Bondada Engineering ने NTPC Renewable Energy Limited के साथ ₹816 करोड़ का एक महत्वपूर्ण कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया है। यह कॉन्ट्रैक्ट राजस्थान के फतेहगढ़ में 600 MW के सोलर फोटोवोल्टिक प्रोजेक्ट के लिए है। इस डील में इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन (EPC) के साथ-साथ 3 साल का ऑपरेशन और मेंटेनेंस भी शामिल है। इस प्रोजेक्ट के बाद कंपनी के सोलर EPC ऑर्डर बुक का कुल आकार बढ़कर लगभग 5.3 GWp हो गया है।
यह बड़ी डील तब आई है जब कंपनी ने हाल ही में फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में 81% की शानदार रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की, जो ₹2,843 करोड़ पर पहुंची, और ₹211 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया। इन मजबूत फाइनेंशियल परफॉरमेंस के बावजूद, सोमवार को Bondada Engineering के शेयरों में 2.87% की गिरावट देखी गई और यह ₹345.10 पर बंद हुए। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹3,967.69 करोड़ है।
यह गिरावट दर्शाती है कि निवेशक सिर्फ ऑर्डर मिलने पर ही नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक और लाभकारी रूप से पूरा करने की क्षमता पर भी ध्यान दे रहे हैं। Bondada Engineering इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी EPC जैसे बेहद प्रतिस्पर्धी सेक्टर में काम करती है। इनपुट कॉस्ट में वृद्धि और कड़े मुकाबले के कारण कंपनियां अक्सर आक्रामक बिडिंग (aggressive bidding) करती हैं, जिससे उनके मार्जिन पर दबाव बनता है। Sterling and Wilson Renewable Energy जैसी बड़ी कंपनियां भी इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रही हैं।
बड़े EPC कॉन्ट्रैक्ट्स में एग्जीक्यूशन रिस्क एक स्वाभाविक चिंता का विषय रहता है। 16 महीने की एग्जीक्यूशन समय-सीमा और NTPC प्रोजेक्ट में जटिल 'बैलेंस ऑफ सिस्टम' (Balance of System) काम, प्रोजेक्ट की प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित कर सकते हैं। NTPC जैसे बड़े क्लाइंट्स पर निर्भरता भी एक तरह का कंसंट्रेशन रिस्क (concentration risk) है। हालांकि, कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो 0.4x के करीब है, जो एक सकारात्मक संकेत है।
31 मार्च, 2026 तक कंपनी के पास कुल ₹7,147 करोड़ का ऑर्डर बुक है, जो भविष्य के रेवेन्यू की अच्छी उम्मीद जगाता है। मैनेजमेंट का अनुमान है कि FY27 में रेवेन्यू 60-70% तक बढ़ सकता है। कंपनी बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स (BESS) जैसे नए क्षेत्रों में भी विस्तार कर रही है। हालांकि, निवेशकों की पैनी नजर मार्जिन की स्थिरता और प्रोजेक्ट्स के कुशल निष्पादन पर टिकी रहेगी।
