आर्थिक ज़रूरत
भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, जो फिलहाल देश की GDP का 15-17% योगदान देता है, उसे ईस्ट एशियन इकोनॉमीज़ की तरह तरक्की करने का दबाव झेल रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट प्रस्ताव में 200 पुराने इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स को रिवाइव करने का लक्ष्य है। इस पहल का मकसद इन पुरानी इंडस्ट्रियल ज़ोन्स को टारगेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और टेक्नोलॉजी से ज़्यादा कॉस्ट-कॉम्पिटिटिव और एफिशिएंट बनाना है।
NITI Aayog का विज़न
इस स्ट्रेटेजी का अहम हिस्सा NITI Aayog का यह कहना है कि 2047 तक सस्टेन्ड इकोनॉमिक ग्रोथ और बड़े पैमाने पर क्वालिटी एम्प्लॉयमेंट के लिए मैन्युफैक्चरिंग का शेयर GDP के 25% तक बढ़ाना ज़रूरी है। यह प्रस्ताव मानता है कि बिखरे हुए एक्सपेरिमेंट्स पर काबू पाने के लिए सरकार, इंडस्ट्री और स्टेट अथॉरिटीज के बीच सीमलेस कोलैबोरेशन से चलने वाला कोऑर्डिनेटेड ट्रांसफॉर्मेशन चाहिए। यह लॉन्ग-टर्म कमिटमेंट भारत को एडवांस्ड, हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग में लीडर के तौर पर स्थापित करेगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी पर फोकस
प्रस्तावित स्कीम्स इन 200 क्लस्टर्स के अंदर फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने और एडवांस्ड टेक्नोलॉजीज़ को अपनाने को प्राथमिकता देंगी। इसमें कॉमन फैसिलिटीज़ को मॉडर्नाइज़ करना, लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाना और डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग टूल्स को अपनाने में सपोर्ट करना शामिल हो सकता है। ऐसे अपग्रेड MSMEs के लिए बेहद ज़रूरी हैं, जिन्हें तेज़ी से बढ़ती ग्लोबल कॉम्पिटिशन के बीच इन-हाउस डिज़ाइन कैपेबिलिटीज़ डेवलप करने में अक्सर मुश्किलें आती हैं। आने वाला दशक भारत के मैन्युफैक्चरिंग फुटप्रिंट को री-डिफाइन करने का एक अनोखा मौका पेश करता है।