कंपनी में हुआ अहम बदलाव
Cargotrans Maritime Limited ने अपने कॉर्पोरेट गवर्नेंस (corporate governance) ढांचे में एक बड़ा फेरबदल किया है। कंपनी के कंपनी सेक्रेटरी (Company Secretary) और अनुपालन अधिकारी (Compliance Officer) श्री मेहेक जितेंद्र कास्ता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका कार्यकाल 16 मार्च, 2026 को समाप्त हो रहा है।
इसके जवाब में, कंपनी ने 17 मार्च, 2026 से प्रभावी, सुश्री भूमि रश्मि नायगांधी को इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपी है। सुश्री नायगांधी इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (ICSI) की एसोसिएट सदस्य हैं और कंपनी कानून (Company Law) व सिक्योरिटीज कानून (Securities Law) के अनुपालन में विशेषज्ञता रखती हैं।
कंपनी सेक्रेटरी की भूमिका
एक कंपनी सेक्रेटरी कंपनी के संचालन में रीढ़ की हड्डी की तरह काम करता है। यह पद वैधानिक नियमों (statutory regulations) का पालन सुनिश्चित करने, बोर्ड मीटिंग्स (board meetings) की सुविधा प्रदान करने, कॉर्पोरेट रिकॉर्ड्स (corporate records) को बनाए रखने और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) जैसी नियामक संस्थाओं के साथ संपर्क अधिकारी के रूप में कार्य करने के लिए जिम्मेदार होता है।
Cargotrans Maritime की अन्य गतिविधियां
लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की कंपनी Cargotrans Maritime Limited हाल ही में कई कॉर्पोरेट गतिविधियों में सक्रिय रही है। कंपनी ने शेयरधारकों से लगभग ₹37 करोड़ के प्रेफरेंशियल इश्यू (preferential issue) के माध्यम से पूंजी विस्तार (capital expansion) के लिए मंजूरी मांगी है, साथ ही अपने अधिकृत शेयर पूंजी (authorized share capital) में भी वृद्धि की है। BSE SME प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध (listed) होने के नाते, Cargotrans Maritime Limited को SEBI के कुछ कॉर्पोरेट गवर्नेंस नियमों से छूट मिलती है।
यह नियुक्ति, सुश्री नायगांधी की विशेषज्ञता पर भरोसा करते हुए, कंपनी के कानूनी और वैधानिक दायित्वों (statutory obligations) के प्रबंधन में निरंतरता सुनिश्चित करती है। कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस बदलाव से जुड़े कोई विशेष गवर्नेंस (governance) या अनुपालन जोखिम (compliance risks) नहीं हैं, जो दर्शाता है कि यह एक सामान्य प्रशासनिक बदलाव है।
निवेशक सुश्री नायगांधी की नई भूमिका में प्रभावी कार्यप्रणाली पर नजर रखेंगे। मुख्य क्षेत्रों में लागू कॉर्पोरेट कानूनों और SEBI के नियमों का कंपनी का निरंतर अनुपालन, विकास के लिए नई पूंजी का लाभ उठाने की क्षमता, और गवर्नेंस की निरंतर निगरानी शामिल होगी, खासकर SME लिस्टिंग की स्थिति को देखते हुए।
