BHEL, SAIL Share Price: तूफानी तेजी! शेयर पहुंचे मल्टी-ईयर हाई, निवेशकों की बल्ले-बल्ले!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
BHEL, SAIL Share Price: तूफानी तेजी! शेयर पहुंचे मल्टी-ईयर हाई, निवेशकों की बल्ले-बल्ले!
Overview

भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL) के शेयरों में आज, 27 अप्रैल 2026 को, तूफानी तेजी देखी गई। दोनों कंपनियों के शेयर मल्टी-ईयर हाई (multi-year highs) पर पहुंच गए, जिसकी मुख्य वजह Institutional Investors की तरफ से ज़बरदस्त खरीदारी है।

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Institutional Investors के बढ़ते भरोसे के चलते सरकारी दिग्गज BHEL और SAIL के शेयर 27 अप्रैल 2026 को नए मल्टी-ईयर हाई (multi-year highs) पर पहुंच गए।

BHEL का शेयर ₹356.50 तक पहुंचा, जो 2007 के ऑल-टाइम हाई (all-time high) के करीब है। वहीं, SAIL का शेयर ₹185.20 के स्तर पर पहुंच गया, जो 2011 की शुरुआत के बाद सबसे बड़ा उछाल है। इस तेज़ी के पीछे Institutional Investors (जैसे FIIs और DIIs) का बड़ा हाथ है। BHEL में मार्च 2026 तिमाही में FIIs की हिस्सेदारी 6.3% से बढ़कर 7.2% हो गई, और DIIs की हिस्सेदारी 19.7% से बढ़कर 23.98% पर पहुंच गई। SAIL में भी FIIs ने लगातार पांच तिमाहियों से अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है, जो मार्च 2026 तक 2.6% से बढ़कर 5.0% हो गई। इस दौरान रिटेल निवेशकों (retail investors) की हिस्सेदारी में कमी आई है, जो institutional ownership shift का एक बड़ा संकेत है। इतिहास गवाह है कि जब भी institutional buying बढ़ी है, तब इन शेयरों में बड़ी तेज़ी आई है।

BHEL: मजबूत ऑर्डर बुक और मार्जिन ग्रोथ की उम्मीदें

BHEL की इस तूफानी तेजी का मुख्य कारण इसकी लगातार बढ़ती ऑर्डर बुक और मुनाफा (profit) बढ़ाने की क्षमता है। ब्रोकरेज फर्म JM Financial Institutional Securities ने भी स्टॉक पर 'Buy' रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस को ₹393 कर दिया है। एनालिस्ट्स का मानना है कि BHEL के पास 18/14GW की एक मजबूत ऑर्डर बुक पाइपलाइन है, जिसमें High Voltage Direct Current (HVDC) सिस्टम, नौसेना की बंदूकें (naval guns) और परमाणु कंपोनेंट्स जैसे गैर-थर्मल सेक्टर्स में भी ग्रोथ की अच्छी संभावनाएं हैं। पुराने प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से कंपनी की एग्जीक्यूशन एफिशिएंसी (execution efficiency) और मार्जिन में सुधार की उम्मीद है। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि अगले 2-3 सालों में मार्जिन बढ़कर मिड-टीन्स (mid-teens) तक पहुंच सकते हैं। इससे FY25-28E तक रेवेन्यू ग्रोथ लगभग 20% सालाना रह सकती है और EBITDA मार्जिन में भी शानदार बढ़ोतरी की संभावना है। वर्तमान में, स्टॉक का फॉरवर्ड P/E (forward P/E) 28x पर ट्रेड कर रहा है, जो L&T (P/E ~35x) और Siemens India (P/E ~40x) जैसे पियर्स (peers) की तुलना में काफी सस्ता है।

SAIL: कैपेसिटी एक्सपेंशन और मजबूत स्टील मार्केट का फायदा

वहीं, SAIL को देश के मजबूत स्टील मार्केट और अपनी कैपेसिटी एक्सपेंशन (capacity expansion) योजनाओं का सीधा फायदा मिल रहा है। मार्च 2026 तिमाही में भारत में स्टील स्प्रेड्स (steel spreads) में जोरदार रिकवरी देखी गई, जिसकी वजह रोबस्ट डिमांड (robust demand), इंपोर्ट ड्यूटी (import duties) और कच्चे माल की बढ़ी कीमतें हैं। एनालिस्ट्स का मानना है कि SAIL का आउटलुक मजबूत बना रहेगा, जहां लगातार डिमांड और कीमतों में बढ़ोतरी से कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी (profitability) बढ़ेगी और कैपेसिटी एक्सपेंशन को भी सपोर्ट मिलेगा। टेक्निकल चार्ट्स (technical charts) के अनुसार, SAIL ने ₹172 के रेजिस्टेंस (resistance) को तोड़ा है और आने वाले 3-4 हफ्तों में शेयर ₹194-₹199 तक जा सकता है। कंपनी का फॉरवर्ड P/E 12x पर है, जो Tata Steel और JSW Steel जैसे घरेलू स्टील पियर्स के बराबर है।

आगे की राह: चुनौतियां और जोखिम

हालांकि, इन दोनों कंपनियों के लिए कुछ चुनौतियां और जोखिम भी हैं। BHEL को सरकारी ऑर्डर्स (government orders) पर निर्भरता और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स (infrastructure projects) की टाइमलाइन को लेकर जोखिम है। वहीं, मार्जिन को मिड-टीन्स तक ले जाने के लिए टेक्नोलॉजिकल एडॉप्शन (technological adoption) और फेवरेबल इंपोर्ट पॉलिसी (favorable import policies) पर निर्भरता है, जो रेगुलेटरी बदलावों के अधीन हैं। DIIs की बड़ी हिस्सेदारी (23.98%) भी अस्थिरता पैदा कर सकती है। SAIL के लिए, स्टील सेक्टर का साइक्लिकल (cyclical) नेचर, ग्लोबल इकोनॉमी में मंदी, और कोकिंग कोल जैसे इनपुट कॉस्ट (input costs) में उतार-चढ़ाव जोखिम पैदा कर सकते हैं। बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर (capital expenditure) से कंपनी की फाइनेंसेज पर दबाव आ सकता है अगर डिमांड कमज़ोर हुई।

भविष्य की संभावनाएं

आगे चलकर, एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश से BHEL की ऑर्डर बुक बढ़ती रहेगी, और रेवेन्यू ग्रोथ व मार्जिन एक्सपेंशन इसके री-रेटिंग (re-rating) के लिए मुख्य फैक्टर होंगे। SAIL के लिए, सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्चों और हाउसिंग डेवलपमेंट (housing development) से स्टील की डिमांड बनी रहने की उम्मीद है, जो प्रॉफिटेबिलिटी और एक्सपेंशन को सपोर्ट करेगी। कुल मिलाकर, ब्रोकरेज का अनुमान दोनों कंपनियों के लिए पॉजिटिव है, लेकिन निवेशक ग्रोथ की रफ़्तार और मार्जिन की स्थिरता पर कड़ी नज़र रखेंगे।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.