कंपनी का नया प्लान
Bajaj Electricals ने अब केबल बिजनेस में उतरने का ऐलान किया है। इसे अपने लाइटिंग सॉल्यूशंस सेगमेंट के तहत ही चलाया जाएगा। कंपनी का मकसद घरेलू केबल मार्केट में अपनी जगह बनाना है, जिसकी कुल मार्केट वैल्यू करीब ₹18,000 करोड़ है। मैनेजमेंट का कहना है कि यह उनके लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के लिए बहुत ज़रूरी है। 2.5 लाख से ज्यादा रिटेल टचपॉइंट्स के साथ, यह कदम कंपनी को सिर्फ लाइटिंग बनाने वाली कंपनी से एक कम्प्लीट इलेक्ट्रिकल सॉल्यूशन प्रोवाइडर बनाएगा। केबल और वायर्स इंडस्ट्री का लगभग 25% हिस्सा इस नए वेंचर से कवर होने की उम्मीद है।
मुश्किल आर्थिक हालात
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कंपनी भारी आर्थिक दबाव झेल रही है। Bajaj Electricals पिछले 4 लगातार तिमाहियों से घाटे में चल रही है। मार्च 2026 में खत्म हुई तिमाही में कंपनी को ₹67.53 करोड़ का नेट लॉस हुआ। पिछले साल के मुकाबले यह परफॉर्मेंस काफी खराब है। कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹3,500 करोड़ है और शेयर पर बिकवाली का भारी दबाव है। हाल ही में शेयर ₹303.5 के 52-हफ्ते के लो पर पहुंच गया था। सभी बड़े मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा यह शेयर पिछले साल की तुलना में 50% से भी ज्यादा गिर चुका है। इससे निवेशकों में चिंता है कि क्या कंपनी मौजूदा मुश्किलों से निकल पाएगी।
कॉम्पिटिशन का माहौल
Bajaj Electricals ऐसी मार्केट में उतर रही है जहां Polycab India, KEI Industries, और Finolex Cables जैसे बड़े खिलाड़ी पहले से मज़बूत हैं। इन कंपनियों ने लगातार अच्छे मार्जिन और मजबूत मैन्युफैक्चरिंग के दम पर अपनी पकड़ बनाई हुई है। हालांकि, केबल और वायर्स इंडस्ट्री में 10-12% CAGR की ग्रोथ का अनुमान है, लेकिन कॉम्पिटिशन बहुत टफ है। इन कंपनियों के पास पहले से ब्रांड वैल्यू और ऑपरेटिंग एफिशिएंसी है, जिसे Bajaj Electricals को टक्कर देनी होगी। कंपनी का कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) को लेकर सतर्क रुख यह दिखाता है कि वे धीरे-धीरे कदम बढ़ाएंगे, जबकि बाकी कंपनियां तेजी से क्षमता बढ़ा रही हैं।
रिस्क और भविष्य की राह
कंपनी के सामने मार्जिन का दबाव और नॉन-ऑपरेटिंग इनकम पर निर्भरता जैसी बड़ी चुनौतियां हैं। पहले इंजीनियरिंग और प्रोजेक्ट्स (E&P) बिजनेस पर निर्भरता मुनाफे पर भारी पड़ी थी। अब कंपनी हाई-मार्जिन वाले कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की ओर बढ़ रही है, लेकिन इसका असर अभी तक बॉटम लाइन पर नहीं दिखा है। निवेशक कमाई में गड़बड़ी से डर रहे हैं, क्योंकि पहले भी ऐसी गड़बड़ियों से शेयर में भारी गिरावट आई है। इस नए चैप्टर में कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती टर्नअराउंड को एग्जीक्यूट करना है, खासकर उन प्लेयर्स के खिलाफ जिनके पास बेहतर प्राइसिंग पावर और सप्लाई चेन है। भविष्य की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी कैपिटल एलोकेशन में कितनी Discipline बनाए रखती है और यह साबित कर पाती है कि नया वर्टिकल उसके कंसोलिडेटेड मुनाफे को बढ़ा सकता है।
