हिस्सेदारी बिक्री के बाद शेयर बाज़ार की प्रतिक्रिया
सरकार की हिस्सेदारी बिक्री (Offer for Sale - OFS) पूरी होने के बाद Bharat Heavy Electricals Limited (BHEL) के शेयरों में आज तेज़ी देखी गई। 16 फरवरी 2026 को, BSE Sensex के 0.21% की बढ़त के मुकाबले BHEL का शेयर करीब 0.84% चढ़कर ₹257.85 पर कारोबार कर रहा था। यह उछाल पिछले चार ट्रेडिंग दिनों में आई 7% की गिरावट के बाद आया है, जो सरकार द्वारा 5% हिस्सेदारी बेचने की घोषणा के बाद शुरू हुई थी। सरकार ने कंपनी के 5% इक्विटी का प्रतिनिधित्व करने वाले 17.42 करोड़ शेयर ₹256.59 प्रति शेयर के औसत मूल्य पर बेचकर ₹4,470 करोड़ जुटाए हैं। इस सौदे के बाद सरकार की हिस्सेदारी 63.17% से घटकर 58.17% रह गई है।
वैल्यूएशन पर क्या है राय?
BHEL का मौजूदा मार्केट कैप करीब ₹89,800 करोड़ है। JM Financial और ICICI Securities जैसे एनालिस्ट्स का अनुमान है कि FY25 से FY28E के बीच कंपनी के रेवेन्यू, EBITDA और PAT में अच्छी ग्रोथ दिखेगी। हालांकि, स्टॉक का वर्तमान वैल्यूएशन थोड़ा पेचीदा है। BHEL फिलहाल 23x FY28E की फॉरवर्ड P/E (Price-to-Earnings) पर ट्रेड कर रहा है, जबकि OFS फ्लोर प्राइस 21x FY28E की P/E पर था। इसकी तुलना में, पिछले बारह महीनों (TTM) के P/E आंकड़े 109x से 138x तक जा रहे हैं, जो हाल की लाभप्रदता पर संभावित दबाव का संकेत देते हैं। तुलना के लिए, इसके कुछ साथी जैसे Larsen & Toubro लगभग 35.29x TTM P/E पर, NTPC 13.7x से 22.16x पर, और Power Grid Corporation 15.0x पर ट्रेड कर रहे हैं।
नई ऊर्जा नीति और बड़ा ऑर्डर बुक
भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और ऊर्जा सुरक्षा पर नए सिरे से ध्यान देने का BHEL को रणनीतिक फायदा मिलेगा, जैसा कि ड्राफ्ट नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी (NEP) 2026 में बताया गया है। इस पॉलिसी का लक्ष्य 2030 तक प्रति व्यक्ति बिजली की खपत को 2,000 kWh और 2047 तक 4,000 kWh से अधिक करना है। साथ ही, रिन्यूएबल एनर्जी को एकीकृत करने और परमाणु ऊर्जा को 2047 तक 100 GW तक बढ़ाने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य हैं। इस दिशा में अकेले पावर सेक्टर के लिए 2032 तक करीब ₹50 लाख करोड़ के भारी निवेश की उम्मीद है। कंपनी का ₹2.23 ट्रिलियन का मजबूत ऑर्डर बुक मीडियम-टर्म के लिए अच्छी रेवेन्यू विजिबिलिटी देता है, जिसमें करीब 80% पावर सेगमेंट से जुड़ा है। NEP 2026 के तहत पुरानी क्षमता को बदलने और थर्मल क्षमता बढ़ाने पर जोर, साथ ही चीनी आयात पर लगे प्रतिबंधों को हटाना, BHEL के ऑर्डर पाइपलाइन को और मजबूत कर सकता है।
एनालिस्ट्स की मिली-जुली राय
BHEL पर एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है। JM Financial और ICICI Securities ने ₹355 और ₹343 के टारगेट प्राइस के साथ 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी है। Morgan Stanley ने 'Overweight' रेटिंग के साथ ₹304 का टारगेट दिया है और हालिया गिरावट पर खरीदारी की सलाह दी है। वहीं, Kotak Institutional Equities ने ₹120 के काफी निचले टारगेट प्राइस के साथ 'Sell' रेटिंग दी है, जो स्टॉक में संभावित डाउनसाइड रिस्क की ओर इशारा करता है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) जैसे टेक्निकल इंडिकेटर्स भी 30s से 40s की रेंज में बने हुए हैं, जिसे कुछ एनालिस्ट 'Sell' या 'Neutral' सिग्नल मानते हैं।
जोखिम और चुनौतियाँ
मज़बूत ऑर्डर बुक और सहायक ऊर्जा नीतियों के बावजूद, कुछ चिंताएँ भी बनी हुई हैं। TTM P/E का ऊंचा स्तर कुछ हद तक कंपनी की वर्तमान लाभप्रदता और वैल्यूएशन मल्टीपल की स्थिरता पर सवाल खड़े करता है। फॉरवर्ड मल्टीपल अधिक उचित लग सकते हैं, लेकिन वे आक्रामक अर्निंग ग्रोथ की उम्मीदों पर बहुत अधिक निर्भर हैं। कंपनी के लिए एग्जीक्यूशन रिस्क (प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने की चुनौती) भी एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय है। पिछले सरकारी नीतियों में असंगति ने घरेलू सप्लाई चेन को प्रभावित किया था, और भविष्य में ऐसी किसी भी नीतिगत बदलाव से प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन में बाधा आ सकती है। BHEL की सरकारी टेंडरों पर भारी निर्भरता इसे फिस्कल पॉलिसी और प्रोजेक्ट टाइमलाइन में बदलावों के प्रति संवेदनशील बनाती है। पिछले पांच सालों में बिक्री ग्रोथ में कमी और पिछले तीन सालों में कम रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) भी कुछ प्रमुख चुनौतियाँ हैं।
भविष्य की राह
सरकार की सफल OFS और चल रहे विनिवेश कार्यक्रम से कंपनी में पब्लिक फ्लोट और कॉर्पोरेट गवर्नेंस में सुधार की उम्मीद है। BHEL का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी अपने बड़े ऑर्डर बुक को समय पर पूरा करके कैसे लाभदायक रेवेन्यू स्ट्रीम बना पाती है। कंपनी के लॉन्ग-टर्म प्रॉस्पेक्ट्स भारत की महत्वाकांक्षी ऊर्जा संक्रमण और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास योजनाओं के सफल कार्यान्वयन से जुड़े हैं। एनालिस्ट्स के टारगेट प्राइस ₹254 से ₹370 तक फैले हुए हैं, और कुछ पूर्वानुमान इससे कहीं ज़्यादा आशावादी हैं। बाज़ार की नज़र आने वाले वित्तीय वर्षों में लगातार ऑर्डर इनफ्लो, मार्जिन में सुधार और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन की चुनौतियों से सफलतापूर्वक निपटने पर टिकी रहेगी।