Bharat Heavy Electricals Ltd (BHEL) ने जून तिमाही (FY27) में **₹376.71 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल के **₹455.50 करोड़** के नुकसान से एक बड़ा उलटफेर है। इस टर्नअराउंड का मुख्य कारण पावर सेगमेंट में आई राजस्व (Revenue) की भारी बढ़ोतरी है।
BHEL का शानदार फाइनेंशियल रिकवरी
Bharat Heavy Electricals Ltd (BHEL) ने 30 जून, 2026 को समाप्त पहली तिमाही में एक काबिले तारीफ फाइनेंशियल रिकवरी दर्ज की है। कंपनी ने ₹376.71 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट कमाया है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर की इसी अवधि में हुए ₹455.50 करोड़ के नेट लॉस से बिल्कुल उलट है। इस दौरान कंपनी का कुल इनकम (Total Income) बढ़कर ₹7,911.86 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹5,658.07 करोड़ था।
पावर सेगमेंट का जलवा
इस प्रॉफिट ग्रोथ की सबसे बड़ी वजह पावर सेगमेंट का शानदार प्रदर्शन रहा, जिसने रेवेन्यू और प्रॉफिटेबिलिटी दोनों में ज़बरदस्त सुधार दिखाया। पावर बिजनेस से रेवेन्यू बढ़कर ₹5,919.50 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही में यह ₹3,898.86 करोड़ था। इस ऑपरेशनल रिकवरी के चलते सेगमेंट प्रॉफिट ₹562.81 करोड़ रहा, जो पिछले साल इसी अवधि में हुए ₹510 करोड़ के लॉस से बड़ा बदलाव है। भारत में पावर प्लांट इक्विपमेंट के एक प्रमुख सप्लायर के तौर पर, BHEL का यह प्रदर्शन डोमेस्टिक पावर जनरेशन सेक्टर में बढ़ी हुई एक्टिविटी को दिखाता है।
इंडस्ट्री सेगमेंट और कमाई
पावर के अलावा, कंपनी के इंडस्ट्री सेगमेंट ने भी मजबूती दिखाई, जिसका रेवेन्यू बढ़कर ₹1,778.22 करोड़ हो गया। हालांकि, इस सेगमेंट का प्रॉफिट पिछले साल की समान अवधि के ₹306.84 करोड़ से घटकर ₹242.61 करोड़ रह गया। इससे पता चलता है कि टॉप-लाइन रेवेन्यू में बढ़ोतरी के बावजूद, कंपनी को इस खास बिजनेस एरिया में मार्जिन पर कुछ दबाव का सामना करना पड़ा। इन नतीजों के बाद, कंपनी की बेसिक अर्निंग्स पर शेयर (Basic Earnings Per Share) ₹1.08 रही, जबकि पिछले फाइनेंशियल ईयर की जून तिमाही में यह ₹1.31 के नेगेटिव फिगर पर थी।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
भविष्य में, इस रिकवरी की स्थिरता काफी हद तक कंपनी की बड़ी ऑर्डर बुक को पूरा करने की क्षमता पर निर्भर करेगी। निवेशक यह देख सकते हैं कि BHEL अपने प्रोजेक्ट टाइमलाइन को कैसे मैनेज करता है और कॉम्पिटिटिव इंडस्ट्रियल गुड्स सेक्टर में प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित करने वाले संभावित कॉस्ट प्रेशर से कैसे निपटता है। एक पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) के तौर पर, कंपनी का परफॉर्मेंस सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और पावर प्लांट कमीशनिंग साइकिल्स से भी जुड़ा हुआ है। फाइनेंशियल ईयर के बाकी बचे समय में कंपनी की ग्रोथ की राह का आकलन करने के लिए ऑर्डर एग्जीक्यूशन की तिमाही प्रगति और नए कॉन्ट्रैक्ट्स के इनफ्लो पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा।
