वैल्यूएशन को लेकर ब्रोकरेज की चेतावनी!
Bharat Heavy Electricals Limited (BHEL) के शेयर में हालिया उछाल के बावजूद, ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher ने वैल्यूएशन को लेकर चिंता जताते हुए स्टॉक की रेटिंग को 'Hold' से घटाकर 'Reduce' कर दिया है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब कंपनी ने FY26 की चौथी तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए हैं।
नतीजों की चमक!
BHEL ने FY26 की चौथी तिमाही में उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया है। कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 36.9% बढ़कर ₹2.4 ट्रिलियन के ऑर्डर बुक को सहारा दे रहा है। इस तिमाही में कंपनी ने ₹135 बिलियन का एक बड़ा EPC पैकेज NTPC से हासिल किया है। पावर सेगमेंट में 54% की ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ देखी गई, और कुल मिलाकर FY26 में 8.9 GW पावर कैपेसिटी कमीशन की गई। इसके अलावा, इंडस्ट्रियल सेगमेंट में भी ₹54 बिलियन के ऑर्डर्स मिले हैं। हाल ही में HVDC प्रोजेक्ट्स के लिए स्थानीयकरण (localization) नियमों में ढील से प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन को और बल मिलने की उम्मीद है।
यह मजबूत प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब भारत का कैपिटल गुड्स सेक्टर सरकारी खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस के कारण तेजी से बढ़ रहा है।
वैल्यूएशन की चिंता और ब्रोकरेज की राय
जहां ऑपरेशनल परफॉर्मेंस दमदार है, वहीं BHEL के शेयर का वैल्यूएशन चिंता का विषय बना हुआ है। पिछले एक साल में शेयर में 67.92% का उछाल आया है। मई 2026 की शुरुआत तक, BHEL का TTM P/E रेश्यो 143.70 से 150.60 के बीच है, जबकि FY27 के लिए फॉरवर्ड P/E अनुमान 40.4x और FY28 के लिए 27.0x है। स्पेशियलिटी इंडस्ट्रियल मशीनरी इंडस्ट्री का मीडियन P/E लगभग 29.95 है, जिसके मुकाबले BHEL का TTM वैल्यूएशन 400% से भी ज्यादा है। GuruFocus ने भी स्टॉक को 'मॉडेस्टली ओवरवैल्यूड' (modestly overvalued) करार दिया है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹1.31 ट्रिलियन है।
इस वैल्यूएशन गैप के कारण एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है। Prabhudas Lilladher ने ₹321 के टारगेट प्राइस के साथ 'Reduce' रेटिंग दी है। वहीं, Morgan Stanley ने ₹444 के टारगेट प्राइस के साथ 'Overweight' रेटिंग बरकरार रखी है। दूसरी ओर, Kotak Securities ने 'Sell' रेटिंग देते हुए ₹140 का टारगेट दिया है।
आगे क्या?
BHEL के लिए सबसे बड़ा रिस्क उसका वैल्यूएशन है, जो उद्योग के बाकी साथियों से काफी ऊपर है। यह बताता है कि शेयर की कीमत में भविष्य की ग्रोथ पहले से ही शामिल है। सेक्टर एनालिस्ट्स का मानना है कि कमोडिटी की ऊंची कीमतें मार्जिन पर दबाव डाल सकती हैं। साथ ही, ₹2.4 ट्रिलियन के बड़े ऑर्डर बुक को समय पर और लागत के भीतर पूरा करना भी एक चुनौती है।
