Birla Corporation के सितंबर तिमाही के नतीजे निवेशकों के लिए चिंताजनक रहे हैं। कंपनी के नेट प्रॉफिट में **59%** की भारी गिरावट आई है और यह घटकर **₹37 करोड़** रह गया है, जबकि कंपनी की रेवेन्यू में **9%** की ग्रोथ देखी गई है।
मुनाफे पर दबाव के मुख्य कारण
सितंबर तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन सीमेंट सेक्टर में चल रहे कड़े दबाव को दर्शाता है। जहां कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 9% बढ़कर ₹2,441 करोड़ तक पहुंच गया, वहीं बढ़ते रॉ मटीरियल और ईंधन के खर्चों ने मुनाफे की कमर तोड़ दी।
मार्जिन की स्थिति (Margin Squeeze)
कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती एनर्जी कॉस्ट रही। पेट कोक (Pet Coke) की कीमतों में सालाना आधार पर 64% का बड़ा उछाल आया, जिसका सीधा असर पावर और फ्यूल खर्च पर पड़ा। इसके चलते सीमेंट डिवीजन का EBITDA प्रति टन ₹712 से गिरकर ₹482 रह गया है, और EBITDA मार्जिन 490 बेसिस पॉइंट्स घटकर 9.8% पर सिमट गया है।
सेल्स वॉल्यूम और रियलाइजेशन
कंपनी ने सीमेंट सेल्स वॉल्यूम में 7% की बढ़ोतरी दर्ज की है, जो 4.54 मिलियन टन रहा। कैपेसिटी यूटिलाइजेशन 85% पर स्थिर बनी हुई है। हालांकि, जुलाई और अगस्त के दौरान मुख्य मार्केट्स में सीमेंट की कीमतों में गिरावट देखी गई, जिसने प्रॉफिटेबिलिटी को और मुश्किल बना दिया है।
आगे की रणनीति
कंपनी अब ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर जोर दे रही है। अब कंपनी की कुल बिजली जरूरतों में 32% हिस्सेदारी ग्रीन पावर की हो गई है। साथ ही, मध्य प्रदेश की बिक्रम खदान (Bikram Mine) से कोयला खनन शुरू हो चुका है, जिससे चालू फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही में 1.8 लाख टन कोयले की आपूर्ति मिलने की उम्मीद है।
दूसरी तरफ, कंपनी का जूट डिवीजन मजबूत बना हुआ है। कच्चे माल की किल्लत के बावजूद जूट डिवीजन ने 17% की रेवेन्यू ग्रोथ के साथ ₹155 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया और ₹13.01 करोड़ का कैश प्रॉफिट दर्ज किया है। अब निवेशकों की नजर एनर्जी कीमतों और सीमेंट की कीमतों में स्थिरता पर टिकी रहेगी।
