Q4 में प्रदर्शन और प्रोविजन का असर
Bharat Forge के लिए फाइनेंशियल ईयर 2026 की चौथी तिमाही में नतीजे मिले-जुले रहे। कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 4.5% की बढ़त के साथ ₹2,260 करोड़ दर्ज किया गया। इस टॉप-लाइन ग्रोथ पर एक बड़ा झटका लगा जब इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सब्सिडियरी KPTL में ₹490 करोड़ के निवेश की प्रोविजनिंग (Provision) की गई। इस एकमुश्त चार्ज के कारण एडजस्टेड नेट प्रॉफिट में 28.7% की साल-दर-साल गिरावट आई और यह ₹260 करोड़ पर आ गया। स्टैंडअलोन ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन भी 120 बेसिस पॉइंट घटकर 27.3% रहा।
पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए, कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू 11% बढ़ा और ₹16,811 करोड़ पर पहुंचा, जबकि नेट प्रॉफिट 18% की बढ़त के साथ ₹1,090 करोड़ दर्ज किया गया।
सेगमेंट में बदलाव और एक्सपोर्ट की चुनौतियां
सेगमेंट के हिसाब से देखें तो ऑटो सेगमेंट का रेवेन्यू 7.1% गिर गया, वहीं नॉन-ऑटो रेवेन्यू में 17.5% की शानदार तेजी देखी गई। एक्सपोर्ट रेवेन्यू 12% घटकर ₹1,080 करोड़ रहा, जिसका मुख्य कारण वैश्विक आर्थिक सुस्ती और नॉर्थ अमेरिकन ट्रकिंग में इन्वेंटरी एडजस्टमेंट थे। हालांकि, पिछले क्वार्टर की तुलना में एक्सपोर्ट में 19% की क्वार्टर-ऑन-क्वार्टर बढ़त रिकवरी के संकेत दे रही है। पैसेंजर व्हीकल एक्सपोर्ट, खासकर नॉर्थ और सेंट्रल अमेरिका के लिए, मजबूत बने रहे। एयरोस्पेस एक्सपोर्ट्स इंडस्ट्रियल रेवेन्यू के लिए एक बड़ा बूस्ट रहे, जबकि ऑयल और गैस सेक्टर अभी भी कमजोर बना हुआ है।
एयरोस्पेस, डिफेंस और EV पर फोकस
डिफेंस सेक्टर में FY2027 के दूसरी छमाही से बड़े स्तर पर ग्रोथ की उम्मीद है, जिसमें ATAGS और CQB कार्बाइन्स के ऑर्डर्स शामिल हैं। FY26 के अंत तक डिफेंस ऑर्डर बुक ₹11,000 करोड़ पर थी, जो कंपनी को मल्टी-ईयर रेवेन्यू विजिबिलिटी दे रही है।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (EV) के क्षेत्र में, Bharat Forge ने ₹130 करोड़ में Fortuna Engineering में 30% हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया है। Fortuna Engineering, जिसने FY25 में ₹322 करोड़ का रेवेन्यू कमाया था, ऑटोमोटिव और ऑफ-हाईवे एप्लिकेशन्स के लिए मशीनिंग में माहिर है। इस एक्विजिशन से Bharat Forge की मशीनिंग क्षमताओं को बढ़ावा मिलेगा। इसकी सब्सिडियरी JS Autocast ने FY26 में ₹760 करोड़ रेवेन्यू और ₹100 करोड़ का प्रॉफिट दर्ज किया।
कंसॉलिडेशन और भविष्य का आउटलुक
Q4 FY26 में कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू 17.5% बढ़कर ₹4,530 करोड़ रहा। हालांकि, बढ़ी हुई डेप्रिसिएशन, ब्याज लागत और नई क्षमताओं में निवेश के कारण कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 17% घटकर ₹233 करोड़ हो गया। ओवरसीज सब्सिडियरीज के मार्जिन में सुधार देखा गया, जिसमें यूरोपीय कंपनियों के मार्जिन 350 बेसिस पॉइंट बढ़कर 4.7% हो गए।
FY27 के लिए, मैनेजमेंट ने भारतीय ऑपरेशन्स में 25% रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान लगाया है, बशर्ते भू-राजनीतिक (Geopolitical) स्थितियां स्थिर रहें। इस ग्रोथ का नेतृत्व मुख्य रूप से एयरोस्पेस, उसके बाद डिफेंस और ऑटो कंपोनेंट्स द्वारा किया जाएगा।
वैल्यूएशन संबंधी चिंताएं और बेयर केस
कंपनी के डाइवर्सिफिकेशन एफर्ट्स के बावजूद, भू-राजनीतिक तनाव एक महत्वपूर्ण जोखिम बना हुआ है। स्टॉक में हालिया उछाल, जिसने 8 मई, 2026 को ₹2,029.50 का 52-हफ्ते का हाई छुआ, बाज़ार के बड़े आशावाद को दर्शाता है। लेकिन, कंपनी का वैल्यूएशन FY27 के अनुमानित अर्निंग्स पर 56x के मल्टीपल पर ट्रेड कर रहा है। यह FY21-FY25 के औसत P/E (Price-to-Earnings Ratio) 28.8x से काफी ऊपर है, जिससे यह महंगा लग रहा है।
कुछ एनालिस्ट्स ने 'Sell' रेटिंग जारी की है, जिनकी प्राइस टारगेट ₹1,730 तक है, और बेयर केस टारगेट ₹820 तक का सुझाव दिया है। KPTL के लिए प्रोविजनिंग EV जैसे उभरते सेक्टर्स में जोखिमों को उजागर करती है, जहां ग्लोबल एडॉप्शन की गति असमान है।
जहाँ डिफेंस सेक्टर सरकारी खर्च में बढ़ोत्तरी और 'आत्मनिर्भरता' पर जोर के कारण ग्रोथ के लिए तैयार है, वहीं Bharat Forge का पारंपरिक ऑटो सेक्टर FY27 में धीमी 3-6% ग्रोथ देखने की उम्मीद है। ऑटो सहायक (Auto Ancillary) कंपनियां आमतौर पर 40x P/E से नीचे ट्रेड करती हैं, जिससे Bharat Forge का मौजूदा वैल्यूएशन असमान लगता है।
एनालिस्ट्स की राय मिली-जुली है; कुछ 'Hold' या 'Neutral' स्टान्स पर हैं, जबकि अन्य 'Buy' रेटिंग बनाए हुए हैं और उनका औसत टारगेट प्राइस ₹1,991.33 के आसपास है।
