Balmer Lawrie & Company ने अपने लॉजिस्टिक्स और रेल फ्रेट कारोबार को विस्तार देने के लिए अगले तीन सालों में **₹500 करोड़** के निवेश का ऐलान किया है। कंपनी अपनी रेल रेक (rail rake) संख्या को **3** से बढ़ाकर **15** करेगी और **10 लाख स्क्वायर फीट** की वेयरहाउसिंग क्षमता जोड़ेगी।
लॉजिस्टिक्स में धाक जमाने की तैयारी
अपनी पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग इमेज से आगे बढ़ते हुए Balmer Lawrie अब सर्विस और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में अपनी पैठ मजबूत कर रही है। कंपनी का लक्ष्य अपने रेल फ्रेट नेटवर्क को तेजी से बड़ा बनाना है, जिसके तहत रेल रेक की संख्या को 3 से बढ़ाकर 15 किया जाएगा। यह काम लीजिंग और नई परिसंपत्तियों की खरीद के जरिए होगा, जिससे सप्लाई चेन में बेहतर नियंत्रण और रिलायबिलिटी सुनिश्चित हो सकेगी।
वेयरहाउसिंग का जाल और ट्रेवल यूनिट का बंटवारा
थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स (3PL) के तहत कंपनी डानकुनी (Dankuni) के बाद सिलीगुड़ी, गुवाहाटी और भुवनेश्वर जैसे केंद्रों पर नए स्पोक्स बना रही है। इसका मुख्य लक्ष्य पूर्वी भारत में 10 लाख स्क्वायर फीट के वेयरहाउसिंग स्पेस का निर्माण करना है।
वहीं, कंपनी ने अपनी ट्रेवल और टिकटिंग यूनिट के लिए एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। इसे एक अलग सब्सिडियरी के रूप में स्पिन-ऑफ किया जा रहा है। इस कदम का मकसद मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस की कठोर नीतियों से ट्रेवल यूनिट को मुक्त करना है, ताकि वहां हायरिंग और मैनेजमेंट में फ्लेक्सिबिलिटी बनी रहे।
निवेशकों के लिए क्या हैं जोखिम?
इन्वेस्टर नजरिए से यह कैपिटल एलोकेशन में बड़ा बदलाव है। हालांकि लॉजिस्टिक्स सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बहुत ज्यादा है, इसलिए 10 लाख स्क्वायर फीट के वेयरहाउसिंग प्रोजेक्ट्स का समय पर पूरा होना सबसे जरूरी होगा। किसी भी तरह की जमीन अधिग्रहण में देरी प्रोजेक्ट की लागत बढ़ा सकती है। भविष्य में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि नई सब्सिडियरी के गठन से मार्जिन में कितना सुधार आता है और रेल ऑपरेशंस को कितनी तेजी से स्केल किया जाता है।
