क्षमता विस्तार का कमाल
CG Power and Industrial Solutions ने हाल ही में नैशिक में अपनी नई S3 यूनिट-II में प्रोडक्शन शुरू किया है। यह एक्सपैंशन एक्स्ट्रा हाई-वोल्टेज (EHV) स्विचगियर की क्षमता की कमी को दूर करने के लिए एक बड़ा कदम है। 35 एकड़ की इस नई फैसिलिटी से कंपनी का मैन्युफैक्चरिंग फुटप्रिंट काफी मजबूत हुआ है, जिससे 33kV से 245kV तक के सर्किट ब्रेकर्स के लिए सालाना 7,200 यूनिट की अतिरिक्त क्षमता मिलेगी। यह कंपनी के ₹748.20 करोड़ के बड़े ग्रीनफील्ड इन्वेस्टमेंट का एक अहम हिस्सा है, जिसका मकसद ग्रिड आधुनिकीकरण (grid modernization) और रिन्यूएबल एनर्जी (renewable energy) की ओर बढ़ते ट्रांजिशन से बढ़ती मांग को पूरा करना है।
वैल्यूएशन का सवाल
हालांकि यह एक्सपैंशन कंपनी की ऑपरेशनल ताकत दिखाता है, लेकिन स्टॉक का करंट वैल्यूएशन चिंता का विषय है। अपने पिछले 12 महीनों के प्रॉफिट पर आधारित P/E (Price-to-Earnings) रेश्यो 120x के आसपास है, जो इसके इंडस्ट्रियल साथियों की तुलना में काफी प्रीमियम पर है। इतना हाई मल्टीपल यह बताता है कि बाजार ने पहले से ही कंपनी की फ्यूचर ग्रोथ को वैल्यू में शामिल कर लिया है। ऐसे में, कंपनी पर अपने रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) को हाई-टीन्स में बनाए रखने और डबल-डिजिट रेवेन्यू ग्रोथ हासिल करने का दबाव होगा। इस खबर के बाद स्टॉक में 3.69% की उछाल आई, लेकिन यह अपने बुक वैल्यू के करीब 18 गुना पर ट्रेड कर रहा है, जो कि काफी ऊंचा स्तर है। कंपनी को अपने ₹17,000 करोड़ से ज्यादा के बड़े ऑर्डर बैकलॉग पर लगातार अच्छा काम करना होगा।
निवेश पर संशय?
निवेशकों को कंपनी के कैपिटल-इंटेंसिव वर्टिकल्स में जाने के फैसले पर थोड़ा सतर्क रहना चाहिए। हालिया फाइनेंशियल रिजल्ट्स से पता चला है कि भारी स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट, खासकर सेमीकंडक्टर ATMP सेगमेंट में, शॉर्ट-टर्म में मार्जिन पर दबाव डाल रहे हैं। पिछले कुछ तिमाहियों में प्रॉफिट का करीब 110 बेसिस पॉइंट्स मार्जिन इससे प्रभावित हुआ है। ज्यादा डाइवर्सिफाइड इंडस्ट्रियल कंपनियों के विपरीत, CG Power का कैपिटल-हैवी प्रोजेक्ट्स पर निर्भरता इसे कमोडिटी प्राइस की वोलेटिलिटी (volatility) और सप्लाई चेन की दिक्कतों के प्रति ज्यादा संवेदनशील बनाती है। इसके अलावा, मुरूगप्पा ग्रुप (Murugappa Group) के नेतृत्व में कंपनी के सफल टर्नअराउंड के बावजूद, अवंथा (Avantha) एरा के पुराने गवर्नेंस इश्यू का साया अभी भी बना हुआ है, खासकर जब कंपनी ग्लोबली अपने ऑपरेशंस को बढ़ा रही है और कॉम्प्लेक्स टेक्निकल मार्केट्स में काम कर रही है।
आगे का रास्ता और मार्केट का मूड
एनालिस्ट्स मार्जिन में सुधार की उम्मीद कर रहे हैं, खासकर जब हाई-मार्जिन सर्विस रेवेन्यू पारंपरिक पावर इक्विपमेंट सेल्स के साथ बढ़ेगा। लॉन्ग-टर्म की उम्मीदें भारत के पावर कैपिटल एक्सपेंडिचर (capex) साइकिल पर टिकी हैं। हालांकि, वर्तमान ऊंचे P/E को देखते हुए, अगर कंपनी अपने एस्टीमेट्स पर खरा नहीं उतर पाई, तो स्टॉक के वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट आ सकती है। जैसे-जैसे कंपनी अपना एक्सपोर्ट बिजनेस बढ़ा रही है और नई मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को इंटीग्रेट कर रही है, यह देखना अहम होगा कि क्या ये कैपिटल इन्वेस्टमेंट लगातार कैश फ्लो में तब्दील होंगे, या वर्किंग कैपिटल साइकिल का बढ़ना एक लॉन्ग-टर्म एफिशिएंसी हैडविंड (headwind) बना रहेगा।
