14 साल का रिकॉर्ड क्यों टूटा?
BHEL के शेयर ₹339 पर पहुंच गए हैं, जो कि 14 साल से भी ज्यादा समय में सबसे ऊंचा स्तर है। पिछले 12 ट्रेडिंग सेशन में स्टॉक में 38% का उछाल आया है, जबकि इसी दौरान BSE Sensex में 0.94% की गिरावट देखी गई। यह कीमत कंपनी के फरवरी 2026 के ऑफर फॉर सेल (OFS) प्राइस ₹255.30 से 33% ज्यादा है। निवेशकों का भरोसा इस शेयर पर खूब दिख रहा है। मार्च 2026 क्वार्टर में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने अपनी हिस्सेदारी 6.3% से बढ़ाकर 7.2% कर दी, जबकि डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने इसे 19.7% से बढ़ाकर 23.98% कर लिया। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 में कंपनी के पास ₹2.5 ट्रिलियन से ज्यादा का ऑर्डर बुक है और फाइनेंशियल ईयर 27 से 29 के बीच 24GW के नए प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में हैं।
चीन से सस्ता आयात बढ़ाएगा मार्जिन
इस तेजी की एक बड़ी वजह सरकार की वो नई नीति है, जिसने BHEL को चीन से 21 जरूरी इनपुट मटेरियल, जैसे CRGO कॉइल्स और सीमलेस पाइप्स, इंपोर्ट करने की इजाजत दे दी है। पहले 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत पश्चिमी देशों से महंगे इंपोर्ट करने पड़ते थे। एनालिस्ट्स का मानना है कि इससे प्रोजेक्ट्स तेजी से पूरे होंगे और कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) में काफी इजाफा होगा। JM Financial का कहना है कि यह रणनीति मार्जिन सुधारने और पिछली लागत व एग्जीक्यूशन (Execution) की दिक्कतों को दूर करने में मददगार होगी। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 26 के लिए BHEL का EBITDA ₹1,600 करोड़ से ₹1,800 करोड़ तक पहुंच सकता है, और EBITDA मार्जिन फाइनेंशियल ईयर 26 के पहले नौ महीनों के 2.7% से बढ़कर 5%-6% हो जाएगा। इसमें फिक्स्ड कॉस्ट का बेहतर इस्तेमाल और पुराने, कम प्रॉफिट वाले ऑर्डर्स का पूरा होना भी शामिल है।
न्यूक्लियर एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर से बड़ी उम्मीदें
BHEL को भारत के न्यूक्लियर एनर्जी पर बढ़ते फोकस से भी फायदा होने की उम्मीद है। देश का लक्ष्य 2047 तक 100GW न्यूक्लियर कैपेसिटी हासिल करना है। न्यूक्लियर एनर्जी मिशन और SHANTI एक्ट जैसे सरकारी कदम BHEL और इसके प्रतिद्वंद्वी Larsen & Toubro (L&T) के लिए ग्रोथ के बड़े मौके खोल रहे हैं। वहीं, Larsen & Toubro (L&T) और Power Grid Corporation जैसे साथियों के मुकाबले, BHEL का वैल्यूएशन (Valuation) इस रैली के दौरान काफी बढ़ा है, जो इन लॉन्ग-टर्म ग्रोथ फैक्टर्स की उम्मीद को दर्शाता है। सरकार के बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और पावर सेक्टर में रिन्यूएबल एनर्जी के साथ-साथ पारंपरिक ऊर्जा की मांग BHEL के लिए सकारात्मक माहौल बना रही है।
वैल्यूएशन की चिंताएं और संभावित जोखिम
हालांकि, शेयर की तेज उछाल और पॉलिसी बदलावों के चलते BHEL का वैल्यूएशन काफी ऊपर चला गया है, जो शायद कमाई की टिकाऊ ग्रोथ से आगे निकल गया हो। चीन से मटेरियल इंपोर्ट करने में भले ही अभी लागत कम हो, लेकिन इसमें जियो-पॉलिटिकल (Geopolitical) और सप्लाई चेन (Supply Chain) के जोखिम जुड़े हो सकते हैं। बड़े और कॉम्प्लेक्स प्रोजेक्ट्स को मैनेज करने में BHEL का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड जांच के दायरे में रहा है, और किसी भी एग्जीक्यूशन में गड़बड़ी या देरी से निवेशकों का भरोसा तुरंत कम हो सकता है। कई डायवर्सिफाइड इंजीनियरिंग फर्मों के विपरीत, BHEL का मुख्य बिजनेस सरकारी कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) और पॉलिसी सपोर्ट से सीधे जुड़ा हुआ है, जो इसे राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में बदलाव या आर्थिक मंदी के प्रति संवेदनशील बनाता है। पुराने ऑर्डर्स, जो अब पूरे हो रहे हैं, वो भी प्रॉफिटेबिलिटी और वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट (Working Capital Management) में पिछली चुनौतियों का संकेत देते हैं। इनपुट कॉस्ट में उतार-चढ़ाव या प्रोजेक्ट की समय-सीमा बढ़ने से मार्जिन पर दबाव बन सकता है।
आगे का रास्ता और वैल्यूएशन पर नजर
आगे चलकर, BHEL अपने बड़े ऑर्डर बुक और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट व एनर्जी सिक्योरिटी, खासकर न्यूक्लियर पावर पर सरकार के फोकस के दम पर ग्रोथ जारी रखने की उम्मीद है। ज्यादातर एनालिस्ट्स अभी भी पॉजिटिव बने हुए हैं, लेकिन शेयर की मौजूदा ऊंची कीमत को देखते हुए नई खरीदारी के मौके तलाशते वक्त सावधानी बरतना जरूरी होगा। BHEL के लिए अपने ऑर्डर पाइपलाइन को प्रॉफिटेबल रेवेन्यू में बदलना, प्रोजेक्ट की जटिलताओं को संभालना और इंपोर्ट रूल्स में संभावित बदलावों का सामना करना, मीडियम से लॉन्ग टर्म में अपनी मार्केट पोजीशन बनाए रखने और मौजूदा प्रीमियम वैल्यूएशन को सही ठहराने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
