भारतीय बजट 2026 को उद्योग जगत से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। उद्योग जगत के नेताओं का मानना है कि इस बजट ने बड़ी-बड़ी पॉलिसी घोषणाओं से हटकर 'एग्जीक्यूशन-लेड' रणनीति को अपनाया है, जहां पूंजी का आवंटन बेहद लक्षित (micro-targeted) तरीके से किया जाएगा।
Federation of Indian Chambers of Commerce and Industry (FICCI) के वरिष्ठ अधिकारी इस कदम को केवल पॉलिसी की घोषणाओं से आगे बढ़कर परिभाषित परिणामों (defined outcomes) की ओर बढ़ने के रूप में देख रहे हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी से ग्रोथ को बढ़ावा
इस बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज को सीधे तौर पर शहर-विशिष्ट हब (city-specific hubs) और सेक्टर-विशिष्ट योजनाओं से जोड़ा गया है। FICCI के वाइस प्रेसिडेंट और Dalmia Bharat Group के MD, पुनीत डालमिया (Puneet Dalmia) ने कहा कि फिजिकल और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़े पैमाने पर निर्माण किया जाएगा। इस रणनीति का मकसद प्रोडक्टिविटी को बढ़ाना, लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना और सुनियोजित कनेक्टिविटी के जरिए वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता (global competitiveness) को मजबूत करना है।
स्थिर फ्रेमवर्क से निवेश को सहारा
FICCI के प्रेसिडेंट और RPG Group के वाइस चेयरमैन, अनंत गोयनका (Anant Goenka) ने बजट के विकास और समावेशिता (inclusivity) पर जोर देने की बात कही। उन्होंने कहा कि रिफॉर्म्स में निरंतरता (continuity in reforms) और इंफ्रास्ट्रक्चर पर टिकाऊ जोर, भविष्य के लिए तैयार इंडस्ट्रीज को टेक्सटाइल और अपैरल जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टर के साथ संतुलित करेगा। यह स्थिर पॉलिसी माहौल (stable policy environment) व्यवसायों को लंबी अवधि के निवेश की योजना बनाने का आत्मविश्वास देता है।
माइक्रो-प्लानिंग से एफिशिएंसी में वृद्धि
पूंजी का आवंटन अत्यंत बारीकी से योजनाबद्ध (granular planning) तरीके से किया जा रहा है। डालमिया ने कनेक्टिविटी के लिए विशिष्ट शहरों की पहचान, लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल हब के रणनीतिक निर्माण और क्षेत्रीय शक्तियों का लाभ उठाने पर प्रकाश डाला। स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन के लिए चुनौती-आधारित फंडिंग (challenge-based funding) से राज्यों के स्तर पर भी कुशलता (efficiencies) आने की उम्मीद है।
फिस्कल हेल्थ से एग्जीक्यूशन को विश्वसनीयता
इस 'एग्जीक्यूशन-हेवी' दृष्टिकोण की विश्वसनीयता (credibility) सार्वजनिक वित्त (public finances) में सुधार से और मजबूत हुई है। JK Paper के चेयरमैन और MD, और पूर्व FICCI प्रेसिडेंट, हर्ष पति सिंघानिया (Harsh Pati Singhania) ने कहा कि डेट-टू-जीडीपी अनुपात (debt-to-GDP ratio) में गिरावट और मजबूत ग्रोथ के आंकड़े सरकार को महत्वपूर्ण वित्तीय स्पेस (fiscal space) दे रहे हैं। यह वित्तीय निश्चितता (fiscal certainty) आज के वैश्विक परिदृश्य में एक दुर्लभ वस्तु है।
विदेशी पूंजी का आकर्षण मुख्य लक्ष्य
घरेलू प्रयासों के अलावा, विदेशी पूंजी (foreign capital) को आकर्षित करना एक प्रमुख प्राथमिकता है। सिंघानिया ने बताया कि अस्थिर वैश्विक वित्तीय प्रवाह (volatile global financial flows) के बीच डेटा सेंटरों और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में विदेशी निवेश के साथ-साथ भारतीय डायस्पोरा (Indian diaspora) से पूंजी जुटाने पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
MSMEs: रोजगार सृजन के इंजन
इंडियन मेटल्स एंड फेरो अलॉयज के MD और पूर्व FICCI प्रेसिडेंट, सुभ्रकांत पांडा (Subhrakant Panda) ने इस बात पर जोर दिया कि घोषणाओं के साथ-साथ एग्जीक्यूशन सर्वोपरि है। उन्होंने सरकार के पिछले ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर विश्वास जताया। पांडा ने कहा कि MSMEs के लिए समर्थन महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे रोज़गार सृजन (job creation) के मुख्य इंजन बने हुए हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स और फाइनेंस पर सेक्टरल फोकस
बजट के सूक्ष्म-स्तरीय (micro-levers) उपाय इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में साफ दिखते हैं। गोयनका ने इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के लिए बढ़े हुए आवंटन और सेमीकंडक्टर मिशन (semiconductor mission) को जारी रखने का उल्लेख किया, जो एक वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी इकोसिस्टम (globally competitive ecosystem) पर निरंतर परिचालन फोकस का संकेत देता है। पूर्व FICCI प्रेसिडेंट, राशेश शाह (Rashesh Shah) ने बॉन्ड मार्केट (bond markets) को मजबूत करने और डेट मार्केट (debt markets) को गहरा करने के उपायों का स्वागत किया, जो क्रेडिट फ्लो (credit flow) को सुचारू बनाने के लिए आवश्यक हैं।
लंबी अवधि के रिफॉर्म्स से बढ़ता विश्वास
नीतियों में किसी बड़े विघटनकारी बदलाव (disruptive policy changes) का न होना एक स्वागत योग्य संकेत था। सोमानी इम्प्रेसा ग्रुप के चेयरमैन और MD, और पूर्व FICCI प्रेसिडेंट, संदीप सोमानी (Sandip Somany) ने कहा कि वित्त मंत्री की एक स्पष्ट रोडमैप (articulated roadmap) के प्रति प्रतिबद्धता, निवेश योजना बनाने में आत्मविश्वास देती है। उन्होंने भारत को 'बहुत अशांत दुनिया में स्वर्ग का एक द्वीप' (an island of paradise in a very turbulent world) बताया। FICCI की कॉर्पोरेट लॉ कमेटी की चेयर, सिरिल श्रॉफ (Cyril Shroff) बजट को एक सतत सुधार यात्रा (ongoing reform journey) का हिस्सा मानते हैं, जो इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा, वित्तीय सेवाओं और प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में विदेशी निवेशकों के लिए भारत की अपील को बढ़ाता है।