NTPC से मिले ऑर्डर की पूरी जानकारी
Bharat Heavy Electricals Ltd. (BHEL) को NTPC से तेलंगाना स्टेज-II सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए यह ₹13,500 करोड़ का ऑर्डर मिला है। यह कॉन्ट्रैक्ट 30 मार्च, 2026 को कन्फर्म हुआ है। इसमें मुख्य प्लांट के कॉम्पोनेंट्स के डिजाइन, इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई, इरेक्शन, कमिशनिंग और टेस्टिंग शामिल है। यह ऑर्डर NTPC के तेलंगाना के पेद्दापल्ली जिले में स्थित 3x800 MW तेलंगाना स्टेज-II प्रोजेक्ट के लिए है। प्रोजेक्ट को अवार्ड डेट से 62 महीने में पूरा करने का शेड्यूल है। कॉन्ट्रैक्ट में बॉयलर, टरबाइन और जेनरेटर (BTG) सप्लाई और सिविल वर्क शामिल हैं। BHEL को अक्टूबर 2024 में ही सफल बिडर चुना गया था और अब जाकर फाइनल अप्रूवल मिला है।
शेयर में क्यों नहीं आई तेजी?
इतने बड़े ऑर्डर की खबर के बावजूद, 30 मार्च, 2026 को BHEL के शेयर में मामूली गिरावट देखने को मिली। शेयर पिछले क्लोजिंग से 0.78% गिरकर लगभग ₹252.85 पर ट्रेड कर रहा था। यह मार्केट का रिएक्शन बताता है कि निवेशक इस ऑर्डर के असर को पूरी तरह से तवज्जो नहीं दे रहे हैं, या फिर वे दूसरी चिंताओं पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
वैल्युएशन और पीयर कंपनियों से तुलना
BHEL के वैल्युएशन मेट्रिक्स, खासकर इसके प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो को लेकर मार्केट में चर्चा तेज है। मार्च 2026 के अंत तक, BHEL का P/E रेश्यो 110-116 के बीच था, जो इसके पिछले औसत से काफी ज्यादा है। यह रेश्यो इसे इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स सेक्टर की टॉप 11% कंपनियों में रखता है। वहीं, अगर इसकी पीयर कंपनियों जैसे Thermax को देखें तो उसका P/E रेश्यो करीब 30 है, जबकि L&T और Siemens जैसी कंपनियों का वैल्युएशन इससे भी ज्यादा है, शायद उनके बड़े बिजनेस और भरोसेमंद एग्जीक्यूशन ट्रैक रिकॉर्ड के कारण। बता दें कि BHEL के शेयर पहले भी बड़े ऑर्डर्स पर अप्रत्याशित तरीके से रिएक्ट कर चुके हैं। जैसे, जनवरी 2026 में ₹5,400 करोड़ के ऑर्डर के बाद शेयर चढ़ा था, लेकिन फरवरी 2026 में ₹2,800 करोड़ के ऑर्डर के बावजूद स्टॉक 6% गिर गया था, जिसका कारण सरकारी ऑफर फॉर सेल (OFS) को माना गया था।
एनर्जी ट्रांजिशन और थर्मल पावर का भविष्य
भारत जिस तरह से रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) की ओर बढ़ रहा है, उससे थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स का भविष्य अनिश्चित लग रहा है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक 500 GW रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता हासिल करना है। ऐसे में, नए कोल पावर कैपेसिटी की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि, भारत की एनर्जी डिमांड बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन फोकस क्लीन एनर्जी पर है। BHEL इस चुनौती को समझते हुए रिन्यूएबल एनर्जी और ट्रांसपोर्टेशन जैसे सेक्टर्स में भी अपनी पैठ बढ़ा रही है। कंपनी वंदे भारत ट्रेन के मेंटेनेंस के लिए एक ज्वाइंट वेंचर (Joint Venture) पर भी काम कर रही है। इसके बावजूद, BHEL के ऑर्डर बुक का 80% हिस्सा अभी भी पावर सेक्टर से आता है।
निवेशकों के लिए अहम जोखिम और एनालिस्ट्स की राय
BHEL के पास Q3FY26 तक लगभग ₹2.23 लाख करोड़ का बड़ा ऑर्डर बुक है। लेकिन निवेशकों को कुछ रिस्क पर भी ध्यान देना चाहिए। 110 से ऊपर का P/E रेश्यो एक पब्लिक सेक्टर फर्म के लिए ज्यादा लग सकता है, खासकर तब जब कंपनी को कंसिस्टेंट प्रॉफिटेबिलिटी और ग्रोथ में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन आमतौर पर सिंगल डिजिट में होते हैं और रिटर्न ऑन कैपिटल मार्जिनल है, जो ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर सवाल खड़े करता है। रिन्यूएबल एनर्जी पर भारत का जोर थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स के लिए अनिश्चितता पैदा करता है। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में देरी और लागत बढ़ने का जोखिम भी बना रहता है। फरवरी 2026 में सरकार द्वारा 5% स्टेक ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचे जाने से भी स्टॉक की ऊपर जाने की क्षमता सीमित हो सकती है।
एनालिस्ट्स की राय को देखें तो वे आम तौर पर BHEL को लेकर पॉजिटिव हैं। कई एनालिस्ट्स ने ₹343 और ₹375 जैसे प्राइस टारगेट दिए हैं, और 'Moderate Buy' या 'Buy' रेटिंग दी है। Motilal Oswal जैसी ब्रोकरेज फर्म ने तो ₹520 का टारगेट प्राइस भी सेट किया है। BHEL भी डिफेंस, रिन्यूएबल और ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर्स में डायवर्सिफाई करके 2030 तक इन नए सेगमेंट्स से 50% से ज्यादा रेवेन्यू कमाने की कोशिश कर रही है।