Budget 2026: EV के लिए बड़ा दांव! Lithium Battery पर Duty Cut, Infra Boom की तैयारी!

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AuthorMehul Desai|Published at:
Budget 2026: EV के लिए बड़ा दांव! Lithium Battery पर Duty Cut, Infra Boom की तैयारी!
Overview

Union Budget 2026 ने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए एक अहम कदम उठाया है। सरकार ने लिथियम-आयन बैटरी के निर्माण के लिए कैपिटल गुड्स (Capital Goods) पर कस्टम्स ड्यूटी (Customs Duty) में छूट को आगे बढ़ाया है। साथ ही, **मार्च 2028** तक सेल्स और पार्ट्स पर कंसेशनल ड्यूटी (Concessional Duty) के लाभ जारी रहेंगे, जिसका मकसद भारत में एक मजबूत EV इकोसिस्टम तैयार करना है।

EV इकोसिस्टम के लिए पॉलिसी में निरंतरता

Union Budget 2026-27 में लिथियम-आयन सेल बनाने के लिए कैपिटल गुड्स पर लगने वाली बेसिक कस्टम्स ड्यूटी (Basic Customs Duty) में छूट जारी रखी गई है। इस महत्वपूर्ण लाभ में अब बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (Battery Energy Storage Systems) के लिए जरूरी कंपोनेंट्स भी शामिल किए गए हैं। यह इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर के बढ़ते दायरे को देखते हुए सरकारी समर्थन का एक मजबूत संकेत है, जो निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए बेहद अहम है।

इंडस्ट्री ने किया बढ़े हुए लाभों का स्वागत

SIAM (सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स) के प्रेसिडेंट शैलेश चंद्रा ने कहा कि कैपिटल गुड्स पर छूट और लिथियम-आयन सेल्स व उनके पार्ट्स पर कंसेशनल ड्यूटी (Concessional Duty) का मार्च 2028 तक विस्तार, 'एक मजबूत EV इकोसिस्टम' बनाने में मदद करेगा। उम्मीद है कि इससे ऑटोमोबाइल सेक्टर में मांग बढ़ेगी और इंडस्ट्रियल एक्टिविटी को भी बढ़ावा मिलेगा।

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) ने भी EV इकोसिस्टम के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का स्वागत किया। FADA प्रेसिडेंट CS विग्नेश्वर ने इस कदम को, परमानेंट मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के प्रयासों के साथ जोड़ते हुए कहा कि इससे EV प्रोडक्शन और इनकी अफोर्डेबिलिटी (Affordability) में काफी सुधार होगा। इसके अलावा, सस्टेनेबल पब्लिक मोबिलिटी के लिए 4,000 ई-बसों (e-buses) को शामिल करना और ब्लेंडेड सीएनजी (CNG) पर एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) से बायोगैस वैल्यू को बाहर रखना, ग्रीन मोबिलिटी (Green Mobility) को और मजबूत करेगा।

मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन पर फोकस

बजट में MSMEs (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) के लिए सपोर्ट और एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन (Export Facilitation) पर जोर दिया गया है, जिसका लक्ष्य भारत को एक कॉम्पिटिटिव सोर्सिंग डेस्टिनेशन (Competitive Sourcing Destination) के रूप में स्थापित करना है। डेलॉइट (Deloitte) के पार्टनर हरप्रीत सिंह ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर के लिए 31 मार्च, 2028 तक एक्सटेंशन को 'बहुत जरूरी पॉलिसी कंटिन्यूइटी' (Policy Continuity) बताया।

व्यापक आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चर पर असर

बड़े कॉग्लोमेरेट्स (Conglomerates) के लीडर्स ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी। महिंद्रा ग्रुप (Mahindra Group) के CEO और MD अनीश शाह ने आत्मनिर्भरता और ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस (Global Competitiveness) को बढ़ाने वाले कदमों का जिक्र किया। मर्सिडीज-बेंज इंडिया (Mercedes-Benz India) के MD और CEO संतोष अय्यर ने ₹1 लाख करोड़ के कैपेक्स (Capex) में हुई बड़ी वृद्धि को रेखांकित किया, जो विकसित हो रहे मोबिलिटी इकोसिस्टम को सपोर्ट करता है और बेहतर हाईवे के माध्यम से लग्जरी कार की मांग को बढ़ाता है।

जेसीबी इंडिया (JCB India) के MD और CEO दीपक शेट्टी ने कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण बूस्ट का उल्लेख किया, खासकर टनल बोरिंग मशीनों जैसे हाई-वैल्यू कैपिटल गुड्स के डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग पर ध्यान केंद्रित करने के साथ। त्सुयो मैन्युफैक्चरिंग (Tsuyo Manufacturing) के को-फाउंडर और CEO विजय ठाकुर ने कहा कि एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स, रेयर-अर्थ सप्लाई सिक्योरिटी (Rare-earth supply security) और EV कंपोनेंट्स के लिए सपोर्ट, विभिन्न व्हीकल सेगमेंट्स में डोमेस्टिक इलेक्ट्रिक मोटर मैन्युफैक्चरिंग को फायदा पहुंचाएगा, साथ ही क्रिटिकल मिनरल रीसाइक्लिंग (Critical mineral recycling) के जरिए सर्कुलर इकॉनमी (Circular Economy) को भी मजबूत करेगा।

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