क्यों है सीमेंट इंडस्ट्री बड़ी समस्या?
ग्लोबल कंस्ट्रक्शन के लिए सीमेंट इंडस्ट्री बेहद ज़रूरी है, लेकिन इसका कार्बन फुटप्रिंट (Carbon Footprint) बहुत बड़ा है। सीमेंट बनाने में पारंपरिक तौर पर चूना पत्थर (Limestone) का इस्तेमाल होता है, जिसे जलाने पर भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) निकलती है। यह प्रोसेस दुनिया भर के CO2 उत्सर्जन का करीब 8% हिस्सा है, इसलिए इसे कम करना बहुत ज़रूरी है।
सीमेंट उत्पादन की चुनौती
आम तौर पर, चूना पत्थर को 1,500 डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा तापमान पर गर्म किया जाता है। इस केमिकल रिएक्शन से सीधे कैल्शियम कार्बोनेट से CO2 निकलती है। हर टन सीमेंट बनाने पर लगभग 500 किलोग्राम CO2 का उत्सर्जन होता है, जो पर्यावरण के लिए एक बड़ी रुकावट है।
बेसाल्ट: एक हरा-भरा विकल्प
वैज्ञानिकों ने अब कार्बन-फ्री, कैल्शियम से भरपूर सिलिकेट चट्टान, जैसे बेसाल्ट (Basalt) पर स्विच करने का सुझाव दिया है। 'कम्युनिकेशन्स सस्टेनेबिलिटी' (Communications Sustainability) में छपी एक स्टडी के मुताबिक, दुनिया में बेसाल्ट के इतने विशाल भंडार हैं कि मौजूदा तरीकों से सीमेंट उत्पादन को लाखों सालों तक पूरा किया जा सकता है।
उत्सर्जन और एनर्जी की खपत में भारी कटौती
बेसाल्ट कई बड़े फायदे देता है। इस पत्थर से बनी सीमेंट में चूना पत्थर वाली सीमेंट की तुलना में 60% तक कम एनर्जी की ज़रूरत पड़ सकती है। प्रति टन CO2 उत्सर्जन 600 किलोग्राम (चूना पत्थर और नेचुरल गैस के साथ) से घटकर बेसाल्ट के साथ सिर्फ 43-59 किलोग्राम रह सकता है। इस बदलाव से इंडस्ट्री पर पड़ने वाला जलवायु (Climate) का असर बहुत तेज़ी से कम हो सकता है। मौजूदा जीवाश्म ईंधनों (Fossil Fuels) का इस्तेमाल करते हुए भी CO2 उत्सर्जन 25% से ज़्यादा कम हो सकता है।
आर्थिक फायदे और तेज़ अपनाना
रिसर्च में कम एनर्जी खपत से संभावित लागत बचत (Cost Savings) का भी ज़िक्र है। बेसाल्ट चट्टानों में कीमती धातुएं भी हो सकती हैं, जिन्हें उप-उत्पादों (By-products) के तौर पर निकाला जा सकता है। कई नए "ग्रीन सीमेंट" के विपरीत, बेसाल्ट वाले तरीके में मौजूदा टेक्नोलॉजी का ही इस्तेमाल होता है। इससे कंस्ट्रक्शन सेक्टर में इसे तेज़ी से अपनाया जा सकता है, क्योंकि इसमें लंबे डेवलपमेंट और टेस्टिंग पीरियड की ज़रूरत नहीं होगी। फाइनल प्रोडक्ट वही स्टैंडर्ड पोर्टलैंड सीमेंट (Portland Cement) होगा, जो मौजूदा इस्तेमाल के लिए पूरी तरह से ठीक है। स्टडी एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करती है, जो एक मुख्य ग्लोबल इंडस्ट्री को डीकार्बोनाइज़ (Decarbonise) करने का एक प्रैक्टिकल तरीका पेश करता है।