकता है। इतिहास में कंपनी ने पिछले महंगाई के दौर में ग्रॉस मार्जिन में 150 बेसिस पॉइंट्स तक की गिरावट देखी है। इसके अलावा, अमेरिका जैसे कमजोर इंटरनेशनल मार्केट्स पर निर्भरता कंपनी के ओवरऑल परफॉर्मेंस पर भारी पड़ सकती है। 100 मिलियन डॉलर के विस्तार को समय पर और बजट के अंदर पूरा करने की एग्जीक्यूशन की चुनौतियां भी मौजूद हैं। सीईओ ग्लिटिन ने ग्रोथ पीरियड्स को संभाला है, लेकिन बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ग्लोबल सप्लाई चेन पर उनके असर को मैनेज करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
भविष्य को देखते हुए, Carrier Global की स्ट्रैटेजी भारत के तेजी से हो रहे औद्योगीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ का फायदा उठाने पर केंद्रित है। कंपनी की कमर्शियल सेक्टर में मजबूत पकड़ है। 100 मिलियन डॉलर का यह निवेश भविष्य में एक्सपोर्ट ग्रोथ के लिए उसकी पोजीशन को और मजबूत करेगा। ज्यादातर एनालिस्ट्स Carrier Global को 'बाय' (Buy) रेटिंग दे रहे हैं, जिनका कंसेंसस प्राइस टारगेट करीब 65 डॉलर है। इस पॉजिटिव राय का आधार भारत की ग्रोथ स्टोरी और डाइवर्सिफिकेशन है, लेकिन एनालिस्ट्स निकट भविष्य में मार्जिन पर दबाव और इंटरनेशनल मार्केट की कमजोरी से कंपनी के ओवरऑल ग्रोथ पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चेतावनी दे रहे हैं।
