डिमांड में वापसी और प्रोजेक्ट्स से चमके नतीजे
Blue Star के Q4 FY26 के नतीजों ने बाजार को राहत दी है। कंपनी के रेवेन्यू में 1.3% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹4,072 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं, नेट प्रॉफिट 17% बढ़कर ₹227.18 करोड़ रहा। यह शानदार प्रॉफिट इसलिए संभव हो पाया क्योंकि अप्रैल के मध्य से रूम एयर कंडीशनर (RAC) की डिमांड में ज़बरदस्त रिकवरी दिखी, पिछले इन्वेंटरी एडजस्टमेंट के बाद यह तेज़ी आई।
EMPS सेगमेंट में ज़बरदस्त ग्रोथ
कंपनी का इलेक्ट्रो-मैकेनिकल प्रोजेक्ट्स (EMPS) सेगमेंट भी मालामाल रहा। इस तिमाही में ऑर्डर इनफ्लो में 35% का जबरदस्त उछाल आया, जिससे EMPS का ऑर्डर बुक बढ़कर ₹4,664 करोड़ हो गया। डेटा सेंटर्स, फैक्ट्रियों और मैन्युफैक्चरिंग साइट्स से मिलने वाले ऑर्डर्स इस ग्रोथ के मुख्य कारण हैं। अनुमान है कि इंडिया का डेटा सेंटर MEP मार्केट अगले तीन सालों में दोगुना से भी ज़्यादा हो जाएगा। 6 मई 2026 तक, Blue Star का शेयर लगभग ₹1,807.35 पर ट्रेड कर रहा था, जिसकी मार्केट कैप करीब ₹37,162 करोड़ थी।
महंगी है Blue Star, जानिए Peers से तुलना
Blue Star के शेयर का वैल्यूएशन इंडस्ट्री के दूसरे प्लेयर्स के मुकाबले काफी महंगा नज़र आ रहा है। कंपनी का पिछले बारह महीनों का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो करीब 71.98-74.67x है, जो भारतीय बिल्डिंग इंडस्ट्री के एवरेज 24.6x से बहुत ज़्यादा है। तुलना करें तो, Competitor Voltas का P/E लगभग 97.74x है, जबकि Daikin Industries का P/E करीब 21.2x है। कंपनी की अनुमानित सालाना अर्निंग ग्रोथ 23.2% के बावजूद, मौजूदा शेयर प्राइस में भविष्य की ग्रोथ का बड़ा हिस्सा पहले से ही शामिल दिख रहा है।
आगे क्या हैं चुनौतियां: मार्जिन पर दबाव और वैल्यूएशन की चिंता
Blue Star के सामने सबसे बड़ी चुनौती मार्जिन पर लगातार बना रहने वाला दबाव है। मैनेजमेंट का अनुमान है कि यह स्थिति 2030 तक जारी रह सकती है। इसकी मुख्य वजह बढ़ती प्रतिस्पर्धा और इंडस्ट्री कैपेसिटी का विस्तार है। इसके अलावा, कॉपर और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स जैसे कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन की दिक्कतें भी प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित कर सकती हैं। EMPS सेगमेंट में ग्रोथ की अच्छी संभावना है, लेकिन इसके मार्जिन 7-7.5% के टारगेट रेंज में रहते हुए भी प्रोजेक्ट मिक्स और प्रतिस्पर्धा के हिसाब से बदल सकते हैं। Blue Star का P/E रेश्यो इसके ऐतिहासिक औसत और इंडस्ट्री पीयर्स से काफी ऊपर है। ऐसे में, शेयर प्राइस को सही ठहराने के लिए अर्निंग्स में लगातार ज़बरदस्त ग्रोथ की ज़रूरत होगी।
