शेयर में तूफानी तेजी की वजह
BHEL के शेयर ने हाल ही में ₹398.95 का नया लाइफ-टाइम हाई छुआ है, जो पिछले 18 सालों का रिकॉर्ड है। इस बढ़त की नींव कंपनी के मजबूत ऑपरेशनल परफॉरमेंस और सरकारी नीतियों पर टिकी है। फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में कंपनी के रेवेन्यू में 18% की शानदार ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ दर्ज की गई, जो लगभग ₹32,350 करोड़ रही। पूरे फाइनेंशियल ईयर के दौरान, BHEL ने करीब ₹75,000 करोड़ के नए ऑर्डर हासिल किए, जिससे इसकी कुल ऑर्डर बुक बढ़कर ₹2.4 लाख करोड़ हो गई है। यह ऑर्डर बुक कंपनी के पिछले बारह महीनों के रेवेन्यू का 7.2 गुना से भी ज़्यादा है। इन बड़े ऑर्डर्स में NTPC से मिला ₹13,500 करोड़ का EPC पैकेज भी शामिल है। कंपनी ने FY26 में 8.9 GW की पावर कैपेसिटी भी चालू की, जो उसकी एग्जीक्यूशन क्षमता को पुख्ता करती है।
इस पॉजिटिव मोमेंटम को देखते हुए, कुछ ब्रोकरेज हाउस बुलिश बने हुए हैं। JM Financial और ICICI Securities ने 'BUY' रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस ₹358-₹370 रखा है। वहीं, Morgan Stanley ने 'Overweight' रेटिंग के साथ टारगेट प्राइस बढ़ाकर ₹444 कर दिया है।
वैल्युएशन को लेकर चिंताएं
हालांकि, BHEL के मौजूदा वैल्युएशन मेट्रिक्स इसके इंडस्ट्री पीयर्स की तुलना में काफी ज़्यादा नजर आ रहे हैं। कंपनी का पिछले बारह महीनों का P/E रेश्यो लगभग 87.72, 89.33, और 111.6 है। यह वैल्यूएशन, Larsen & Toubro (L&T) के 31.70-34.5, Siemens India के 65.3-85.88, और KEC International के 20.0-24.2 की तुलना में काफी प्रीमियम पर है। जबकि BHEL के मुनाफे में पिछले साल 199.7% की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई, इसका रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 6.1% पर मामूली बना हुआ है।
जोखिम और सवाल
मजबूत ऑर्डर बुक और पॉजिटिव परफॉरमेंस के बावजूद, वैल्युएशन को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं। हाल ही में Prabhudas Lilladher ने स्ट्रेच्ड वैल्युएशन का हवाला देते हुए BHEL की रेटिंग घटाकर 'Reduce' कर दी है। यह व्यू कुछ अन्य ब्रोकरेज से अलग है, लेकिन यह एक बड़ा रिस्क दर्शाता है। कंपनी का P/E रेश्यो अपने पीयर्स से काफी ज़्यादा है, जिसका मतलब है कि स्टॉक की कीमत में पहले से ही भारी भविष्य की ग्रोथ फैक्टर की जा चुकी है। इसके अलावा, ₹2.4 लाख करोड़ के ऑर्डर बैकलॉग को पूरा करने में चुनौतियां हैं, जिनमें संभावित देरी और लागत में बढ़ोतरी शामिल है। इनपुट लागतों में वृद्धि, जिसे भू-राजनीतिक तनावों से और बढ़ाया जा सकता है, ऑपरेटिंग मार्जिन को प्रभावित कर सकती है। फाइनेंशियल मोर्चे पर, BHEL का इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो 2.7x पर कम है। इसका डेट-टू-इक्विटी रेश्यो बढ़कर 30.4% हो गया है और यह बढ़त की ओर है, जो कर्ज पर बढ़ती निर्भरता को दर्शाता है। हालांकि सरकारी खर्च एक सपोर्ट का काम कर रहा है, सरकारी नीतियों या फिस्कल प्राथमिकताओं में कोई भी बदलाव BHEL के रेवेन्यू को नुकसान पहुंचा सकता है।
