BHEL का ग्लोबल प्लान
भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) अब इंटरनेशनल इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स पर अपना फोकस बढ़ा रही है। हाल ही में Dangote Petroleum Refinery से $2.5 अरब का कॉन्ट्रैक्ट मिलना इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। यह डील सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि BHEL की $2.5 अरब के बड़े गैस टरबाइन प्रोजेक्ट्स को विदेशी धरती पर पूरा करने की क्षमता का इम्तिहान भी है। भले ही डोमेस्टिक थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स कंपनी का मुख्य आधार हैं, लेकिन मैनेजमेंट डोमेस्टिक सरकारी टेंडरों में धीमी गति को देखते हुए, ज़्यादा मुनाफे वाले इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स की ओर बढ़ रहा है।
Rajesh Exports की मुश्किल?
SEBI का Rajesh Exports के खिलाफ हालिया एक्स-पार्टी ऑर्डर कोई मामूली कार्रवाई नहीं है। रेगुलेटर्स ने कंपनी पर ₹15.15 लाख करोड़ के रेवेन्यू में हेराफेरी का आरोप लगाया है। यह रकम इतनी बड़ी है कि पिछले चार सालों का लगभग पूरा रेवेन्यू ही काल्पनिक लगता है। निवेशकों के लिए यह एक बहुत बड़ा रेड फ्लैग है। अब कंपनी के फंड ट्रांसफर के तरीकों की फोरेंसिक जांच ज़रूरी हो गई है। साथ ही, कंपनी के चेयरमैन राजेश मेहता को स्टॉक ट्रेड करने से रोकने का मतलब है कि SEBI को और बड़ी हलचल की उम्मीद है। यह जांच कंपनी की बैलेंस शीट की इंटीग्रिटी पर सीधा हमला है, जिससे यह गोल्ड और ज्वेलरी एक्सपोर्ट सेक्टर में अपने बाकी प्लेयर्स के मुकाबले मुश्किल स्थिति में आ गई है।
इंडस्ट्री का मिजाज: सेक्टरों में बढ़ता फासला
जहां बाज़ार इन बड़ी खबरों को पचा रहा है, वहीं इंडस्ट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर की डिमांड के बारे में दूसरी जानकारी एक बड़ा ट्रेंड दिखा रही है। JBM Auto का मई में इलेक्ट्रिक बस सेगमेंट में 49% मार्केट शेयर हासिल करना, क्लीन पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तरफ डोमेस्टिक बदलाव का एक क्लियर विनर दिखाता है। वहीं, Indiabulls का ₹19.40 प्रति शेयर पर कैपिटल जुटाना - जो हाल के बाज़ार के टॉप लेवल से काफी कम है - बताता है कि मैनेजमेंट आक्रामक विस्तार के बजाय बैलेंस शीट को मजबूत करने की अर्जेंट ज़रूरत में है। इसके साथ ही, Lenskart और GMR Airports में हुए बड़े ब्लॉक डील्स, इंस्टीटूशनल लिक्विडिटी में बदलाव की ओर इशारा करते हैं। शुरुआती दौर के प्राइवेट इक्विटी इन्वेस्टर्स Fidelity और Goldman Sachs जैसे बड़े ग्लोबल फंड्स को बड़े स्टेक बेच रहे हैं, जो वेंचर-कैपिटल से मैच्योरिटी-लेड इंस्टीटूशनल होल्डिंग में ट्रांज़िशन का संकेत देता है।
आगे क्या?
एनालिस्ट्स Rajesh Exports के ऑडिट के नतीजों को लेकर सतर्क हैं, क्योंकि आरोपों की विशालता के कारण स्टॉक की वैल्यूएशन पर स्थायी असर पड़ सकता है। वहीं, अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए BHEL के ऑर्डर बुक की क्वालिटी पर फोकस रहेगा। बाज़ार के प्रतिभागी यह देखने के लिए बारीकी से नज़र रखेंगे कि क्या इंटरनेशनल प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन, कच्चे माल की कीमतों पर ग्लोबल महंगाई के दबाव के बीच मार्जिन को बनाए रख सकता है।
