BLS International: वीजा डील्स की बहार! प्रॉफिट 35% उछला, पर शेयर क्यों गिरा?
Overview
BLS International Services Ltd. ने तीसरी तिमाही (Q3) के नतीजे जारी किए हैं, और कंपनी के नेट प्रॉफिट में **34.8%** का शानदार इजाफा हुआ है। यह बढ़त **₹162.7 करोड़** तक पहुंची है, जबकि कंपनी का रेवेन्यू भी **43.6%** बढ़कर **₹736.5 करोड़** हो गया। इस दमदार परफॉरमेंस के पीछे कई बड़ी ग्लोबल वीजा और आधार प्रोसेसिंग डील्स का हाथ है।
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मुनाफे और रेवेन्यू में दमदार उछाल
कंपनी ने इस फाइनेंशियल ईयर की तीसरी तिमाही में अपने प्रदर्शन से निवेशकों को खुश कर दिया है। BLS International Services Ltd. ने ₹162.7 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 34.8% ज्यादा है। कंपनी की कुल आय (Revenue) भी 43.6% की छलांग लगाकर ₹736.5 करोड़ पर पहुंच गई, जो पिछले साल ₹513 करोड़ थी। इतना ही नहीं, कंपनी का EBITDA भी 25% बढ़कर ₹198 करोड़ रहा।
बड़ी डीलों ने बढ़ाई कंपनी की शान
इस शानदार वित्तीय नतीजों का मुख्य कारण कंपनी को मिली बड़ी डीलें हैं। BLS International ने स्लोवाक रिपब्लिक के लिए 80 से ज्यादा देशों में वीजा एप्लीकेशन सेंटर स्थापित करने का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट जीता है। इसके अलावा, साइप्रस गणराज्य के हाई कमीशन के साथ भी अफ्रीका और एशिया (जैसे चीन, कजाकिस्तान) में वीजा आउटसोर्सिंग के समझौते हुए हैं। घरेलू मोर्चे पर, मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स (MEA) से चीन में इंडियन वीजा एप्लीकेशन सेंटर्स के लिए तीन साल का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। वहीं, बिहार सरकार ने आधार एनरोलमेंट सेंटर्स के लिए ₹100 करोड़ की डील दी है, और UIDAI से आधार सेवा केंद्रों के लिए ₹2,055.35 करोड़ का एक और बड़ा ऑर्डर मिला है।
मार्जिन पर थोड़ा दबाव
हालांकि, इतनी बड़ी ग्रोथ के बावजूद, कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर थोड़ा दबाव देखा गया है। EBITDA मार्जिन 390 बेसिस पॉइंट घटकर 26.9% पर आ गया है, जो पिछले साल की समान तिमाही में 30.8% था। इसका मतलब है कि प्रति रुपये आय पर कंपनी की कमाई थोड़ी कम हुई है, जो शायद बढ़ी हुई लागत या कीमत में बदलाव के कारण हो सकता है।
शेयर बाजार की प्रतिक्रिया
नतीजों के जारी होने के बाद, शेयर बाजार में BLS International के स्टॉक पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखी गई। शुक्रवार को बाजार बंद होने पर शेयर 3.03% की गिरावट के साथ ₹291 पर बंद हुआ। यह गिरावट दर्शाती है कि निवेशकों ने मजबूत टॉप-लाइन ग्रोथ और बड़ी डीलों के बावजूद मार्जिन में आई कमी पर ज्यादा ध्यान दिया।