CMR Green Technologies की शेयर बाजार में धमाकेदार एंट्री! IPO प्राइस से **43%** ऊपर खुला शेयर

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AuthorAditya Rao|Published at:
CMR Green Technologies की शेयर बाजार में धमाकेदार एंट्री! IPO प्राइस से **43%** ऊपर खुला शेयर

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CMR Green Technologies ने आज शेयर बाजार में शानदार डेब्यू किया है। कंपनी के शेयर BSE पर **₹275.40** के भाव पर लिस्ट हुए, जो कि इसके IPO प्राइस **₹192** से **43%** ज्यादा है। नॉन-फेरस मेटल रीसाइक्लिंग का काम करने वाली इस कंपनी में निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया था, इश्यू **127** गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ था।

IPO के बाद शेयर बाजार में धमाकेदार एंट्री

CMR Green Technologies ने 10 जून 2026 को शेयर बाजार में ज़ोरदार शुरुआत की है। कंपनी के शेयर BSE पर ₹275.40 के भाव पर लिस्ट हुए, जो कि इसके इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) प्राइस ₹192 से 43% का शानदार उछाल दिखाता है। यह लिस्टिंग ₹631 करोड़ के ऑफर फॉर सेल (Offer for Sale) के बाद हुई है, जिसमें मौजूदा शेयरहोल्डर्स ने पब्लिक इन्वेस्टर्स को अपनी हिस्सेदारी बेची।

इस पब्लिक इश्यू पर निवेशकों ने ज़बरदस्त भरोसा दिखाया, जिसके चलते यह इश्यू कुल 127.07 गुना सब्सक्राइब हुआ। इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (Institutional Investors) ने सबसे ज़्यादा दिलचस्पी दिखाई और अपने कोटे को 270 गुना से ज़्यादा सब्सक्राइब किया। वहीं, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (Non-Institutional Investors) और रिटेल पार्टिसिपेंट्स (Retail Participants) ने भी ऊंची बोली लगाई। IPO से पहले, कंपनी ने एंकर इन्वेस्टर्स (Anchor Investors) से ₹188.44 करोड़ जुटाए थे।

बिजनेस मॉडल और इंडस्ट्री का गणित

साल 2006 में स्थापित, CMR Green Technologies नॉन-फेरस मेटल्स, खासकर एल्युमीनियम की रीसाइक्लिंग में माहिर है। कंपनी रीसाइकल्ड एल्युमीनियम अलॉय (Recycled Aluminium Alloy), जिंक अलॉय इंगोट्स (Zinc Alloy Ingots) और एल्युमीनियम बिलेट्स (Aluminium Billets) बनाती है। ये मैटेरियल्स ऑटोमोटिव और इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए बेहद ज़रूरी हैं। कंपनी के प्रमुख ग्राहकों में Bajaj Auto, Honda Cars India और Maruti Suzuki जैसे बड़े ऑटोमोबाइल प्लेयर्स शामिल हैं।

यह बिजनेस मैन्युफैक्चरिंग में सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) के बढ़ते ट्रेंड से जुड़ा हुआ है। प्राइमरी एल्युमीनियम की तुलना में रीसाइकल्ड एल्युमीनियम बनाने में काफी कम एनर्जी लगती है, जिससे यह उन कंपनियों के लिए आकर्षक बन जाता है जो अपना कार्बन फुटप्रिंट (Carbon Footprint) कम करना चाहती हैं। जैसे-जैसे दुनिया भर के मैन्युफैक्चरर्स उत्सर्जन कम करने पर ध्यान दे रहे हैं, मेटल रिसाइक्लर सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बन गए हैं।

फाइनेंसियल पर एक नज़र

हाल की तिमाहियों में कंपनी ने रेवेन्यू ग्रोथ (Revenue Growth) दिखाई है। दिसंबर 2025 को समाप्त नौ महीनों के लिए, कंपनी ने ₹6,291 करोड़ का रेवेन्यू और ₹162.39 करोड़ का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (Profit After Tax) दर्ज किया। वहीं, फाइनेंशियल ईयर 2025 के लिए, कंपनी ने ₹6,696.66 करोड़ का रेवेन्यू और ₹155.04 करोड़ का नेट प्रॉफिट (Net Profit) हासिल किया। इन नंबर्स को देखते हुए, इन्वेस्टर्स अक्सर कंपनी की कॉस्ट मैनेजमेंट (Cost Management) की क्षमता का आकलन करते हैं, क्योंकि रीसाइक्लिंग बिजनेस में प्राइमरी मैन्युफैक्चरिंग की तुलना में मार्जिन (Margins) अक्सर कम होते हैं।

निवेशकों के लिए रिस्क (Risk Factors)

हालांकि लिस्टिंग सफल रही, इन्वेस्टर्स को रीसाइक्लिंग बिजनेस की प्रकृति को समझना होगा। एक बड़ा रिस्क यह है कि कंपनी ऑटोमोटिव इंडस्ट्री पर बहुत ज़्यादा निर्भर है। चूंकि कार प्रोडक्शन साइक्लिकल (Cyclical) होता है, ऑटो सेल्स में किसी भी तरह की मंदी का एल्युमीनियम अलॉय की डिमांड पर सीधा असर पड़ सकता है।

इसके अलावा, कंपनी कच्चे माल की कीमतों (Raw Material Price) के रिस्क के प्रति भी संवेदनशील है। स्क्रैप मेटल (Scrap Metal) की कीमत ग्लोबल ट्रेंड्स के आधार पर घट-बढ़ सकती है, जिससे प्रॉफिट मार्जिन प्रभावित हो सकते हैं। चूंकि कंपनी एक कॉम्पिटिटिव मार्केट (Competitive Market) में काम करती है, इसलिए इनपुट कॉस्ट (Input Cost) बढ़ने पर उसे अपने ऑटोमोटिव क्लाइंट्स पर पास ऑन करने की उसकी क्षमता लॉन्ग-टर्म प्रॉफिटेबिलिटी (Long-term Profitability) के लिए महत्वपूर्ण है।

इन्वेस्टर्स को क्या ट्रैक करना चाहिए

आगे चलकर, मार्केट पार्टिसिपेंट्स (Market Participants) मेटल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच कंपनी की प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने की क्षमता पर नज़र रखेंगे। मैनेजमेंट का वॉल्यूम ग्रोथ (Volume Growth) और क्लाइंट बेस के विस्तार पर कमेंट्री महत्वपूर्ण होगी। इन्वेस्टर्स यह भी ट्रैक कर सकते हैं कि कंपनी ऑटोमोटिव सेक्टर की बदलती ज़रूरतों, खासकर इलेक्ट्रिक व्हीकल (Electric Vehicle) के नए कंपोनेंट्स या हल्के मैटेरियल्स के साथ इंटीग्रेट (Integrate) करते हुए अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency) को कैसे मैनेज करती है।

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Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.