Bharat Forge के Q3 FY26 के नतीजों ने मार्केट में हलचल मचा दी है, और इसके शेयर को लेकर एनालिस्ट्स के बीच दो बिल्कुल अलग राय बन गई हैं। कुछ ब्रोकरेज फर्म इसे खरीदने की सलाह दे रही हैं, जबकि कुछ इसे बेचने के पक्ष में हैं। यह मतभेद कंपनी के भविष्य के ग्रोथ आउटलुक को लेकर है।
Q3 के आंकड़े क्या कहते हैं?
कंपनी ने दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही में ₹273 करोड़ का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि से 28% ज्यादा है। वहीं, कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू 25% की छलांग लगाकर ₹4,343 करोड़ पर पहुँच गया, जो कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा तिमाही रेवेन्यू है। इस ग्रोथ का मुख्य सहारा डोमेस्टिक ऑटोमोटिव बिजनेस और डिफेंस ऑर्डर बुक का शानदार एग्जीक्यूशन रहा। डिफेंस सेगमेंट का रेवेन्यू तो 102.4% तक उछल गया। हालांकि, इन शानदार टॉप-लाइन गेन्स के बावजूद, कंसॉलिडेटेड EBITDA मार्जिन 18% से घटकर 17.3% पर आ गया, जो इनपुट कॉस्ट प्रेशर या प्राइसिंग की चुनौतियों का संकेत देता है। वहीं, स्टैंडअलोन बेस पर परफॉरमेंस थोड़ी कमजोर रही, जहां लेबर कोड इम्प्लीमेंटेशन से जुड़े एक-मुश्त खर्चों के कारण नेट प्रॉफिट 16.8% घटकर ₹288 करोड़ रह गया।
Jefferies का 'Buy' कॉल, Citi का 'Sell'
ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस Jefferies ने इस परफॉरमेंस को देखते हुए स्टॉक पर अपना भरोसा जताया है और इसे 'Buy' रेटिंग के साथ अपग्रेड किया है। उन्होंने शेयर का टारगेट प्राइस ₹2,150 रखा है, जो मौजूदा स्तरों से 24% का अपसाइड दिखाता है। Jefferies का मानना है कि कंपनी का ऑपरेशनल आउटलुक सुधर रहा है और डिफेंस सेक्टर की मजबूती इसे आगे ले जाएगी।
दूसरी ओर, Citi ने 'Sell' रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस ₹930 रखा है। Citi का तर्क है कि मौजूदा वैल्यूएशन (लगभग 49x और 40x FY27 और FY28 के कंसेंसस P/E पर) पहले से ही कंपनी के सभी पॉजिटिव्स को प्राइस-इन कर चुका है। ऐसे में, आगे ज्यादा ग्रोथ की गुंजाइश कम है और शेयर में गिरावट का रिस्क बना हुआ है।
वैल्यूएशन और सेक्टर का मिला-जुला असर
Bharat Forge का शेयर फिलहाल प्रीमियम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है। 12 फरवरी, 2026 तक इसका ट्रेलिंग ट्वेल्व-मंथ P/E रेशियो लगभग 74x के आसपास था, जो ऑटो कंपोनेंट सेक्टर के कई दूसरे खिलाड़ियों के मुकाबले काफी ज्यादा है। कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) भी 12.80% है, जो कुछ कॉम्पिटिटर्स से पीछे है।
कंपनी के परफॉरमेंस पर सेक्टर की मिली-जुली चाल का असर दिख रहा है। भारत का ऑटोमोटिव मार्केट 2026 तक 300 बिलियन डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद है और FY26 के लिए 8% ग्रोथ का अनुमान है। डोमेस्टिक ऑटो कंपोनेंट सेक्टर भी मजबूत दिख रहा है। लेकिन, एक्सपोर्ट सेगमेंट चुनौतियों का सामना कर रहा है। Q3 FY26 में एक्सपोर्ट रेवेन्यू 21% गिर गया, खासकर अमेरिका से शिपमेंट में आई कमी के चलते। मैनेजमेंट ने नॉर्थ अमेरिका ट्रक सेगमेंट में 51% की गिरावट की बात कही है, जो डी-स्टॉकिंग का नतीजा है।
इसके विपरीत, डिफेंस सेक्टर में ग्लोबल लेवल पर तेजी बनी हुई है। बढ़ते डिफेंस स्पेंडिंग के चलते Bharat Forge के डिफेंस बिजनेस को फायदा हो रहा है। कंपनी को हाल ही में कई बड़े ऑर्डर मिले हैं, जिसमें एक महत्वपूर्ण CQB कार्बाइन कॉन्ट्रैक्ट भी शामिल है।
एनालिस्ट्स की चिंताओं और उम्मीदों का सार
Citi की सतर्क राय के पीछे कई वजहें हैं। एक्सपोर्ट रेवेन्यू में आई भारी गिरावट, खासकर नॉर्थ अमेरिका से, सीधा प्रॉफिटेबिलिटी पर असर डाल रही है। इसके अलावा, EBITDA मार्जिन में आई कमी (Margin Compression) लागतें बढ़ाने और प्रॉफिट कम करने का संकेत देती है। हाई वैल्यूएशन मल्टीपल्स, जो ऐतिहासिक एवरेज और पीयर्स के मुकाबले महंगे लगते हैं, अगर ग्रोथ की उम्मीदें पूरी नहीं हुईं तो शेयर में बड़ा डाउनसाइड दिखा सकते हैं। दुनिया भर में ऑटो इंडस्ट्री जियोपॉलिटिकल टेंशन, ट्रेड वॉर, चिप की कमी और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) ट्रांजिशन जैसी मुश्किलों का सामना कर रही है।
दूसरी ओर, मैनेजमेंट का भरोसा है कि 'कंपनी के बुरे दिन पीछे छूट चुके हैं'। चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर बाबा कल्याणी को Q4 FY26 और FY27 में डोमेस्टिक और एक्सपोर्ट दोनों बाजारों से अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है। Jefferies का अनुमान है कि FY26-28 के दौरान अर्निंग्स ग्रोथ 33% CAGR से बढ़ेगी, जो FY24-26 के 12% के मुकाबले काफी ज्यादा है। यह ग्रोथ US ट्रक साइकिल के बॉटमिंग आउट, भारतीय ट्रक डिमांड में सुधार और डिफेंस सेक्टर से मिलने वाले बूस्ट से आएगी। कंपनी का मजबूत डिफेंस ऑर्डर बुक और FY27 की दूसरी छमाही में ATAGS एग्जीक्यूशन की शुरुआत इस सेगमेंट में हाई डबल-डिजिट ग्रोथ का रास्ता साफ कर रही है।