Borosil Renewables ने जून तिमाही में **₹86.8 करोड़** का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है, जो पिछले साल के मुकाबले एक बड़ी रिकवरी है। कंपनी के रेवेन्यू में **17.1%** की बढ़ोतरी और बेहतर मार्जिन ने इस टर्नअराउंड में अहम भूमिका निभाई है।
कंपनी के प्रदर्शन में बड़ा सुधार
Borosil Renewables ने 2026 की जून तिमाही के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने ₹86.8 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि में हुए ₹166.5 करोड़ के नेट लॉस से एक बड़ी वापसी है। इस दौरान कंपनी के रेवेन्यू (Revenue) में 17.1% का इजाफा हुआ और यह ₹405.7 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले साल ₹346.6 करोड़ था।
ऑपरेशनल परफॉरमेंस और मार्जिन में ग्रोथ
कंपनी की ऑपरेशनल परफॉरमेंस (Operational Performance) में भी जबरदस्त सुधार देखने को मिला है। EBITDA ₹127.2 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹63.1 करोड़ से दोगुने से भी ज्यादा है। ऑपरेटिंग मार्जिन बढ़कर 31.3% हो गया, जो पहले 18.2% था। यह बढ़त बेहतर कॉस्ट मैनेजमेंट और मजबूत प्राइसिंग पावर का नतीजा है। घरेलू सोलर ग्लास मार्केट को चीन और वियतनाम से आयात पर लगे सरकारी एंटी-डंपिंग ड्यूटी (Anti-Dumping Duty) का फायदा मिला है, जिससे इंपोर्टेड सस्ते प्रोडक्ट्स का दबाव कम हुआ है।
विस्तार योजनाएं और भविष्य का आउटलुक
भविष्य की ग्रोथ को देखते हुए, Borosil Renewables अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी (Production Capacity) को 2027-28 फाइनेंशियल ईयर तक 60% बढ़ाने की योजना बना रही है। कंपनी के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन प्रदीप कुमार खेरका ने बताया है कि नई कैपेसिटी इसी फाइनेंशियल ईयर में प्रोडक्शन शुरू कर सकती है। कंपनी को उम्मीद है कि 2027 के बाकी बचे समय में वॉल्यूम ग्रोथ लगभग 8% रहेगी। इस ग्रोथ को मौजूदा ऑपरेशनल एफिशिएंसी का सपोर्ट मिलेगा।
निवेशकों को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?
हालिया प्रदर्शन में यह सकारात्मक बदलाव एक अच्छा संकेत है, लेकिन निवेशकों को सोलर ग्लास सेक्टर को प्रभावित करने वाले कुछ महत्वपूर्ण कारकों पर नजर रखनी होगी। कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी प्राइसिंग एनवायरनमेंट (Pricing Environment) और एंटी-डंपिंग ड्यूटी जैसी ट्रेड पॉलिसीज (Trade Policies) पर काफी निर्भर करती है। इसके अलावा, कंपनी नई कैपेसिटी जोड़ने के लिए बड़ा कैपिटल स्पेंड (Capital Spend) करने जा रही है, ऐसे में कंपनी की बैलेंस शीट, डेट लेवल्स (Debt Levels) और कैश फ्लो (Cash Flow) पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी नजर रखना अहम होगा। नई परियोजनाओं को समय पर और बिना अतिरिक्त लागत के सफलतापूर्वक शुरू करना, मौजूदा मार्जिन सुधार को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
